प्रत्यूष राज। भारतीय टीम ने अंडर 19 वर्ल्ड कप में जीत के साथ शुरुआत की है। पहले मुकाबले में उन्होंने बांग्लादेश को 84 रन से मात दी। भारतीय बल्लेबाज आदर्श ने इस मुकाबले में 76 रनों की पारी खेली। आदर्श ने अपने बल्ले से उन सभी लोगों को जवाब दिया जिन्होंने इस युवा खिलाड़ी की काबिलियत पर सवाल उठाए थे। आदर्श अपने पिता और भाई के भरोसे पर भी खरे उतरे जिन्होंने इस खिलाड़ी के क्रिकेट खेलने के सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जान झोंक दी थी।
आदर्श के भाई और पिता की चली गई नौकरी
आदर्श के भाई अंकित ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीक में कहा कि उनके परिवार ने आर्थिक तौर पर काफी बुरा समय देखा है। कोरोना ने अंकित और पिता दोनों की नौकरी चली गई थी। उन्होंने कहा, ‘बुरा वक्त था। मेरे पिता चीनी ज्वैलरी कंपनी में काम करते थे। उन्हें 25 हजार रुपए मिलते थे। मेरी भी नौकरी चली गई थी। आदर्श अंडर-16 के लिए खेल रहा था। हमारे लिए घर का किराया देना भी मुश्किल था। हमारी मां आंगनवाड़ी में काम करती थी और वहीं से घर का खर्चा चलता था।’
पिता ने बेच दी जमीन
उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया लेकिन उससे सिर्फ घर का खर्च चल पाता था। ऐसे में मेरे पिता ने गांव की जमीन बेच दी थी और पैसा बैंक में आदर्श के नाम से जमा किया। जब क्रिकेट फिर शुरू हुआ तब आदर्श के लिए वह पैसा बहुत काम आया।’ अंकित ने यह भी बताया कि जब पिता ने जमीन बेचने का फैसला किया तब सभी रिश्तेदारों ने ताने मारे थे। उनकी बिरादरी में जमीन बेचना अच्छी बात नहीं माना जाता है। लोगों को हैरानी थी कि आदर्श के पिता बेटे को क्रिकेट खिलाने के लिए यह कर रहे हैं।
आदर्श के पास था बस एक साल
आदर्श को पिता ने खुद को साबित करने के लिए एक साल दिया था। अंकित ने कहा, ‘आदर्श की जिद को देखते हुए पिता ने उसे एक साल दिया और कहा कि अगर वह इसमें सफल नहीं हुए तो पहले पढ़ाई की ओर लौट जाएगा। एक साल में यूपी अंडर-14 में आ गया, अगले साल कप्तान बन गया फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।’
आदर्श के क्रिकेट खेलने को लेकर जो लोग परिवार को ताना मारते थे वही आज उसका गुणगान कर रहे हैं. अंकित ने कहा, ‘समय बड़ा बलवान हैं। आदर्श धीरे-धीरे टीम में जगह बनाता रहा। हमें कई लोगों के मैसेज और कॉल आ रही हैं। हर कोई अच्छा-अच्छा बोल रहा है। यही जिंदगी का सच है।’
