सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आईपीएल स्पॉट-फिक्सिंग मामले में एक याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के लिए अपनी सहमति जता दी। जिसमें न्यायमूर्ति मुकुल मुदगल समिति की रिपोर्ट को न्यायमूर्ति आरएम लोढा समिति को सौंपने की मांग की गई है। जो बीसीसीआई के लिए प्रशासनिक सुधार पर विचार कर रही है। रिपोर्ट में कुछ खिलाड़ियों के नाम हैं। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) के आवेदन को न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के समक्ष रखा गया। जिसने 7 अगस्त को दोपहर दो बजे इसे तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
याचिका में दावा किया गया है कि अगर तीसरी रिपोर्ट की पूरी विषयवस्तु न्यायमूर्ति लोढा समिति को नहीं दी जाती तो न्यायमूर्ति मुद्गल समिति और जांच दल द्वारा खर्च समय और किए गए प्रयास बेकार चले जाएंगे। याचिका के अनुसार संबंधित सरकारों द्वारा किया जाने वाला भारी खर्च भी पूरी तरह बेकार चला जाएगा। याचिका में पहली रिपोर्ट और न्यायमूर्ति मुदगल समिति की तीसरी रिपोर्ट का पूरा पाठ न्यायमूर्ति लोढा समिति को सौंपने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को देने की मांग की गई है। तीसरी रिपोर्ट पिछले साल एक नवंबर को शीर्ष अदालत में जमा की गई थी।
एसोसिएशन के सचिव आदित्य वर्मा की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है- यह जरूरी है क्योंकि खेल में आई खराबी के स्तर का मूल्यांकन करने के लिए न्यायमूर्ति लोढा समिति को पूरे पाठ का लाभ देना होगा ताकि बीसीसीआई के लिए प्रशासनिक सुधारों पर सुझाव देते समय समिति ऐसे कदम सुझा सके जिनसे सुनिश्चित होगा कि भविष्य में किसी घोटाले से क्रिकेट के खेल की साख खराब नहीं होगी। याचिका के अनुसार अगर तीसरी रिपोर्ट का पूरा पाठ न्यायमूर्ति लोढा समिति को नहीं दिया गया तो न्यायमूर्ति मुदगल समिति और जांच दल द्वारा खर्च समय और किए गए प्रयास व संबंधित सरकारों द्वारा किया गया भारी-भरकम खर्च पूरी तरह बेकार चला जाएगा।
याचिका में कहा गया है कि जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट में एन श्रीनिवासन समेत 13 लोगों के खिलाफ आरोप हैं और सीलबंद लिफाफा किसी को नहीं दिया गया और यह सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के पास है। आवेदन के मुताबिक इस अदालत के आदेश के अनुरूप न्यायमूर्ति लोढा समिति ने गुरुनाथ मयप्पन, राज कुंद्रा और चेन्नई सुपर किंग्स व राजस्थान रॉयल्स टीमों को दी जाने वाली सजा के संबंध में उनकी रिपोर्ट का पहला हिस्सा प्रकाशित किया है।
समिति बीसीसीआई के लिए प्रशासनिक सुधारों पर विचार कर रही है और काम पूरा करने के लिए इस साल दिसंबर के अंत तक का समय मांगा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढा की अध्यक्षता में गठित सेवानिवृत्त जजों की तीन सदस्यीय समिति को आईपीएल-6 से जुड़ी अनियमितताओं में आगे जांच का काम सौंपा गया है। इनमें बीसीसीआई के तत्कालीन सीओओ सुंदर रमन के खिलाफ आरोप भी शामिल हैं।
समिति में न्यायमूर्ति अशोक भान और न्यायमूर्ति आरवी रविंद्रन भी सदस्य हैं। समिति ने जुलाई में बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह-स्वामी राज कुंद्रा के खिलाफ सजा तय की। दोनों को सट्टेबाजी का दोषी ठहराया गया था। सुंदर रमन के खिलाफ आरोपों के सिलसिले में शीर्ष अदालत ने न्यायमूर्ति लोढा समिति को निर्देश दिया था कि उसके खिलाफ आरोपों के मामले में आगे जांच की जाए और सच सामने लाया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति ने चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और राजस्थान रॉयल्स को दो साल के लिए आईपीएल से निलंबित किया है। मयप्पन और कुंद्रा पर बीसीसीआई द्वारा आयोजित किसी भी मैच के लिए आजीवन प्रतिबंध लगाया गया है।