गत चैंपियन कर्नाटक ने वर्षाबाधित मैच में वीजेडी पद्धति के जरिये मुंबई को 54 रन से हराकर लगातार चौथी बार विजय हजारे ट्रॉफी के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बना चुके देवदत्त पडिक्कल ने 95 गेंद में 11 चौकों की मदद से नाबाद 81 रन बनाए, जबकि भारत के अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर ने 80 गेंद में नाबाद 74 रन बनाए। उनकी इस पारी में 11 चौके भी शामिल थे।
कर्नाटक ने जीत के लिए 255 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बारिश होने तक 33 ओवर में एक विकेट पर 187 रन बनाए थे। उस समय वीजेडी प्रणाली से लक्ष्य 132 रन था और कर्नाटक 55 रन आगे था जिससे उसे विजेता घोषित किया गया। इससे पहले मुंबई को करारा झटका तब लगा जब अभ्यास के दौरान अंगुली में चोट के कारण उसके शीर्ष बल्लेबाज सरफराज खान (303 रन) टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
सरफराज खान की गैर मौजूदगी में मुंबई आठ विकेट पर 254 रन ही बना सके। शम्स मुलानी ने 86 रन बनाए, जबकि सिद्धेश लाड ने 38 रन का योगदान दिया। शम्स मुलानी और कप्तान सिद्धेश लाड (58 गेंदों में 38 रन; 4×4) ने छठे विकेट के लिए 76 रन जोड़े। सिद्धेश लाड के आउट होने के बाद, शेडगे और कोटियन जल्दी-जल्दी आउट हो गए, लेकिन शम्स मुलानी डटे रहे।
शम्स मुलानी ने 91 गेंदों में आठ चौकों की मदद से 86 रन बनाए। शम्स मुलानी ने अपना अर्धशतक पूरा करने के लिए 68 गेंदें लीं। शम्स मुलानी ने साईराज पाटिल (25 गेंदों में 33 रन नाबाद; 5×4, 1×6) से सपोर्ट मिलने के बाद आखिरी ओवरों में तेजी दिखाई, जिससे मुंबई ने आखिरी पांच ओवरों में 59 रन बनाए। साईराज पाटिल के आखिरी समय के हमले ने मुंबई के गेंदबाजों को बचाव करने के लिए कुछ रन दिए।
शम्स मुलानी आखिरी ओवर में अभिलाष शेट्टी की गेंद पर LBW हो गए। कर्नाटक के लिए विद्याधर पाटिल ने 42 रन देकर तीन विकेट लिए, जबकि अभिलाश शेट्टी और विदवथ कावेरप्पा ने दो-दो विकेट लिए। जवाब में मयंक अग्रवाल और देवदत्त पडिक्कल ने सावधानी से शुरुआत की, लेकिन पावरप्ले के अंदर ही कर्नाटक ने अपने कप्तान को खो दिया।
मयंक अग्रवाल मोहित अवस्थी की गेंद पर 12 रन बनाकर स्लिप में कैच हो गए। मयंक अग्रवाल इस सीज़न में दो शतक और दो अर्धशतक के साथ कर्नाटक के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। मुंबई को खराब फील्डिंग से और नुकसान हुआ, क्योंकि शानदार फॉर्म में चल रहे देवदत्त पडिक्कल को दो जीवनदान मिले।
मोहित अवस्थी की गेंद पर देवदत्त पडिक्कल के बल्ले का बाहरी किनारा लगा और गेंद फर्स्ट स्लिप पर रघुवंशी के पास गई, लेकिन मौका गंवा दिया गया। इससे पहले देवदत्त पडिक्कल जब 24 रन पर थे तब ओंकार तरमाले ने डीप फाइन लेग से दौड़ते हुए एक आसान सा मौका छोड़ दिया। देवदत्त पडिक्कल ने मैदान पर की गई उन गलतियों का मुंबई को खामियाजा भुगतने पर मजबूर किया।
लंबे कद के बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने ने आक्रामक रुख अपनाया। इसके बाद, कर्नाटक को कोई नहीं रोक सका क्योंकि देवदत्त पडिक्कल और करुण नायर ने दूसरे विकेट के लिए 150 गेंदों में 143 रन जोड़े। देवदत्त पडिक्कल ने अब इस सीज़न में आठ पारियों में चार शतक और दो अर्धशतक के साथ 102.14 की औसत से 715 रन बनाए हैं।
