अमेरिका ने छुट्टियों के दौरान आधी रात को एक लैटिन अमेरिकी देश के भीतर अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य इस बहाने से उस देश के नेता को पकड़ना था कि वह अमेरिकी अदालतों में मादक पदार्थों के आरोपों में वांछित है। अमेरिका के इस अभियान की तारीख 20 दिसंबर 1989 थी, देश पनामा था और वांछित व्यक्ति जनरल मैनुअल नोरीगा थे। अमेरिका में तीन जनवरी, 2026 को जागने वाले कई लोगों को शायद ‘डेजा वू’ (पहले भी ऐसा हो चुका है) का अहसास हुआ होगा।
हालांकि, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी अमेरिकी विदेश नीति के एक पुराने युग की याद दिलाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि एक रात्रिकालीन अभियान में अमेरिकी सैनिकों ने दंपति को वेनेजुएला की राजधानी काराकस से पकड़ लिया और उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह घटना ट्रंप द्वारा असाधारण सैन्य अभियान के रूप में वर्णित घटना के बाद हुई, जिसमें अमेरिका के वायु, थल और नौसैनिक बलों को शामिल किया गया था।
मादुरो और उनकी पत्नी को मादक पदार्थों से संबंधित आरोपों का सामना करने के लिए न्यूयार्क ले जाया गया। मादुरो पर 2020 में आतंकवाद-मादक पदार्थों से संबंधित अभियान का नेतृत्व करने के आरोप में अभियोग लगाया गया था, जबकि उनकी पत्नी को चार अन्य नामित वेनेजुएलावासियों के साथ एक नए अभियोग में शामिल किया गया था।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि उन्हें वेनेजुएला में आगे किसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है। अमेरिका की यह कार्रवाई तेल समृद्ध वेनेजुएला पर महीनों से बढ़ाए जा रहे दबाव की परिणति है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी से डर नहीं है। चाहे कुछ भी हो जाए, अमेरिका-लैटिन अमेरिकी संबंधों के विशेषज्ञ के रूप में, मैं वेनेजुएला में अमेरिकी अभियान को हाल के अतीत से एक स्पष्ट बदलाव के रूप में देखता हूं। यह उस राजनयिक दृष्टिकोण को त्याग देता है जो दशकों से अंतर-अमेरिकी संबंधों की पहचान रहा है।
दरअसल, 1990 के दशक की शुरुआत में सोवियत संघ के पतन के बाद से ही इस क्षेत्र में संभावित प्रभाव क्षेत्रों पर वैचारिक पकड़ कमजोर हो गई। ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती कार्यों में से एक, मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘अमेरिका की खाड़ी’ करना, इस नई नीतिगत दिशा के अनुरूप है। लेकिन कई मायनों में, ट्रंप प्रशासन द्वारा मादुरो को हटाने के लिए चलाए गए अभियान का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है। वाशिंगटन की पिछली सभी प्रत्यक्ष कार्रवाइयां मध्य अमेरिका या कैरेबियाई क्षेत्र के छोटे, निकटवर्ती देशों में थीं। अमेरिका ने मैक्सिको में अक्सर हस्तक्षेप किया लेकिन उसने कभी भी सीधे तौर पर उसके नेतृत्व को नहीं हटाया या पूरे देश पर कब्जा नहीं किया।
लिंडन जानसन के पास ब्राजील में 1964 के तख्तापलट के असफल होने की स्थिति में एक वैक्लपिक योजना थी (हालांकि तख्तापलट सफल रहा)। रिचर्ड निक्सन ने 1970 से चिली में समाजवादी सरकार को कमजोर किया, लेकिन उन्होंने 1973 में राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंडे के खिलाफ तख्तापलट की साजिश नहीं रची। एक समय अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि दक्षिण अमेरिकी देश बहुत दूर, बहुत बड़े और बहुत स्वतंत्र हैं, इसलिए उन्हें प्रत्यक्ष हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस नहीं होती। जाहिर है, ट्रंप के अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक अंतर को नजरअंदाज कर दिया।
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