कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ऐसी स्पीच दी कि पूरी दुनिया उसकी तारीफ करने लगी। हालांकि इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कनाडा से नाराज हो गए और उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री को चेतावनी तक दे डाली। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि कनाडा काफी हद तक अमेरिका के रहमो करम पर ही निर्भर है। इसके बाद ट्रंप ने कनाडाई प्रधानमंत्री को चीन के साथ किसी भी डील साइन करने पर 100 फीसदी टैरिफ की धमकी दे दी।

हालांकि इसके बाद कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि वह चीन के साथ कोई फ्री ट्रेड डील नहीं करने जा रहे हैं। हालांकि अब साफ है कि कनाडा अमेरिका के अलावा बड़े बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है। इसी को देखते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च 2026 में भारत का दौरा कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच रिश्तों के लिहाज से यह काफी अहम हो सकता है।

इन मुद्दों पर होगी नजर

कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश पटनायक ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को एक इंटरव्यू में बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले हफ़्ते में भारत आ सकते हैं। इस ट्रिप के दौरान कनाडा के पीएम यूरेनियम, एनर्जी, मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एजुकेशन और कल्चर पर ज़रूरी डील्स साइन करेंगे।

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कब आएंगे भारत?

कनाडा के पीएम के भारत दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर दिनेश पटनायक ने कहा, “मुझे लगता है कि हम मार्च के पहले हफ़्ते में ऐसा करने की सोच रहे हैं।” कनाडा के एनर्जी मिनिस्टर टिम हॉजसन इस हफ़्ते भारत आ रहे हैं। इसको लेकर हॉजसन ने कहा कि कार्नी के ट्रिप का समय अभी तय किया जा रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक हॉजसन ने कहा, “इस साल किसी समय प्रधानमंत्री के आने का प्लान है। यह हमारी प्रोग्रेस पर निर्भर करेगा।” रॉयटर्स के मुताबिक कार्नी कनाडा के अलायंस को यूनाइटेड स्टेट्स से आगे बढ़ाना चाहते हैं।

पिछले हफ़्ते दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में कनाडा के पीएम ने कहा था कि पुराना नियम-आधारित सिस्टम खत्म हो गया है और कनाडा जैसी मिडिल पावर से एक ज़्यादा सही, ज़्यादा मज़बूत दुनिया बनाने के लिए गठबंधन बनाने की जरूरत है। इसके बाद उनकी तारीफ हुई थी।

शी से कनाडा पीएम ने की थी मुलाकात

कनाडा के पीएम कार्नी ने हाल ही में 16 जनवरी को बीजिंग का भी दौरा किया, जो 2017 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री का चीन का पहला दौरा था। चीन की राजधानी में उन्होंने प्रेसिडेंट शी जिनपिंग, प्रीमियर ली कियांग और चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन झाओ लेजी से मुलाक़ात की थी।

मीटिंग के बाद कार्नी और शी ने एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया जिसमें नई कनाडा-चीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की खास बातें बताई गईं। इस एग्रीमेंट में ट्रेड में रुकावटें हटाने और कैनेडियन एग्री-फूड प्रोडक्ट्स, जैसे कैनोला, लॉबस्टर, केकड़े और मटर पर टैरिफ कम करने के शुरुआती उपाय शामिल हैं। 1 मार्च तक कैनेडियन कैनोला बीज पर टैरिफ मौजूदा लगभग 85% की कुल दरों से घटकर लगभग 15% होने की उम्मीद है।

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ट्रंप की धमकी के बाद पीछे हटे कार्नी

हालांकि रविवार को कार्नी ने रिपोर्टर्स से कहा कि कनाडा का चीन के साथ फ्री ट्रेड डील करने का कोई प्लान नहीं है। यह US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी का जवाब है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर चीन के साथ ट्रेड डील होती है तो कनाडा के सामान पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। कार्नी ने कहा था, “हमारा चीन या किसी दूसरी नॉन-मार्केट इकॉनमी के साथ ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है। हमने चीन के साथ जो किया है, वह पिछले कुछ सालों में पैदा हुए कुछ इश्यू को ठीक करना है।” वह रिश्तों को फिर से ठीक करने पर भी काम कर रहे हैं।

ट्रुडो के कार्यकाल में खराब हुए रिश्ते

कार्नी पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के 2023 के आरोप के बाद भारत के साथ रिश्तों को फिर से ठीक करने के लिए भी काम कर रहे हैं। ट्रुडो ने कहा था कि सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार शामिल थी। हालांकि इन आरोपों को सिरे से भारत ने नकार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल कार्नी के बुलावे पर G7 समिट में शामिल हुए थे। उसके बाद से ही कनाडा के कई मंत्री भारत आ चुके हैं। पढ़ें ट्रंप ने अब कार्नी को क्या दी धमकी