Asian Games 2018: भारत को एशियाड में तीसरा गोल्ड मेडल दिलवााने वाले सौरभ चौधरी ने तीन साल पहले ही पिस्टल पकड़ना सीखा था। तीन साल पहले तक सौरभ काे शूटिंग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन इसे जानने की इच्छा और लगातर प्रैक्टिस ने आज उन्हें इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया। सौरभ एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीतने वाले भारत के पहले शूटर बन गए हैं। सौरभ ने एशियाई खेलों में इस स्पर्धा का रिकॉर्ड तोड़ते हुए कुल 240.7 अंक हासिल किए और गाेल्ड जीता।
साल 2015 में निशानेबाजी में कदम रखने वाले सौरभ ने अपने दोनों निशाने जापान के तोमोयुकी मात्सुदा से बेहतर लगाए। सौरभ ने अपने आखिरी के दो शॉट 10.2 और 10.4 लगाकर एशियन गेम्स में रिकॉर्ड स्थापित किया। भारत के लिए गोल्ड हासिल करने वाले सौरभ एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। सौरभ के पिता जगमोहन सिंह साधारण किसान हैं। सौरभ के माता-पिता उनकी इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। घरवालों की मानें तो गांव के कुछ लड़कों को शूटिंग की प्रैक्टिस करता देख सौरभ ने शूटिंग करने का फैसला लिया। साल 2015 में पहली बार उन्होंने बिनौली के वीरशाहमल राइफल क्लब में प्रैक्टिस करना शुरू किया।

सौरभ यूपी के बागपत जिले में स्थिति एक स्कूल से अपनी दसवीं की पढ़ाई भी कर रहे हैं। सौरभ के भाई के मुताबिक गांव और आसपास में जब भी मेलों का आयोजन होता तो सौरभ वहां से ईनाम जीतकर लाता। दरअसल, सौरभ मेलों में जाकर गुब्बारों पर निशाना लगाते और इसके बदले उन्हें ईनाम दिया जाता। जब घरवालों को लगा कि सौरभ की दिलचस्पी इसमें जरूरत से ज्यादा बढ़ रही है तो उन्होंने सौरभ का भरपूर सपोर्ट किया। आर्थिक हालात ठीक नहीं होते हुए भी घरवालों ने सौरभ को 1 लाख 75 हजार रुपए की बंदूक दिलाई।
इससे पहले सौरभ अपने कोच की बंदूक से घंटों प्रैक्टिस किया करते थे। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौरभ चौधरी को गोल्ड मेडल जीतने पर ईनाम स्वरूप 50 लाख देने की घोषणा की। सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया है कि सौरभ को राज्य सरकार में राजपत्रित अधिकारी का पद दिया जाएगा।

