उत्तराखंड से हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक, इस सर्दी में बर्फ न पड़ने का एहसास क्यों हो रहा है? देश भर में सर्दियों में सूखा पड़ा रहा। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हुआ, जहां अपेक्षित वर्षा केवल आठ फीसद ही हुई। नतीजा यह कि इस सर्दी में हिमालयी राज्यों की पर्वतीय चोटियां असामान्य रूप से बर्फ रहित और बंजर दिखाई दे रही हैं, जिससे मौसमी वर्षा में बढ़ती अनिश्चितता, जल सुरक्षा, वन अग्नि की संवेदनशीलता और कृषि उत्पादकता को लेकर चिंता बढ़ रही हैं।
चौथाई से भी कम बारिश
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के अनुसार, दिसंबर और जनवरी में उत्तराखंड में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद से दिसंबर में छठी सबसे कम बारिश दर्ज की गई। जम्मू और कश्मीर में जनवरी में बहुत कम बारिश और बर्फबारी हुई। भारत में इस बार शीत ऋतु शुष्क रही है। जनवरी के पहले पखवाड़े में जितनी बारिश होने की उम्मीद थी, उससे एक चौथाई से भी कम बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हुआ है, जहां इस अवधि में अपेक्षित बारिश का केवल आठ फीसद ही प्राप्त हुआ है।
एक दशक से सर्दियां शुष्क
उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों में पिछले एक दशक से सर्दियां लगातार शुष्क होती जा रही हैं। पिछले दस वर्षों में चार बार ऐसा हुआ है, जब उत्तराखंड में जनवरी में बहुत कम बारिश हुई है। इससे संकेत मिलता है कि यह प्रवृत्ति आम होती जा रही है। वर्ष 2024-25 की शीत ऋतु में उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में वर्षा की 96 फीसद कमी देखी गई थी।
ग्लेशियर मौसम शुरू होने से पहले ही पिघल सकते हैं। इससे प्रो-ग्लेशियल और सुपरग्लेशियल झीलों का निर्माण हो सकता है, जिससे ग्लेशियर विस्फोट से बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। संतुलन रेखा की ऊंचाई, जो ग्लेशियर पर उस क्षेत्र को दर्शाती है, ऊपर की ओर खिसक सकती है। परिणामस्वरूप, नदियों में जल प्रवाह की मात्रा भी कम हो जाएगी।
मनीष मेहता, वैज्ञानिक, वाडिया संस्थान
अध्ययनों से पता चला है कि उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में शीत ऋतु की वर्षा में मामूली गिरावट का रुझान है। सर्दियों के दौरान, उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी भारत के क्षेत्रों में आमतौर पर हल्की से मध्यम तीव्रता की वर्षा होती है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभों के कारण होती है। यह वर्षा मैदानी इलाकों में उगाई जाने वाली और सिंचाई पर निर्भर रबी फसलों के लिए जरूरी है। साथ ही, अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में, भूजल भंडारों के पुनर्भरण के लिए बर्फ या बारिश आवश्यक है।
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ
दिसंबर और जनवरी के महीनों में, पश्चिमी विक्षोभ की धाराएं आमतौर पर बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमी से भरी पूर्वी या पश्चिमी हवाओं के साथ परस्पर क्रिया करती हैं। इससे हिमालय के ऊपर हवाओं का संगम होता है, जिसके परिणामस्वरूप बर्फ या बारिश के रूप में वर्षा होती है। इस साल पश्चिमी विक्षोभ इतने मजबूत नहीं रहे कि बारिश हो सके। दिसंबर में, आठ पश्चिमी विक्षोभ धाराएं (सामान्यत: छह के मुकाबले) उत्तरी भारतीय क्षेत्र से गुजरीं, लेकिन इनसे बहुत कम बारिश हुई।
इस साल पश्चिमी विक्षोभ इतने मजबूत नहीं रहे कि बारिश हो सके। दिसंबर में, आठ पश्चिमी विक्षोभ धाराएं (सामान्यत: छह के मुकाबले) उत्तरी भारतीय क्षेत्र से गुजरीं, लेकिन इनसे बहुत कम बारिश हुई। पश्चिमी विक्षोभ में फिलहाल नमी की मात्रा कम है और निम्न दबाव का क्षेत्र उथला है, जिससे नमी उठाने की इसकी क्षमता बाधित हो रही है।
सीएस तोमर, निदेशक, आइएमडी-देहरादून
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ में फिलहाल नमी की मात्रा कम है और निम्न दबाव का क्षेत्र उथला है, जिससे नमी उठाने की इसकी क्षमता बाधित हो रही है। यह विक्षोभ उच्च अक्षांश पर उत्तर की ओर बढ़ रहा है, जिससे कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो रही है, क्योंकि यह सबसे पहले इन क्षेत्रों से टकराता है और वहां नमी छोड़ सकता है, लेकिन उत्तराखंड में नहीं, जो पूर्व में स्थित है।
कमजोर वायु संचार
जब यह विक्षोभ भारतीय उपमहाद्वीप के पास पहुंचता है, तो वहां का वायु संचार कमजोर हो सकता है, जिससे इस क्षेत्र पर इसका ठहराव समय कम हो जाता है। ऐसी खबरें आई हैं कि नेपाल में भी इस बार शुष्क शीत ऋतु देखी गई है। वर्षा में देरी की समस्या हिमपात के बाद जमीन पर बर्फ के टिके रहने की कम अवधि के कारण और भी बढ़ जाती है। इसका मतलब यह है कि फरवरी में जब बर्फ गिरती है, तो न्यूनतम तापमान कम रहता है। दैनिक तापमान में अत्यधिक अंतर के कारण अधिकतम तापमान अपेक्षाकृत अधिक होता है।
जंगल की आग का असर
हिमालय के विभिन्न हिस्सों में और विशेष रूप से नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित फूलों की घाटी के कुछ हिस्सों में, जंगल में भीषण आग लगी हुई है। इसका कारण हिमपात में कमी के कारण वनभूमि में नमी की कमी को बताया जा रहा है। एक नवंबर को आग की शुरुआत के बाद से, भारतीय वन सर्वेक्षण ने उपग्रह के माध्यम से उत्तराखंड में 1,600 से अधिक, हिमाचल प्रदेश में 600 और जम्मू और कश्मीर में लगभग 300 आग लगने की चेतावनियां दर्ज की हैं।
हिमालयी हिमनदों में पहले से ही लगातार द्रव्यमान हानि हो रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बर्फ की स्थिरता में कमी और शीतकालीन वर्षा में कमी से संकट और भी गंभीर हो सकता है। दिसंबर में बर्फबारी होने पर नमी रिसकर लंबे समय तक बनी रहती है। यह कई रबी फसलों के लिए फायदेमंद है। पहली वर्षा के बाद पश्चिमी विक्षोभ में देरी होने पर भी, जल्दी बर्फबारी व बारिश होना लाभकारी होता है।
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