सिंगापुर और हांगकांग जैसे एशियाई देशों में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के मामलों में उछाल देखा गया है। इन देशों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि यह वृद्धि कम होती इम्युनिटी और बुज़ुर्गों द्वारा कम बूस्टर शॉट लगवाने के कारण हो सकती है। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इस बात का कोई संकेत नहीं है कि स्थानीय स्तर पर फैलने वाले वेरिएंट पहले फैलने होने वाले वेरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक हैं या अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनते हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
सिंगापुर के डेटा से पता चलता है कि 3 मई को खत्म होने वाले हफ्ते तक कोरोना मामलों की अनुमानित संख्या एक हफ्ते पहले 11,100 से बढ़कर 14,200 हो गई। इस दौरान कोरोना के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले औसत डेली मामले भी 102 से बढ़कर 133 हो गए, लेकिन आईसीयू में डेली भर्ती होने वाली की दर 3 से घटकर 2 हो गई।
हेल्थ ऑथोरिटी ने कहा कि LF.7 और NB.1.8 – दोनों ही JN.1 वेरिएंट के हैं जिनका उपयोग नए कोरोना टीकों में किया जाता है। हालांकि ये नए टीके भारत में उपलब्ध नहीं हैं। हांगकांग में सीवेज के नमूनों में Sars-CoV-2 वायरल लोड में वृद्धि देखी गई है। इसने कोरोना के लिए पॉजिटिव परीक्षण करने वाले रेस्पिरेटरी सैंपल्स में भी वृद्धि देखी है, जो 10 मई को खत्म होने वाले हफ्ते में बढ़कर 13.66 प्रतिशत हो गई। जबकि चार हफ्ते पहले यह 6.21 प्रतिशत थी। यहां 81 गंभीर मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 30 मौतें हुई हैं। मरने वालों में से लगभग सभी बुज़ुर्ग हैं।
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क्या कोरोना एक सीजनल इंफेक्शन बन गया है?
हांगकांग के सेंटर फॉर हेल्थ प्रोटेक्शन (CHP) का कहना है कि इसकी संभावना है। हांगकांग में कोरोना इस साल अप्रैल से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि पूरे साल में समय-समय पर कोरोना की लहरें आने की उम्मीद है।
भारत के बारे में क्या?
हालांकि भारत में अब बहुत से लोग कोरोना टेस्ट नहीं करवा रहे हैं, लेकिन ICMR लेबोरेटरी द्वारा निगरानी स्थलों से इकट्ठा किए गए डेटा से पता चलता है कि पिछले कुछ हफ़्तों में कोविड संक्रमण में वृद्धि हुई है। 11 मई को खत्म होने वाले हफ्ते के दौरान Sars-Cov-2 पॉजिटिव नमूनों की संख्या बढ़कर 41 हो गई, जबकि इससे पहले हफ्ते में 28 और उससे पहले हफ्ते में 12 थी। हालांकि पिछले साल सितंबर में वृद्धि के बाद से रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन की कुल संख्या में गिरावट आई है। भारत में आमतौर पर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के दो चरण देखे जाते हैं – एक सर्दियों के महीनों के दौरान और दूसरा मानसून के तुरंत बाद।
आपको क्या करना चाहिए?
इस समय घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। हालांकि अगर आपको रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन हो जाता है, तो घर पर रहें ताकि आप इसे दूसरों तक न फैले। जितना हो सके बंद या भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें। अगर आपको बाहर निकलना ही है, तो मास्क लगाए और जितना संभव हो सके अपने हाथ धोएँ। ये कदम आपको न केवल कोरोना बल्कि किसी भी अन्य रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से सुरक्षित रखेंगे।
