ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में सैन्य और नागरिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। कतर स्थित अल-उदीद एयरबेस से अमेरिकी कर्मियों की वापसी, कुवैत में अमेरिकी दूतावास की ओर से सैन्य ठिकानों पर आवाजाही पर अस्थायी रोक और इसके तुरंत बाद ईरान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को व्यावसायिक विमानों के लिए बंद करने के फैसले ने क्षेत्रीय संकट की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
कतर सरकार ने बताया कि अल-उदीद एयरबेस से कुछ अमेरिकी कर्मियों की वापसी मौजूदा “क्षेत्रीय तनाव” के मद्देनजर की गई है। यह ठिकाना मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है, जहां करीब 10,000 सैनिक तैनात हैं। वहीं, अमेरिकी दूतावास ने कुवैत में अपने कर्मचारियों को सैन्य अड्डों पर जाने से अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश दिए हैं।
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इसी दौरान ईरान ने गुरुवार तड़के पायलटों के लिए नोटिस जारी कर देश के हवाई क्षेत्र को व्यावसायिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया। पहले यह बंदी सीमित समय के लिए थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ा दिया गया। ईरानी अधिकारियों ने इस फैसले पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। उड़ान निगरानी आंकड़ों के अनुसार, आदेश के बाद ईरान और इराक के ऊपर हवाई यातायात लगभग पूरी तरह ठप हो गया।
इसका असर भारत की विमानन सेवाओं पर भी पड़ा। एयर इंडिया ने अमेरिका के लिए तीन उड़ानें रद्द कीं, जबकि यूरोप जाने वाली कई उड़ानों में देरी हुई। इंडिगो और स्पाइसजेट ने भी बताया कि ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने से उनकी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। वैकल्पिक मार्गों के कारण उड़ान अवधि बढ़ने और ईंधन की सीमा एक बड़ी चुनौती बन गई है।
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इसके पीछे बड़ी वजह ईरान के भीतर जारी व्यापक विरोध प्रदर्शन हैं। 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में आर्थिक संकट, राजनीतिक दमन और शासन के खिलाफ गुस्सा सामने आया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को त्वरित सुनवाई और फांसी दिए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के बयानों में कहा है कि ईरान में हत्याओं की रफ्तार “कम होने” की जानकारी उन्हें मिली है, हालांकि उन्होंने किसी सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह खारिज नहीं किया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन किसी भी संभावित कदम को सीमित और त्वरित रखना चाहता है, लेकिन ईरान की जवाबी क्षमता को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
