US President Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पदभार ग्रहण करने के बाद ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं। चाहे अवैध प्रवासियों को लेकर की जा रही कार्रवाई हो या टैरिफ को लेकर फैसला हो। डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कथित तौर पर अपने कर्मचारियों का पालीग्रॉफ टेस्ट कर रहा है, ताकि उन जाससों का पता लगाया जा सके, जिन्होंने प्रवासियों के छापे के बारे में मीडिया को जानकारी लीक हो।

सीबीएस न्यूज ने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की सचिव क्रिस्टी नोएम के हवाले से बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट लगभग तीन हफ्ते से चल रहा है। अभी तक यह बात साफ नहीं है कि कितने कर्मचारियों का टेस्ट किया गया है, लेकिन शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में नोएम ने कहा कि डीएचएस ने जानकारी लीक करने वाले दो लोगों की पहचान कर ली है, जिन पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों की जिंदगी को खतरे में डालने का मुकदमा चलाया जाएगा।

10 साल तक की हो सकती है सजा

नोएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘हमने डीएचएस के अंदर आपराधिक लीक करने वालों की पहचान की है और इन अपराधियों को गुंडागर्दी के लिए न्याय विभाग को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इन व्यक्तियों को संघीय जेल में 10 साल तक की सजा हो सकती है। हम सभी लीक करने वालों को खोजकर उनका सफाया कर देंगे। उन्हें जेल की सजा होगी और हम अमेरिकी लोगों को न्याय दिलाएंगे।’ 18 फरवरी को नोएम ने पहली बार घोषणा की थी कि मीडिया लीक को रोकने के लिए डीएचएस अपने कर्मचारियों की पॉलीग्राफिंग शुरू करेगा।

भारत टैरिफ कम करने को हुआ तैयार

ट्रंप प्रशानस अवैध प्रवासियों पर कस रहा नकेल

जनवरी में ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद से उनका प्रशासन मास डिपोर्टेशन पर नकेल करने और अवैध प्रवासियों को बड़े पैमाने पर डिपोर्ट करने पर फोकस कर रहा है। व्हाइट हाउस के आंकड़ों के अनुसार, 50,000 से ज्यादा अवैध अप्रवासियों को हटाया गया है। ट्रंप प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीति को भी हटा दिया, जिसके तहत इमिग्रेशन एजेंटों को स्कूलों, पूजा स्थलों और अन्य संवेदनशील जगहों के पास इमिग्रेशन गिरफ्तारियां करने से प्रतिबंधित किया गया था। यह कदम वर्तमान में कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ट्रंप ने जेलेंस्की के सामने रखा था यूक्रेन से खनिज निकालने का प्रस्ताव