World Health Organization: डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से पिछले एक साल में अमेरिकी प्रशासन लगातार दुनिया को सरप्राइज कर रहा है। कुछ ऐसा ही एक बार फिर हुआ क्योंकि अमेरिका आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) से अलग हो गया है। अमेरिका ने कहा है कि उसने इस संगठन से अलग होने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, और इस संगठन से किनारा करना राष्ट्रपति ट्रंप का अहम लक्ष्य था।
दरअसल, अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने बयान जारी कर इस बात का ऐलान कर दिया कि वह अब आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन का सदस्य नहीं है। इतना ही नहीं, WHO के जेनेवा स्थित हेडक्वार्टर के बाहर से अपना झंडा तक हटवा लिया है। ट्रंप सरकार की तरफ से कहा गया कि अब अमेरिका WHO के साथ बेहद ही सीमित काम करने वाला है।
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ट्रंप सरकार ने जारी किया था आदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साल पहले अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन ही WHO से बाहर निकलने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए नोटिस दे दिया था। इतना ही नहीं, अमेरिका ने सीधे तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन को बकाया 260 मिलियन डॉलर का पैसा देने से भी इनकार कर दिया है।
अमेरिका स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल होने की भी हमारी अभी कोई योजना नहीं है, और न ही अमेरिका इसमें दोबारा शामिल होगा। अमेरिका ने कहा है कि हम बीमारियों की निगरानी और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के बजाए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करेंगे।
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WHO के पास नहीं ज्यादा विकल्प
बता दें WHO को छोड़ने के लिए एक साल पहले नोटिस देना था और सभी बकाया फीस भी देनी होगी। अमेरिका पर वर्तमान में WHO का लगभग 260 मिलियन डॉलर करीब 2380 करोड़ रुपये का बकाया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस पैसे को चुकाने की संभावना बहुत कम है, और विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास विकल्प नहीं है।
US स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा कि WHO में सभी तरह के अमेरिकी सरकारी फंडिंग बंद कर दी गई है। संगठन में तैनात सभी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों को वापस बुला लिया गया है। इसने यह भी कहा कि अमेरिका ने WHO की स्पॉन्सर कमेटियों, लीडरशिप बॉडी, गवर्नेंस ढांचे और तकनीकी वर्किंग ग्रुप में आधिकारिक भागीदारी बंद कर दी है।
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