ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड रद्द किए जाने पर पत्रकार और लेखक आतिश तासिर ने मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि वह भारतीय हैं लेकिन सरकार ने उन्हें देश से निकाल दिया। लेखक ने कहा गृह मंत्रालय ने उन्हें जो नोटिस भेजा था उस पर उन्हें कानून के मुताबिक जितना समय मिलना चाहिए था उतना समय नहीं दिया गया।

उन्होंने एक ट्वीट के जरिए उस ई-मेल का फोटो भी साझा किया है जिस उन्होंने सरकार के साथ इस पर बातचीत की है। उन्होंने यह मेल डिप्टी काउंसिल जनरल को भेजी है। तासिर ने ट्वीट में कहा ‘मुझे निर्धारित 21 दिन का समय न देकर महज 24 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया। तब से इस संबंध में मंत्रालय की तरफ से मुझे कोई भी सूचना नहीं दी गई है।’

बता दें कि आतिश तासिर भारतीय मूल के ब्रिटिश सिटिजन हैं और वह टाइम मैग्जिन के लिए लिखते रहे हैं। उन्होंने ट्वीट के अलावा एक लेख के जरिए भी मोदी सरकार के इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘मुझे 21 दिनों का समय मिलना चाहिए था जिससे मैं सरकार के दावे को चैलेंज कर सकता। लेकिन मुझे 20वें दिन इस बात इसके बारे में बताया गया अगर मैं जवाब नहीं देता तो लगता कि मैं इसपर कुछ नहीं कहना चाहता और मेरी ओसीआई को रद्द कर दिया जाता।’

उन्होंने लेख में दावा किया है कि सरकार की तरफ से नोटिस मिलते ही उन्होंने जवाब दायर कर दिया था। तासिर ने लेख में बताया ‘मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र के बारे में एक लेख (डिवाइडर इन चीफ) जिसके बाद मुझे टारगेट किया जाने लगा है। कुछ लोग मुझे कांग्रेस का ‘पीआर मैनेजर’ तक कहने लगे हैं। यहां तक कि मेरे विकीपीडिया पर भी मेरे बारे में झूठी बातें लिखी जा रही हैं। पाकिस्तान कार्ड का इस्तेमाल कर बीजेपी मुझे परेशानी कर रही है। मैं भारतीय हूं, पर सरकार ने मुझे निकाला दे दिया।’

वह बताते हैं ‘मेरे पिता ब्रिटिश इंडिया में पैदा हुए और मेरी दादी ब्रिटिश थीं। मेरे दादा जी बंटवारे के बाद पाकिस्तान नागरिक बन गए थे। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि आतिश तासीर ने अपना पीआईओ एप्लिकेशन जमा करते समय यह बात छुपाई है कि उनके पिता पाकिस्तानी मूल के हैं। इस वजह से आतिश का ओसीआई कार्ड रद्द किया गया है।