अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया है। बोर्ड ऑफ पीस को 2027 के अंत तक गाजा में युद्ध के बाद के प्रबंधन की देखरेख के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी भी मिली है। हालांकि अमेरिका इस पैनल का इस्तेमाल दुनिया भर में संघर्ष समाधान के लिए करना चाहता है। अमेरिका ने इसमें शामिल होने के लिए 60 देशों को निमंत्रण दिया है, जिसमे भारत भी शामिल है। वहीं आठ प्रमुख मुस्लिम देशों ने मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के अपने फैसले की घोषणा की।
8 मुस्लिम देशों ने स्वीकारा बोर्ड ऑफ पीस का निमंत्रण
इस बीच ट्रंप ने माना कि कुछ देशों को संसदीय मंजूरी के बिना इसमें शामिल होने में दिक्कत हो सकती है। सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में से हर देश दुनिया के नेताओं के पैनल में एक प्रतिनिधि नियुक्त करेगा। 8 देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में यह घोषणा की। मिस्र, पाकिस्तान और यूएई पहले ही बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने की योजना की घोषणा कर चुके थे। जबकि अन्य पांच देश इस फैसले पर विचार कर रहे थे।
ट्रंप चाहते थे कि सऊदी अरब इसमें शामिल हो। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसके क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से ऐसा करने का आग्रह किया था। बोर्ड ऑफ पीस को 2027 के अंत तक गाजा के युद्ध के बाद के प्रबंधन की देखरेख के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का जनादेश मिला है। हालांकि अमेरिका इस पैनल का इस्तेमाल दुनिया भर में संघर्ष समाधान के लिए करना चाहता है।
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एक बिलियन डॉलर का करना होगा भुगतान
प्रस्तावित बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप जीवनभर करेंगे। वहीं सदस्य देशों को स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए एक बिलियन डॉलर का भुगतान देना होगा। बोर्ड की हर साल बैठक होने की उम्मीद की जा रही। वहीं गाजा से संबंधित निर्णय लेने के लिए गाजा कार्यकारी बोर्ड बनाया गया है। इस बोर्ड में तुर्की, कतर, यूएई और अमेरिका के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए मुस्लिम देशों के बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय और राज्य के अधिकार पर आधारित एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति को आगे बढ़ाने के लिए अपने समर्थन को दोहराया, जिससे क्षेत्र के सभी देशों और लोगों के लिए सुरक्षा और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त हो। ट्रंप ने बुधवार को स्वीकार किया कि कुछ देश तुरंत उनके बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं हो सकते, क्योंकि उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय निकाय में शामिल होने के लिए संसदीय मंजूरी की आवश्यकता है।
ट्रंप ने क्या कहा?
स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच के मौके पर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी के साथ अपनी बैठक की शुरुआत में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “कुछ को संसदीय मंजूरी की जरूरत है। कई देश इसमें शामिल होने में रुचि रखते हैं, जिनमें वे भी शामिल हैं जिन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का उनका निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।”
अमेरिकी स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ ने बुधवार को पहले कहा था कि 20 से 25 नेताओं ने पहले ही बोर्ड ऑफ़ पीस में शामिल होने के इनविटेशन मान लिए हैं, जिसका गुरुवार को दावोस में साइनिंग सेरेमनी होने वाली है। बोर्ड में शामिल होने के लिए लगभग 60 देशों को इनविटेशन भेजे गए हैं। इज़राइल, मिस्र, अर्जेंटीना, अज़रबैजान, बहरीन, बेलारूस, हंगरी, कज़ाकिस्तान, कोसोवो, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम उन देशों में से हैं जिन्होंने इनविटेशन स्वीकार कर लिया है। कुछ पश्चिमी डिप्लोमैट्स का कहना है कि यह बोर्ड UN के काम को कमज़ोर कर सकता है।
पुतिन का क्या है रुख?
रूस ने ट्रंप के प्रस्ताव को स्वीकार तो कर लिया है लेकिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका में फ्रीज की गई रूसी संपत्ति का उपयोग यूक्रेन की युद्ध प्रभावित क्षेत्र में निर्माण के लिए किया जा सकता है। पुतिन ने यह भी कहा है कि बोर्ड ऑफ पीस के लिए एक बिलियन डॉलर की रकम फ्रोजन एसेट्स से अमेरिका ले सकता है। पढ़ें भारत के लिए कूटनीतिक दुविधा क्या?
