अमेरिका ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि वह 75 देशों के नागरिकों को दिए जाने वाले इमिग्रेंट वीजा पर फिलहाल रोक लगा रहा है। इन देशों में पाकिस्तान भी शामिल है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों से आने वाले कुछ लोग भविष्य में सरकारी वेलफेयर योजनाओं का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय (US Department of State) ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर चल रही एक बड़ी नीति समीक्षा का हिस्सा है। राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी साफ कह चुके हैं कि अमेरिका आने वाले प्रवासी लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहिए और उन्हें अमेरिकी टैक्स देने वालों पर बोझ नहीं बनना चाहिए। यह नीति अपडेट “Immigrant Visa Processing Updates for Nationalities at High Risk of Public Benefits Usage” नाम से जारी किया गया है। इसे आखिरी बार 14 जनवरी को अपडेट किया गया था और यह नियम 21 जनवरी 2026 से लागू होगा।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका आने वाले प्रवासी आर्थिक रूप से खुद को संभाल सकें और अमेरिका पर आर्थिक बोझ न बनें।” मंत्रालय ने यह भी बताया कि इमिग्रेशन से जुड़ी सभी मौजूदा नीतियों, नियमों और दिशानिर्देशों की पूरी तरह से समीक्षा की जा रही है।

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विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समीक्षा का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिन देशों को “हाई रिस्क” माना गया है, वहां से आने वाले लोग अमेरिका में सरकारी मदद पर निर्भर न हों और “पब्लिक चार्ज” न बनें।

नई गाइडलाइन के तहत जिन देशों के नागरिकों पर यह रोक लागू होगी, उनमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, इराक, नेपाल, नाइजीरिया, रूस, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन समेत कई अन्य देश शामिल हैं। हालांकि, इन देशों के लोग वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगे और जिनके इंटरव्यू पहले से तय हैं, वे इंटरव्यू में शामिल भी हो सकेंगे। लेकिन इस रोक के दौरान किसी को भी इमिग्रेंट वीजा जारी नहीं किया जाएगा।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले से पहले से जारी किए गए इमिग्रेंट वीजा रद्द नहीं होंगे। मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका में किसी व्यक्ति को प्रवेश देने से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के पास होती है।

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यह रोक केवल इमिग्रेंट वीजा पर लागू होगी। नॉन-इमिग्रेंट वीजा, जैसे कि टूरिस्ट वीजा, बिजनेस वीजा और अन्य अस्थायी वीजा पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इस फैसले की जानकारी सबसे पहले फॉक्स न्यूज ने दी थी। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, यह कदम उन प्रवासियों पर सख्ती करने की नीति का हिस्सा है, जिन्हें अमेरिका में भविष्य में “पब्लिक चार्ज” बनने का खतरा माना जाता है।

“पब्लिक चार्ज” अमेरिका का एक इमिग्रेशन नियम है। इसके तहत यह जांच की जाती है कि कोई विदेशी नागरिक अमेरिका में जाकर सरकारी लाभ और मदद पर निर्भर तो नहीं हो जाएगा। इसका असर किसी व्यक्ति के अमेरिका में प्रवेश या ग्रीन कार्ड पाने पर भी पड़ सकता है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दुनिया भर में मौजूद अपने दूतावासों को एक केबल भेजा था। इसमें इमिग्रेशन कानून के “पब्लिक चार्ज” नियम के तहत जांच को और सख्त करने के निर्देश दिए गए थे।

इस गाइडलाइन में कांसुलर अधिकारियों से कहा गया है कि अगर किसी आवेदक के बारे में यह लगता है कि वह भविष्य में सरकारी मदद पर निर्भर हो सकता है, तो उसका वीजा खारिज किया जा सकता है। इसके लिए आवेदक की सेहत, उम्र, अंग्रेज़ी भाषा की जानकारी, आर्थिक स्थिति और लंबे समय तक मेडिकल इलाज की जरूरत जैसे पहलुओं को देखा जाएगा। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति और प्रवास विरोधी रुख के अनुरूप माना जा रहा है।