भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों के पीछे किस तरह की बातचीत और रणनीति चलती है, इसकी एक झलक हाल ही में सामने आई है। मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर रुकने के बाद, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन से सीधे संपर्क साधा और अमेरिकी सत्ता के शीर्ष स्तर तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। यह संपर्क भारत के लिए काम कर रहे अमेरिकी लॉबिस्टों के जरिए किया गया, जिसकी पूरी जानकारी अब अमेरिकी कानून के तहत हुई आधिकारिक फाइलिंग से सामने आई है।
10 मई 2025 को जब ऑपरेशन सिंदूर रोका गया, उसी दिन भारत सरकार ने अमेरिका से संपर्क करना शुरू कर दिया। यह संपर्क जेसन मिलर के जरिए किया गया, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ काम कर चुके हैं और अमेरिका में भारत के आधिकारिक लॉबिस्ट भी हैं।
उस दिन भारत की तरफ से अमेरिका के चार बड़े अधिकारियों को फोन किए गए। इनमें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के रिकी गिल, व्हाइट हाउस के स्टीवन चेउंग और ट्रंप की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स शामिल थीं। इन कॉल्स का मकसद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हो रही मीडिया कवरेज पर बात करना था। यह जानकारी अमेरिका के FARA (Foreign Agents Registration Act) कानून के तहत की गई आधिकारिक फाइलिंग से सामने आई है।
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इसके तुरंत बाद भारत का फोकस अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर आ गया। भारतीय पक्ष ने वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के साथ मिलकर फिर से जैमीसन ग्रीर से संपर्क किया, ताकि ट्रेड बातचीत की स्थिति पर चर्चा की जा सके। यह सब राष्ट्रपति ट्रंप के उस बयान के कुछ दिन बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को व्यापार को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करके कम कराया है। 21 मई को दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान का मामला “ट्रेड के ज़रिए” सुलझाया।
FARA रिकॉर्ड बताते हैं कि जेसन मिलर की कंपनी SHW पार्टनर्स LLC ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत के दूतावास की मदद की। इस दौरान ट्रेड डील को लेकर बातचीत करवाई गई और भारतीय अधिकारियों की अमेरिकी विदेश विभाग और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ बैठकें तय कराई गईं।
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में जब एक सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका जाने वाला था, उससे पहले भारतीय दूतावास ने व्हाइट हाउस के कई वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया। 31 मई से 5 जून के बीच बैठक का समय मांगने के लिए पांच बार फोन या ईमेल किए गए। इस प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ, हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी और इंडिया कॉकस के सदस्यों से मुलाकात की।
इसी दौरान पाकिस्तान भी काफी सक्रिय रहा। ऑपरेशन सिंदूर के शुरू होने और संघर्षविराम के बीच पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन, सांसदों और मीडिया से 50 से ज़्यादा बैठकों की कोशिश की। FARA रिकॉर्ड के मुताबिक, पाकिस्तानी दूतावास ने ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों के जरिए 60 से अधिक अधिकारियों और बिचौलियों से संपर्क किया।
पिछले एक साल में, जब से ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभाला है, भारत ने अमेरिका में दो बड़ी लॉबिंग फर्मों को काम पर रखा है। इनमें से एक SHW पार्टनर्स है, जिसका एक साल का कॉन्ट्रैक्ट 1.8 मिलियन डॉलर का है। इस फर्म के मुखिया जेसन मिलर हैं, जो ट्रंप के 2016 के चुनाव अभियान में मुख्य प्रवक्ता थे।
इसके अलावा अगस्त 2025 में भारत ने मर्करी पब्लिक अफेयर्स नाम की दूसरी लॉबिंग फर्म को भी हायर किया। इसके लिए तीन महीने तक हर महीने 75,000 डॉलर देने का समझौता हुआ। इस फर्म की टीम में ब्रायन लांजा शामिल हैं, जो 2020 में ट्रंप की ट्रांजिशन टीम में कम्युनिकेशन डायरेक्टर थे। ट्रंप की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स भी 2024 के आखिर तक इसी फर्म से जुड़ी थीं।
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50 फीसदी पेनल्टी टैरिफ लागू होने से कुछ दिन पहले और ट्रेड बातचीत में अड़चन आने के बाद, मर्करी फर्म को फेडरल लॉबिंग, मीडिया रिलेशन, डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीति जैसी ज़िम्मेदारियां दी गई थीं। जहां भारत ने अगस्त के बाद कोई नई लॉबिंग फर्म नहीं जोड़ी, वहीं पाकिस्तान ने सितंबर में एक और लॉबिस्ट को हायर किया। इसका मकसद पाकिस्तान के रेयर अर्थ मिनरल्स की क्षमता को अमेरिका के सामने रखना था। यह नियुक्ति ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिफ मुनीर की मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद हुई।
FARA फाइलिंग के मुताबिक, एरविन ग्रेव्स स्ट्रेटेजी ग्रुप को 1 अक्टूबर को पाकिस्तान दूतावास ने हायर किया। इस फर्म का काम पाकिस्तान के रेयर अर्थ संसाधनों को बढ़ावा देना और यह देखना था कि वे अमेरिका की जरूरतों से कैसे जुड़ सकते हैं।
6 जनवरी तक अमेरिका में पाकिस्तान के लिए तीन एक्टिव लॉबिस्ट काम कर रहे थे, जबकि भारत के भी तीन लॉबिस्ट हैं। भारत अपने लॉबिस्ट्स पर हर महीने करीब 2.25 लाख डॉलर खर्च करता है, जबकि पाकिस्तान का खर्च करीब 3 लाख डॉलर है। यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के प्रमुख मुकेश अघी का कहना है कि वॉशिंगटन में इस समय सबसे अहम बात राजनीतिक दल नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों के कितने करीब आप हैं। उनके मुताबिक, जेसन मिलर और सूज़ी वाइल्स दोनों ही राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं।
भारत द्वारा अमेरिका में लॉबिंग फर्मों को हायर करने की परंपरा नई नहीं है। इसकी शुरुआत करीब 20 साल पहले, 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद लगे प्रतिबंधों और बाद में सिविल न्यूक्लियर डील के दौर में हुई थी।
