भारत का कहना है कि पाकिस्तान के लिए उसका संदेश ‘‘एकदम बेबाक और साफ’’ है कि वह संबंधों को सामान्य करने का इच्छुक है, लेकिन संबंध सुधारने के लिए माहौल का निर्माण इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पड़ोस से ‘‘किस तरह के उकसावे’’ आते हैं।
थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में कल यहां निवेशकों, विश्लेषकों और उद्योग जगत के प्रबंधकों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से बात की।
उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर बार-बार स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है। मुझे लगता है कि पाकिस्तान के संदर्भ में संदेश यह है कि भारत पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने का इच्छुक है और इसलिए संबंधों के विकास के लिए जरूरी माहौल बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर ज्यादा है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वहां से किस तरह के उकसावे आते हैं।’’
अमेरिका के पूर्व वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर ने जब जेटली से भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ‘‘हमारा यह संदेश बिल्कुल बेबाक और स्पष्ट है कि हम उनके साथ हमारे संबंधों को सामान्य बनाने या कम से कम उनमें सुधार लाने के इच्छुक हैं। और इस उद्देश्य की पूर्ति का दायित्व पाकिस्तान पर है।’’
पाकिस्तान और भारत हाल ही में वाक्युद्ध में उलझे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ढाका दौरे के दौरान पाकिस्तान के बारे में गंभीर टिप्पणियां की जाने के बाद और म्यांमा में भारत की सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि में दोनों ओर के नेताओं की ओर से तीखी बयानबाजी हुई।
जेटली ने भूटान, नेपाल, म्यांमा, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे भारत के अन्य पड़ोसियों के साथ उसके ‘उत्कृष्ट’ संबंधों का जिक्र करने के बाद पाकिस्तान का मुद्दा सबसे अंत में उठाया। जेटली ने कहा, ‘‘अभी कुछ समय पहले तक, भारत एक अशांत पड़ोस के बीच रह रहा था और अशांत पड़ोस की कई समस्याएं भारत में आ रही थीं।’’ उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल अपने शपथग्रहण समारोह में दक्षेस देशों के राष्ट्र प्रमुखों को आमंत्रित करने का निर्णय लेकर एक अभूतपूर्व फैसला किया। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बहुत सही और सकारात्मक कदम साबित हुआ और उसके बाद से हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा।’’
चीन के साथ भारत के संबंधों के बारे में जेटली ने कहा कि मोदी ने विशेष तौर पर चीनी नेतृत्व के साथ भी ‘‘शानदार संबंध’’ विकसित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘उनके साथ हमारा सीमा से जुड़ा विवाद है और सीमा का मसला अनसुलझा है। चीन से जुड़े और भी कई मुद्दे हैं, जो कि हमारी चिंता का विषय हैं लेकिन कम से कम सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति तो नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि बीजिंग के साथ आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध भी ‘‘पर्याप्त रूप से सामान्य’’ हो गए हैं।

