पाकिस्तान की संसद ने मंगलवार को कश्मीरियों के प्रति दृढ़ और अटूट समर्थन व्यक्त करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर भारत से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त किए जाने का फैसला वापस लेने की मांग की।
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली या निचले सदन ने यह प्रस्ताव पारित किया है। जो कि पाकिस्तान द्वारा हर साल पांच फरवरी को मनाए जाने वाले कश्मीर एकजुटता दिवस से एक दिन पहले पारित किया गया है।
सरकारी रेडिया पाकिस्तान के मुताबिक प्रस्ताव में भारत से पांच अगस्त (अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने) और 31 अक्टूबर (राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करने) के फैसलों को तत्काल वापस लेने और घाटी में सुरक्षाबलों को हटाने एवं पाबंदियों को तत्काल खत्म करने की मांग की गई है।
संसद से पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘पाकिस्तान कश्मीरी लोगों का राजनीतिक, नौतिक और कूटनीतिक स्तर पर समर्थन जारी रखेगा। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की कि वह इस मामले का अपने प्रस्ताव के अनुरूप शांतिपूर्ण समाधान करे।’
पाकिस्तान की संसद ने इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) से भी कश्मीर पर तत्काल सम्मेलन बुलाने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया कि वह भाजपा सरकार की युद्धपरक नीति और आक्रमता को खारिज करता है क्योंकि इससे क्षेत्र की शांति और स्थिरता को खतरा है।
बता दें कि बीती साल अगस्त में केन्द्र की मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल 370 के सभी प्रावधान हटा लिए थे। इसके साथ ही सरकार ने राज्य को दो हिस्सों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। पाकिस्तान ने भारत सरकार के इस फैसले पर काफी हायतौबा मचायी थी।
हालांकि भारत सरकार का इस पर कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से भी इस मामले में दखल की अपील की थी। हालांकि भारत सरकार ने अमेरिका को भी दो टूक कह दिया था कि जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी अन्य देश का दखल मंजूर नहीं है।
इसके साथ ही भारत सरकार जम्मू कश्मीर में कट्टरपंथ को रोकने के लिए कई उपाय कर रही है और राज्य में विकास कार्यों पर काफी फोकस कर रही है।
