वेंकट कृष्ण बी। हरियाणा के ड्रेसिंग रूम में अंशुल कंबोज को ‘AK 47’ के नाम से जाना जाता है। आजकल घरेलू सर्किट में ऐसे बहुत कम तेज गेंदबाज हैं, जो कंबोज की तरह अपनी मूवमेंट से बल्लेबाजों को डराते हैं। 24 वर्षीय इस खिलाड़ी का यह चौथा घरेलू सीजन है। हर साल उनकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हो रहा है। इस सीजन में लाल गेंद वाले क्रिकेट में 38 विकेट लेने वाले कंबोज पर भारतीय चयनकर्ताओं की निगाहें हैं खासकर जून में इंग्लैंड के टेस्ट दौरे के कारण।
इस रणजी ट्रॉफी में कंबोज के कारण हरियाणा गुरुवार से शुरू हो रहे कर्नाटक के खिलाफ अहम मैच से पहले ग्रुप सी में शीर्ष पर है। उसे क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के लिए ड्रॉ काफी है। अब तक चार मैचों में कंबोज ने 22 विकेट चटकाए हैं। इसमें एक पारी में सभी 10 विकेट लेना भी शामिल है। जब वह मैदान में दौड़ते हैं, तो उनके साथी खिलाड़ी “एके 47” चिल्लाते हैं। 47 उनकी शर्ट के पीछे का नंबर है।
कंबोज ने 47 क्यों चुना
कंबोज ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “जब उन्होंने नंबर पूछा, तो हर कोई अपनी जन्मतिथि या लकी नंबर चुन रहा था। लेकिन मैं कुछ ऐसा अनोखा नंबर ढूंढ रहा था, जो नाम से मैच करे। इसलिए मैंने 47 चुना क्योंकि यह भी अच्छी तरह से तुकबंदी करता है…अब हर कोई मुझे इसी नाम से पुकारता है।”
मजबूरी में बने तेज गेंदबाज
हरियाणा के करनाल में पले-बढ़े कंबोज का क्रिकेट में प्रवेश मुख्य रूप से टेनिस-बॉल टूर्नामेंट के माध्यम से हुआ। तेज गेंदबाजी करना सिर्फ एक मजबूरी थी क्योंकि,”कोई भी टेनिस बॉल से स्पिन नहीं करना चाहता। अगर आप स्पिन करते हैं तो आपकी पिटाई होगी। इसलिए तेज गेंदबाजी करना सबसे अच्छा विकल्प था और यहीं आपको सटीकता भी सीखनी थी क्योंकि गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है।”
खुद को बॉलिंग ऑलराउंडर मानते हैं कंबोज
करनाल जिले के गांवों में ही कंबोज ने ऑलराउंडर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा, “आपको दोनों काम करने होते हैं। बॉलिंग के बाद आप कितनी देर तक बैठे रहेंगे? मुझे बैटिंग भी पसंद थी और टेनिस-बॉल क्रिकेट में दोनों को महत्व दिया जाता है। मैं खुद को बॉलिंग ऑलराउंडर मानता हूं।”
ग्लेन मैकग्रा को अपना आदर्श मानते हैं कंबोज
अब तक घरेलू सर्किट में कंबोज ने अपनी गेंदबाजी से सभी को चौंकाया है। भले ही उनकी गति बहुत अच्छी न हो, लेकिन 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद को दोनों तरफ मूव कराने की उनकी क्षमता बल्लेबाजों की परीक्षा ले रही है। जिन खिलाड़ियों ने उनका सामना किया है,उन्हें उनकी बेहतरीन सटीकता उनकी सबसे बड़ी ताकत लगती है, जो उनकी मूवमेंट के साथ-साथ चलती है। इसका एक बड़ा कारण ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ग्लेन मैकग्रा को अपना आदर्श मानना है, जिनकी गेंदबाजी के वीडियो कंबोज हमेशा देखते रहते हैं।
सटीक लाइन लेंथ पर कंबोज का जोर
कंबोज ने कहा, “मैं निश्चित रूप से कहूंगा कि सटीक लाइन लेंथ ही मुख्य कारण है कि बहुत से बल्लेबाज मेरे खिलाफ संघर्ष करते हैं। मैंने सीखा है कि जब आप गेंद को सही जगह पर डालते हैं, चाहे दिन का कोई भी समय हो या पारी, आप बल्लेबाज को चुनौती देने के लिए बाध्य होते हैं। इसलिए भले ही मैं अपनी गेंदबाजी में नए कौशल जोड़ता रहूं, मैं यथासंभव सटीक होना चाहता हूं।”
