चीन ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा पर कड़ी आपत्ति जताई है।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा, “टैरिफ वॉर में कोई भी विजेता नहीं होता है और चीन अपने वैध और कानूनी अधिकारों और हितों की मजबूती से रक्षा करेगा।”

डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ देना होगा। डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा से चीन के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है क्योंकि वह ईरान से तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।

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चीन ने पिछले साल ईरान से प्रतिदिन औसतन 13.8 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया जो ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत है। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की इस घोषणा से चीन की सस्ती तेल आपूर्ति पर निर्भरता प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां से मिलने वाली रियायती तेल आपूर्ति भी चीन के लिए बाधित हुई है।

वेनेजुएला में है चीन का निवेश

बाजार सूचना एजेंसी केप्लर के मुताबिक, चीन ने पिछले साल वेनेजुएला से करीब चार लाख बैरल तेल प्रतिदिन आयात किया था। चीन ने वेनेजुएला में अब तक 106 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश भी किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए अमेरिकी टैरिफ पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होंगे, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

चीन पर हो सकता है बड़ा आर्थिक असर

हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव बिस्वास के हवाले से कहा, “इस घोषणा का चीन पर बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस पर निर्भर करेगा कि चीन ईरान के साथ व्यापार में कोई बदलाव करता है या नहीं।”

अमेरिका की विलियमेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर लियांग यान ने कहा कि ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा चीन के लिए अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिहाज से सतर्क करने वाली है।

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