Khamenei Speech: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने दो हफ्ते से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर शुक्रवार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस्लामी गणराज्य किसी भी दबाव के आगे पीछे नहीं झुकेगा। खामेनेई ने आरोप लगाया कि ये प्रदर्शन विदेशी ताकतों के समर्थन से कराए जा रहे हैं, जिनका मकसद देश को अस्थिर करना है।

खामेनेई ने डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ ईरानियों के खून से सने हैं। इस अहंकारी नेता ट्रंप को सत्ता से बेदखल कर दिया जाएगा।

राज्य टेलीविजन पर दिए भाषण में 86 वर्षीय खामेनेई ने कहा कि इस्लामी गणराज्य लाखों लोगों के बलिदान से बना है और वह किसी भी तरह की तोड़फोड़ करने वालों के सामने नहीं झुकेगा। तेहरान में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग विदेशी नेताओं को खुश करने के लिए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका इशारा डोनाल्ड ट्रंप की ओर था।

खामेनेई ने चेतावनी दी कि ईरान विदेशी ताकतों के लिए काम करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप को सच में देश चलाना आता, तो वे पहले अपने देश की भीतरी समस्याओं को संभालते।

भीड़ ने नारे लगाए, “अमेरिका का नाश हो!”

सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ 1,000 से ज्यादा ईरानियों के खून से सने हैं। यह बयान उन्होंने जून में ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हुए अमेरिकी हमलों के संदर्भ में दिया। खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति को अहंकारी नेता बताया और दावा किया कि उन्हें भी सत्ता से हटा दिया जाएगा। उन्होंने उनकी तुलना उस शाही शासन से की, जिसे 1979 की ईरानी क्रांति में हटा दिया गया था।

अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए खामेनेई ने कहा कि वे मजबूती और एकता बनाए रखें। उन्होंने खास तौर पर युवाओं से कहा कि प्रिय युवाओं, तैयार रहें और एकजुट रहें। एकजुट राष्ट्र किसी भी दुश्मन को हरा सकता है।

देशव्यापी विरोध प्रदर्शन, संचार व्यवस्था ठप

ये बयान ऐसे समय आए जब ईरान लगभग पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट गया है। सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए इंटरनेट बंद कर दिया। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, फोन कॉल नहीं लग रहे, कई उड़ानें रद्द कर दी गई। ईरानी खबरों की वेबसाइटें भी ठीक से अपडेट नहीं हो पा रही।

दिसंबर के अंत में महंगाई के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन पिछले तीन सालों में सबसे बड़े बन गए हैं। देश के सभी प्रांतों से हिंसा और अशांति की खबरें आई हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन प्रदर्शनों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है।

विदेश में रह रहे ईरानी विपक्षी समूहों ने शुक्रवार को फिर से लोगों से प्रदर्शन करने की अपील की। ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पर लोगों से सड़कों पर उतरने को कहा और लिखा कि पूरी दुनिया उनकी ओर देख रही है।

इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद होने के बावजूद, सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में देखा गया कि तेहरान और दूसरे शहरों में लोग आग जलाकर नारे लगा रहे थे और सड़कों पर तोड़फोड़ हुई थी। सरकारी टीवी ने जली हुई बसों, कारों और मोटरसाइकिलों के साथ-साथ मेट्रो स्टेशन और बैंकों में लगी आग की तस्वीरें दिखाई हैं। सरकार ने इन घटनाओं के लिए पीपुल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन (एमकेओ) को जिम्मेदार ठहराया है।

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कैस्पियन सागर के पास स्थित बंदरगाह शहर राश्त की शरियाती स्ट्रीट से रिपोर्टिंग करते हुए सरकारी टीवी के एक पत्रकार ने कहा कि वहां हालात युद्ध क्षेत्र जैसे हैं और लगभग सभी दुकानें तबाह हो चुकी हैं। बाद में सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया कि आगजनी और हिंसा अमेरिका और इजरायल के “आतंकवादी एजेंटों” ने करवाई। हालांकि उसने बिना ज्यादा जानकारी दिए केवल “हताहतों” की बात मानी।

संचार सेवाएं बंद होने की वजह से यह साफ नहीं हो पाया है कि अशांति कितनी बड़े पैमाने पर फैली है। 28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन लगातार तेज होते गए हैं और अब कई वर्षों में ईरान की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। अमेरिका में स्थित एक मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,270 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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