वर्ल्ड कप 2023 में ग्लेन मैक्सवेल ने अफगानिस्तान के खिलाफ जब 201 रन की बेहतरीन पारी खेली तब 1983 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य दिल्ली में एक कार्यक्रम में थे। लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने अपने कॉलम में इस जानकारी दी। उन्होंने वानखेड़े में खेली गई मैक्सवेल की पारी को इस सदी की सबसे बेहतरीन पारी करार दिया।

मिड डे के अनुसार, सुनील गावस्कर और उनके साथी खिलाड़ी 40 साल बाद कपिल देव की पारी को याद कर रहे थे, जो उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली थी। बाकी दुनिया मैक्सवेल और कपिल देव की पारी की तुलना करने में लगी थी। मैक्सवेल की पारी को कपिल देव की पारी से बेहतर बताया जा रहा था।

यह बात गावस्कर को पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा कि तुलना करना भारतीयों की आदत में है। भारत के अलावा कहीं भी ऐसा नहीं होता। ऐसा करते हुए हम यह नहीं सोचते कि अपने ही हीरो को नीचा दिखाते हैं। आइए जानते हैं सुनील गावस्कर ने अपने कॉलम में क्या कहा? उन्होंने अफगानिस्तान के प्रदर्शन और सेमीफाइनल को लेकर भी अपने कॉलम में लिखा है।

कपिल देव की पारी को याद कर रहे थे साथी

संयोग की बात है कि 1983 विश्व कप विजेता टीम नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में थी जब ग्लेन मैक्सवेल इस सदी की सबसे बेहतरीन पारी खेल रहे थे। हमें अपडेट मिल रहे थे कि वानखेड़े स्टेडियम में क्या हो रहा है। कपिल देव की पारी को उनके साथी 40 साल बाद याद कर रहे थे। तुरंत दोनों पारियों के बीच तुलना की जाने लगी और कुछ लोगों का कहना था कि यह पारी उससे बेहतर थी।

हम अपने हीरो को नीचा दिखा रहे हैं

भारतीय लोगों में तुलना करने की बेवकूफी भरी आदत है । हमारे पड़ोसी देश सहित दुनिया में कहीं भी अलग-अलग युग के खिलाड़ियों और प्रदर्शन की तुलना नहीं की जाती है, लेकिन हम भारत में ऐसा करना पसंद करते हैं। यह दिखाने की कोशिश होती है कि वर्तमान अतीत से बेहतर है। यह नहीं समझते कि ऐसा करने की कोशिश में हम अपने हीरो को नीचा दिखा रहे हैं।

सुनील गावस्कर ने सुनाई खरी-खोटी

रिकॉर्ड टूटने के लिए बनते हैं क्योंकि यह इंसान के प्रगति का संकेत है, लेकिन अगर यह रिकॉर्ड किसी भारतीय का है और कोई अन्य भारतीय इसके करीब होता है, तो इसे टूटते या आगे निकलते देखना पागलपन जैसा होता है। क्या आपने कभी किसी अन्य देश को अतीत और वर्तमान के बीच तुलना करते सुना है?

भारत को हमेशा से कपिल देव की तलाश

हां, यह उम्मीद हमेशा बनी रहती है कि आज की उभरती प्रतिभाएं पिछले युग की मैच-विजेता खिलाड़ियों जैसी होंगी। जैसे भारत में एक और कपिल देव की तलाश हमेशा रहती है क्योंकि भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसा कौन है जिसने कपिल की तरह नियमित रूप से बल्ले और गेंद दोनों से मैच को प्रभावित किया हो?

कपिल जैसा गेंद और बल्ले से योगदान देने वाला नहीं मिला

हां, ऐसे अद्भुत गेंदबाज भी हुए हैं जिन्होंने हमारे लिए मैच जिताए हैं और साथ ही बल्लेबाज भी हुए हैं जिन्होंने भारत को जीत दिलाने के लिए शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन किसी ने भी बल्ले और गेंद दोनों से इतनी सहजता और नियमित रूप से ऐसा नहीं किया, जितना कपिल ने किया।

क्या है दोनों युग में अंतर

प्लेइंग कंडिशन अलग थीं, नियम अलग थे, इक्वीपमेंट ऐसे नहीं थे। खिलाड़ियों की मदद करने के लिए कोई टेक्नोलॉजी नहीं थी। न ही खिलाड़ी की किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए सपोर्ट स्टाफ था। हां, आज खूब स्क्रूटनी होती है और लोकप्रियत की होड़ में इससे दबाव बढ़ता है।

तुलना करना बेकार और समय की बर्बादी

खिलाड़ी काफी मुश्किल स्थिति में हैं। इसलिए तुलना करना बेकार है और समय की पूरी बर्बादी है। आज, फ्रेंचाइजी के प्रति वफादारी खिलाड़ियों के कारण समर्थकों और प्रशंसकों के बीच टकराव भी होता है। प्रशंसक अक्सर भूल जाते हैं कि वे अब देश के लिए खेल रहे हैं, फ्रेंचाइजी के लिए नहीं।

कपिल की पारी रिकॉर्ड नहीं की गई

दुख की बात है कि कपिल की पारी रिकॉर्ड नहीं की गई क्योंकि बीबीसी हड़ताल पर था। उसके पास उस समय प्रसारण अधिकार थे। पारी को रिकॉर्ड करने के लिए कोई अपने निजी कैमरे का उपयोग नहीं कर रहा था, जैसा कि आजकल हर कोई करता है।

वानखेड़े स्टेडियम में मौजूद लोगों के लिए गर्व का पल

आज खिलाड़ियों के प्रदर्शन को फिल्माया और रिकॉर्ड किया जाता है, लेकिन जिन परिस्थितियों में प्रदर्शन किया गया, उसे प्रभावी तौर पर बयां नहीं किया जा सकता। जो लोग उस दिन वानखेड़े स्टेडियम में थे वे गर्व से कह सकेंगे कि उन्होंने क्रैम्प से जूझते मैक्सवेल को इस सदी की सबसे बेहतरी एक दिवसीय पारी खेलते देखी थी।

मैक्सवेल की पारी ने बताया क्यों ऑस्ट्रेलिया 5 बार बना चैंपियन

मैक्सवेल की पारी ने ऑस्ट्रेलियाई टीम को जबड़े से जीत भी छीनने में मदद की। इससे एक बार फिर पता चला कि क्यों वे 50 ओवर के विश्व कप में पांच बार चैंपियन बने हैं। इस पारी ने उस समय तक बेहद उत्साहित अफगानिस्तान टीम का मनोबल भी टूट गया।

अफगानिस्तान का लय टूटा

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आखिरी मैच में अफगानिस्तान उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर सका और हार गया। सेमीफाइनल में पहुंचने की संभावना भी खत्म हो गईं। फिर भी वह टीम गर्व से वापस जा सकती है। उसने टूर्नामेंट में एक से अधिक पूर्व चैंपियंस को हराया। क्रिकेट जगत को बताया कि वह ऐसी टीम है जिसे कोई भी फिर कभी हल्के में नहीं ले सकता।

सेमीफाइनल के लिए भारतीय टीम के लिए क्या बोले गावस्कर

सेमीफाइनल के लिए मंच तैयार है। भारत के पास 2019 में पिछले टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के खिलाफ हार से उबरने का मौका है। टीमों के लिए नॉकआउट कभी भी आसान नहीं होता है। दिन खराब होने पर ‘अलविदा और चार साल बाद फिर मिलेने की कहावत हो जाती है। पिछले तीन टूर्नामेंट मेजबान देशों ने जीते हैं। क्या ऐसा फिर होगा? एक अरब से अधिक भारतीय प्रार्थना कर रहे हैं कि ऐसा होना चाहिए।