अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में युद्ध के बाद प्रशासन और पुनर्निर्माण के काम के लिए बनाए जाने वाले प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रविवार को अपने ऑफिशियल X हैंडल पर इस बात की जानकारी दी है। व्हाइट हाउस ने बताया है कि दुनिया के कई बड़े नेताओं ने इसमें शामिल होने को मंजूरी दी है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा संघर्षविराम योजना का हिस्सा है। ट्रंप की इस योजना का मकसद गाजा में हमास और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करना और वहां स्थिरता लाना है। आइए जानते हैं ‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है और उससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा के लिए 20 सूत्री शांति योजना प्रस्तावित की थी
सितंबर 2025 में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा के लिए 20 सूत्री शांति योजना प्रस्तावित की थी । इसके तहत, गाजा को एक गैर-राजनीतिक फिलिस्तीनी समिति के अस्थायी शासन के अधीन रखा जाना था जो सार्वजनिक सेवाओं के दैनिक संचालन के लिए जिम्मेदार होगी। इस समिति की निगरानी एक नए इंटरनेशनल बोर्ड, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ द्वारा की जानी थी, जिसकी अध्यक्षता डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। कई लोगों के मुताबिक, इससे प्रभावी रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति को गाजा का पूरा नियंत्रण मिल जाएगा।
इन देशों को ट्रंप ने भेजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण
जिन देशों को फिलहाल इस बोर्ड की सदस्यता के लिए निमंत्रण भेजे जा चुके हैं उनमें हंगरी, अल्बानिया, ग्रीस, कनाडा, तुर्की, साइप्रस, मिस्र, जॉर्डन, पैराग्वे और अर्जेंटीना भी शामिल हैं। पाकिस्तान ने कहा कि उसे भारत को निमंत्रण भेजे जाने की खबर से पहले ही निमंत्रण मिल चुका था। जो देश इसे स्वीकार करेंगे वह तीन साल के लिए बोर्ड के सदस्य बन जाएंगे। वहीं, सदस्यता के पहले साल में 1 अरब डॉलर नकद का भुगतान करने पर वे स्थायी सदस्य बन जाएंगे। अब तक लगभग 60 देशों को आमंत्रित किया जा चुका है, जिनमें से केवल हंगरी ने ही निश्चित रूप से अपनी स्वीकृति की घोषणा की है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा नवंबर 2025 में अनुमोदित बोर्ड ऑफ पीस’ 2027 के अंत तक संचालित होना था और इसमें न तो तीन साल की सदस्यता और न ही स्थायी सदस्यता का कोई प्रावधान था। साथ ही, इसे केवल गाजा में ही संचालित होना था। हालांकि, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा भारत को भेजे गए और X पर पोस्ट किए गए निमंत्रण पत्र में कहा गया है कि बोर्ड ऑफ पीस, “अब तक का सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण बोर्ड, एक नए अंतर्राष्ट्रीय संगठन और प्रशासन के रूप में स्थापित किया जाएगा और यह प्रयास न केवल मिडिल ईस्ट में शांति को मजबूत करने के लिए है बल्कि वैश्विक संघर्ष को सुलझाने के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण को अपनाने के लिए भी है।”
बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर में क्या लिखा है?
टाइम्स ऑफ इज़रायल द्वारा प्रकाशित चार्टर से पता चलता है कि इसमें गाजा का जिक्र तक नहीं है लेकिन इसमें उन दृष्टिकोणों और संस्थानों से अलग होने की बात की गई है जो अक्सर विफल रहे हैं, साथ ही अंतरराष्ट्रीय रूप से शांति की स्थापना के लिए एक प्रभावी बॉडी की स्थापना पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, चार्टर में कहा गया है कि बोर्ड न केवल संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में बल्कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में भी स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा।
चार्टर में लिखा है, “डोनाल्ड जे ट्रम्प शांति बोर्ड के पहले अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे और वे संयुक्त राज्य अमेरिका के पहले प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करेंगे। साथ ही, अध्यक्ष को केवल तभी हटाया जा सकता है जब वे स्वेच्छा से इस्तीफा दें या उनके द्वारा नियुक्त सदस्यों से भरी कार्यकारी बोर्ड द्वारा सर्वसम्मति से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाए, ऐसी स्थिति में उनके द्वारा नामित उत्तराधिकारी पदभार ग्रहण करेगा।”
सदस्यता प्राप्त करने के लिए, किसी देश को इस चार्टर से बंधे रहने के लिए सहमति देनी होगी। कार्यकारी बोर्ड के संस्थापक सदस्यों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मिडिल ईस्ट के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद और व्यवसायी जेरेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अमेरिकी बिजनेसमैन मार्क रोवन, वर्ल्ड बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं।
