सनी देओल की फिल्म बॉर्डर 2 को लेकर जबरदस्त बज बना हुआ है। इसके ट्रेलर ने ऐसा भौकाल मचाया है कि एडवांस बुकिंग में कई रिकॉर्ड अभी से ही ध्वस्त होने लगे हैं। यहां भी सबसे ज्यादा चर्चा सनी देओल के एक डायलॉग की हो रही है। ट्रेलर के अंत में सनी ने अपने सिग्नेचर स्टाइल में कह दिया है- जितने तुम्हारे पाकिस्तान में लोग नहीं, उतने हमारे हिंदुस्तान में ईद पर बकरे कटते हैं। अब इस डायलॉग में हॉल में सीटियां बजना तय है, जितना पाकिस्तान को पीटा जाएगा, उतना ही माहौल सिनेमा घरों में बनेगा। लेकिन इस एक डायलॉग ने एक सवाल को भी जन्म दिया है- असल में भारत में ईद पर कितने बकरे कटते हैं?
बकरों को लेकर क्या आंकड़े मौजूद?
अब इस सवाल का स्पष्ट आंकड़ा सरकार द्वारा नहीं दिया जाता है, लेकिन ईद पर कितने बकरे खरीदे जाते हैं, इसे लेकर जरूर आंकड़े मिलते हैं। साल 2023 में बीएमसी ने एक डेटा साझा किया था। उस डेटा में बताया गया कि 2023 में मुंबई के देवनार बूचड़खाने से सिर्फ एक हफ्ते के अंदर 1.68 लाख से ज्यादा बकरे और भेड़ें बेची गईं थीं। उसी रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि देवनार बूचड़खाने में देश के अलग-अलग राज्यों से 1,77,278 बकरे और भेड़ें बिक्री के लिए आई थीं। यहां भी 1,68,498 जानवर बिक गए थे।
जानकारी के लिए बता दें कि एशिया का सबसे बड़ा बूचड़खाना मुंबई की देवनार मंडी में ही स्थित है। पिछले साल भी ईद-उल-अजहा से कुछ दिन पहले ही 1.5 लाख से ज्यादा जानवर वहां लाए गए थे। इनमें बकरे और करीब 8,000 भैंसें शामिल थीं। पिछले साल ही मुंबई के अलावा देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी लाखों की संख्या में बकरों की बिक्री देखने को मिली थी। लखनऊ में जॉगर्स पार्क, दुबग्गा, नींबू पार्क, हर्डिंग ब्रिज, खुर्मनगर और मौलवीगंज में बकरा मंडियां लगाई गई थीं। यहां भी कुर्बानी के लिए सबसे ज्यादा बकरे दुबग्गा मंडी से खरीदे गए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक बकरों की कीमत 10 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक गई थी।
सनी देओल के डायलॉग का फैक्ट चेक
वैसे ये जानना भी जरूरी हो जाता है कि बॉर्डर 2 में सनी देओल ने जो डायलॉग मारा है, वो पाकिस्तान को ललकारने के लिए है। वास्तविक आंकड़े उससे अलग कहानी बयां करते हैं। असल में 1971 युद्ध के दौरान पाकिस्तान की जनसंख्या 6.18 करोड़ थी, वहीं भारत में कुर्बानी दी जाने वाले जानवरों की संख्या लाखों में। इसी तरह अगर आज के परिपेक्ष में देख लें तो पाकिस्तान की जनसंख्या 25 करोड़ के आसपास है, वहीं भारत में जानवरों की कुर्बानी वहीं लाखों में सीमित है। ऐसे में मनोरंजन के लिहाज से यह डायलॉग बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश में कितनी कुर्बानी?
अब भारत में तो बकरों की कुर्बानी ईद पर दी ही जाती है, दुनिया के दूसरे कई मुल्कों में भी बड़ी संख्या में ऐसा होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईद-उल-अजहा के दौरान हर साल दुनिया भर में करीब 5 करोड़ जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इसमें बकरी, भेड़, गाय-भैंस और ऊंट जैसे अन्य पशु शामिल होते हैं। यहां भी पाकिस्तान में ईद-उल-अजहा के वक्त बड़ी संख्या में कुर्बानी दी जाती है। पाकिस्तान टैनर्स एसोसिएशन (PTA) का 2023 का एक आंकड़ा बताता है कि पाकिस्तान में 61 लाख जानवरों की कुर्बानी दी गई थी। इसमें 26 लाख गाय, 30 लाख बकरे, 3.5 लाख भेड़, 1.5 लाख भैंस और 87 हजार ऊंट शामिल थे।
सशस्त्र बलों को ‘बॉर्डर 2’ का इमोशनल ट्रिब्यूट
2023 को लेकर तो बांग्लादेश सरकार का भी एक आंकड़ा मिलता है। उस आंकड़े के अनुसार बांग्लादेश में ईद-उल-अजहा पर 1,00,41,812 जानवरों की कुर्बानी दी गई थी। इसमें 45 लाख 81 हजार गाय शामिल थीं, 1 लाख 78 हजार भैंस और 48 लाख 49 हजार बकरे। 2024 को लेकर भी बांग्लादेश के मत्स्य और पशुपालन मंत्रालय ने एक डेटा जारी किया था। उसके मुताबिक उस साल कुर्बानी के लिए 12.94 करोड़ जानवर कुर्बानी के लिए उपलब्ध थे।
क्यों दी जाती है बकरों की कुर्बानी?
बकरीद से कुछ दिन पहले मुस्लिम समुदाय के लोग बकरा खरीदकर अपने घर ले आते हैं। वे उसे रोजाना खाना-पीना देते हैं, उसकी देखभाल करते हैं और उसका पालन-पोषण बिल्कुल अपने बच्चे की तरह करते हैं। इसके पीछे एक गहरा भावनात्मक और धार्मिक कारण होता है। जब कोई कुछ दिनों तक बकरे की सेवा करता है, तो स्वाभाविक रूप से उसके मन में उसके प्रति प्रेम और लगाव पैदा हो जाता है—ठीक वैसे ही, जैसा प्रेम हज़रत इब्राहीम को अपने बेटे से था। इसी प्रेम और त्याग की भावना की परीक्षा के रूप में बाद में दुआ पढ़कर और अल्लाह का नाम लेकर ज़बह किया जाता है। बकरीद का त्योहार दरअसल हज़रत इब्राहीम की उसी सुन्नत और उनके बेशुमार त्याग की याद में मनाया जाता है, जो इंसान को लगाव, समर्पण और कुर्बानी का अर्थ समझाता है।
ये भी पढ़ें- बॉर्डर 2 में ऑपरेशन चंगेज़ खान की कहानी
