संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने इसे न केवल महत्वपूर्ण बल्कि एक अत्यावश्यक कदम बताया है।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने X पर एक पोस्ट में कहा, “सुरक्षा परिषद में सुधार करना न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अनिवार्य है। जो लोग आज विशेषाधिकारों से चिपके रहने की कोशिश करते हैं, उन्हें कल इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। हम सभी को बदलाव के लिए पर्याप्त साहसी होना चाहिए। दुनिया इंतजार नहीं कर रही है। हमें भी नहीं करना चाहिए।”
बता दें, वर्तमान में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं- संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और यूनाइटेड किंगडम। जिनके पास महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर वीटो का अधिकार है। परिषद में दस अस्थायी सदस्य भी शामिल हैं, जो दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है। हालांकि, भारत लंबे समय से इसमें अपनी भागीदारी चाहता रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तो यहां तक कहा है कि भारत इस लक्ष्य को “सर्वोच्च प्राथमिकता” देता है।
उन्होंने 2024 में संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को पूरा भरोसा है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार और विस्तार के बाद उसका स्थायी सदस्य बनने के लिए पूरी तरह योग्य है, क्योंकि वह आज की वैश्विक वास्तविकताओं को सही ढंग से दर्शाता है।
इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस और संगठन के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक पहले ही भारत के योगदान की सराहना कर चुके हैं और भारत को संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था का एक बेहद अहम हिस्सा बता चुके हैं।
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उन्होंने पिछले साल कहा था कि भारत संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। वे बहुपक्षवाद के प्रबल समर्थक हैं। महासचिव के भारतीय सरकार के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। हमारे कई भारतीय सहकर्मी यहां हमारे साथ काम करते हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर भारत की एक महत्वपूर्ण आवाज है।
अतीत में रूस, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट देने का समर्थन किया है। भारत 2021 से 2022 तक सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य भी रहा है। इसके बाद से भारत लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार किए जाएं, ताकि वह आज की वैश्विक राजनीतिक स्थिति के अनुरूप बन सके।
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