पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “शांति बोर्ड” (Peace Board) में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य गाजा में युद्ध को खत्म करना और वहां शांति लाना है।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि उसे उम्मीद है कि इस ढांचे के निर्माण से “स्थायी युद्धविराम के कार्यान्वयन, फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता में और अधिक वृद्धि, साथ ही गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे”।

पाकिस्तान को उम्मीदें

युद्धविराम: गाजा में लड़ाई पूरी तरह बंद हो।

मदद: फिलिस्तीनी लोगों तक खाना और दवाइयाँ (मानवीय सहायता) आसानी से पहुंचें।

पुनर्निर्माण: युद्ध से तबाह हुए गाजा को फिर से बसाया जाए।

स्वतंत्र फिलिस्तीन: पाकिस्तान चाहता है कि 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश बने, जिसकी राजधानी ‘अल कुद्स अल शरीफ’ (यरूशलेम) हो।

यह ‘शांति बोर्ड’ क्या है और यह कैसे काम करेगा?

डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद सिर्फ गाजा ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के झगड़ों को सुलझाना है।

अध्यक्ष (Chairman): इस बोर्ड के अध्यक्ष खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे।

ताकत: ट्रंप के पास बहुत ज्यादा शक्तियां होंगी। वह जब तक चाहें अध्यक्ष रह सकते हैं। वह किसी भी देश को बोर्ड से हटा सकते हैं और बोर्ड के फैसलों को रोक (Veto) सकते हैं।

फीस: जो देश 3 साल से ज्यादा समय तक इसका सदस्य बने रहना चाहते हैं, उन्हें 1 बिलियन डॉलर (अरबों रुपये) नकद देने होंगे।

विवाद और चिंताएं

संयुक्त राष्ट्र (UN) को खतरा: यूरोपीय देशों को डर है कि ट्रंप का यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की जगह लेना चाहता है या उसे कमजोर करना चाहता है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप इसे UN के एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़ा करना चाहते हैं।

कठोर नियम: ट्रंप ने कहा है कि पुराने तरीके काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए यह नया बोर्ड ज्यादा फुर्ती से काम करेगा।

कौन-कौन शामिल हो रहा है?

अभी तक हंगरी, इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बिना किसी शर्त के इसमें शामिल होने के लिए हां कर दी है। अब पाकिस्तान भी इसमें शामिल हो गया है।

भारत के लिए कूटनीतिक दुविधा (Diplomatic Dilemma for India): भारत के लिए यह स्थिति “इधर कुआँ, उधर खाई” जैसी हो सकती है-

संयुक्त राष्ट्र (UN) बनाम ट्रंप: भारत हमेशा से संयुक्त राष्ट्र का समर्थक रहा है और सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सीट की मांग करता रहा है। चूंकि ट्रंप का यह बोर्ड UN के विकल्प (rival) के तौर पर देखा जा रहा है, इसलिए इसमें शामिल होने का मतलब UN को कमजोर करना माना जा सकता है।

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मित्रता का संतुलन: भारत के संबंध अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) और इज़राइल दोनों से बहुत अच्छे हैं। अगर भारत इस बोर्ड से पूरी तरह दूर रहता है, तो ट्रंप नाराज हो सकते हैं। वहीं, अगर शामिल होता है, तो यह उसकी गुटनिरपेक्ष (Non-aligned) नीति और ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के नेता के रूप में उसकी छवि पर असर डाल सकता है।

पाकिस्तान का कारक: पाकिस्तान के शामिल होने से भारत पर दबाव बढ़ सकता है। अगर भारत बाहर रहता है, तो पाकिस्तान इस मंच का उपयोग भारत के खिलाफ (जैसे कश्मीर मुद्दे पर) नैरेटिव बनाने के लिए करने की कोशिश कर सकता है, भले ही बोर्ड का फोकस अभी गाजा पर है।

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