ईरान में जनता का आंदोलन चरम पर है। ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान में आर्थिक संकट और महंगाई के कारण वहां की जनता प्रदर्शन कर रही है। 7 जनवरी को ईरान के कई शहरों में जमकर प्रदर्शन हुए और इसी दौरान प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प भी हो गई। सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन से वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनई की सरकार पर संकट के बदल मंडरा रहे हैं।
35 प्रदर्शनकारियों की मौत, 2 हजार गिरफ्तार
ईरान के करीब 31 प्रांतों के 111 शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक करीब 35 प्रदर्शनकारी इस प्रदर्शन में मारे जा चुके हैं, जबकि चार सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई है। 2000 से अधिक लोगों को ईरानी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
ईरान के विपक्षी दल इस प्रदर्शन को बढ़ावा दे रहे हैं। ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने विरोध प्रदर्शन को तारीफ की है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान आया कि अगर ईरानी सेना प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाएगी तो हम हस्तक्षेप के लिए तैयार हैं। इससे और हलचल मची हुई है।
प्रदर्शनकारियों ने फाड़ा झंडा
ईरान की फ़ार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि तेहरान के पास मलर्द ज़िले में एक प्रदर्शन के दौरान व्यवस्था बहाल करने की कोशिश करते हुए एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वहीं एक वायरल वीडियो में ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर और शियाओं के पवित्र स्थल मशहद में प्रदर्शनकारियों को देश का एक बड़ा झंडा नीचे उतारते और फाड़ते हुए दिखाया गया।
लगातार गिर रही ईरान की करेंसी
ईरान के करेंसी की वैल्यू भी लगातार गिरती जा रही है। अगर हम रुपए की तुलना में ईरानी करेंसी को देखें, तो वह काफी गिर चुका है। 8 जनवरी 2026 के अनुसार एक भारतीय रुपये की वैल्यू 11057 ईरानी रियाल हो गई है।
प्रदर्शन पर सरकार ने क्या कहा?
हालांकि विरोध प्रदर्शन के बीच ईरानी सरकार कह चुकी है कि वह प्रदर्शन को मानती है और आवाजों को धैर्य से सुनेगी। सरकारी प्रवक्ता ने बयान दिया है कि हम विरोध प्रदर्शनों को मान्यता देते हैं, लेकिन शांति से इकट्ठा होने के अधिकार पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का काम है, आवाज सुनना और इसे हमारे संविधान में मान्यता भी मिली है।
केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने दिया इस्तीफा
विरोध प्रदर्शन के बीच ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर मोहम्मदरेजा फरजीन ने इस्तीफा दे दिया और उसको स्वीकार भी कर लिया गया है। उनकी जगह पर पूर्व आर्थिक एवं वित्त मंत्री अब्दुलनासेर को नया गवर्नर बनाया गया है। प्रदर्शन करने वालों में बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हैं, जो सरकार को तानाशाह बता रहे हैं और तानाशाह मुर्दाबाद जैसे नारे लगा रहे हैं। माना जा रहा है यह नारे अयातुल्ला अली खामेनई के लिए हैं।
‘दंगाइयों को उनकी औकात दिखानी होगी…’, विरोध प्रदर्शनों को लेकर सख्त हुए ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई
‘शाह’ के समर्थन में लगे नारे
कुछ शहरों में प्रदर्शन के दौरान शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे के समर्थन में नारे लगाते हुए भी देखा गया। यह सभी प्रदर्शनकारी शाह जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। बता दें कि शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रज़ा पहलवी अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं। इन नारों के जवाब में उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैं आपके साथ हूं और जीत भी हमारी होगी क्योंकि हमारा मकसद सही है। जब तक वर्तमान शासन सत्ता में रहेगा, तब तक देश की आर्थिक स्थिति खराब होती रहेगी।”
प्रदर्शनकारियों के साथ अमेरिका
वहीं ईरान के विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका का भी साथ है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के फारसी भाषा के अकाउंट से विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया गया। इस अकाउंट पर लिखा गया कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों के साहस की तारीफ करता है और बेहतर भविष्य चाहने वालों के साथ खड़ा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “हम उन रिपोर्ट्स से बहुत परेशान हैं, जिसमें कहा गया है कि शांति से प्रदर्शन करने वालों को धमकाया जा रहा है और हिंसा हो रही है।” अमेरिका ने कहा कि बुनियादी अधिकारों की मांग करना कोई जुर्म नहीं है और ईरानी सरकार को ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
चार मोर्चों पर घिरी ईरानी सरकार
शाही परिवार का प्रदर्शन को समर्थन: चार मोर्चों पर ईरानी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत है। सबसे पहले तो ईरानी सरकार को शाही परिवार और उनके समर्थक गुटों से निपटना पड़ रहा है। ईरान के अंतिम शाह 1979 की इस्लामी क्रांति के आते ही भाग गए थे। उसके बाद से उनका पूरा परिवार अमेरिका में निर्वासन में रह रहा है। लेकिन अगर खामेनई को सत्ता से बेदखल होना पड़ता है, तो पहलवी सत्ता की कमान संभाल सकते हैं।
पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन का विरोध में हिस्सा लेना: पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन के लोग भी सड़कों पर उतरे हैं। 1970 के दशक में शाह की सरकार के खिलाफ यह वामपंथी समूह खड़ा था। लेकिन बाद में यह अलग हो गया। यह संगठन भी ईरानी सरकार के खिलाफ है। इस संगठन के नेता मसूद राजावी भी निर्वासन में हैं लेकिन कहां पर हैं इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। हालांकि उनकी पत्नी मरियम राजावी पूरे संगठन को चलाती हैं और पश्चिमी देशों से उन्हें काफी समर्थन मिलता है।
सुन्नी अल्पसंख्यक समूह: ईरान में छोटे-छोटे अल्पसंख्यक समूह हैं, जो इस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें से ज्यादातर सुन्नी मुस्लिम समूह हैं, जो सरकारी बलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
युवाओं और महिलाओं का विरोध प्रदर्शन में शामिल होना: ईरान के युवा भी प्रदर्शन में उतर आए हैं। महिला अधिकारों को लेकर भी पिछले कुछ सालों में ईरान में काफी प्रदर्शन हुए हैं और सरकार को जमकर विरोध का सामना करना पड़ा है। राष्ट्रपति चुनाव में भी प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में धांधली करने का आरोप लगाया था।
