ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और अमेरिका इसका समर्थन कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं और उन्हें कई टारगेट दिखाए गए। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी गई है कि अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ हमलों की तैयारी के लिए और समय चाहिए। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के आसपास के क्षेत्र में तैनात अमेरिकी कमांडरों ने अधिकारियों से कहा कि जवाबी कार्रवाई को रोकने वाले किसी भी हमले से पहले उन्हें अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मजबूत करने और बचाव की तैयारी करने की जरूरत है।
ट्रंप ने ईरान को दी है चेतावनी
वहीं ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों को मारना जारी रखते हैं तो वह ईरान पर हमला करेंगे। ट्रंप को उन विकल्पों के बारे में बताया गया, जिनमें ईरान में गैर-सैन्य ठिकानों या शासन के सुरक्षा तंत्र के ठिकानों पर हमला करना शामिल था। वहीं मानवाधिकार समूहों ने रविवार सुबह कहा कि प्रदर्शन में लगभग 192 लोग मारे गए हैं। हालांकि इंटरनेट बंद होने के कारण सही संख्या का पता नहीं चल पाया। रविवार सुबह फुटेज सामने आया जिसमें कथित तौर पर तेहरान के उत्तर-पश्चिम में अब्येक शहर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलियों का इस्तेमाल दिखाया गया था।
ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुझाव दिया कि प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए। वहीं एक अन्य अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों की तुलना आतंकवादियों से की। रविवार को ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने अमेरिका को किसी भी हमले के खिलाफ चेतावनी दी। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर रहे मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा, “ईरान पर हमले की स्थिति में कब्ज़े वाले क्षेत्र (इजरायल) के साथ-साथ सभी अमेरिकी ठिकाने और जहाज हमारे वैध लक्ष्य होंगे।”
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इजरायली सेना भी अलर्ट
दो अमेरिकी C-17A सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान जर्मनी से रवाना हुए और शनिवार शाम को मध्य पूर्व की ओर जाते दिखे। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी हमले की स्थिति में इजरायल की सेना हाई अलर्ट पर रहेगी। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल के हफ्तों में बार-बार चेतावनी दी थी कि वह ईरान को अपने परमाणु या बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को फिर से बनाने की अनुमति नहीं देंगे। IDF अमेरिकी हवाई हमलों का समर्थन कर सकता है। हालांकि भले ही इजरायल ने अमेरिका के साथ आक्रामक कार्रवाई न करने का फैसला किया हो, फिर भी ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइलें दागने की संभावना है।
ईरान और उसके समर्थकों ने दावा किया कि ये विरोध प्रदर्शन एक इजरायली साज़िश के तहत भड़काए गए हैं। शनिवार रात को प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई का विरोध किया और हज़ारों लोग तेहरान की सड़कों पर उतर आए। ऐसी खबरें थीं कि पिछले तीन दिनों में सुरक्षा बलों ने सैकड़ों लोगों को मार डाला है। कहा जा रहा था कि अस्पताल गोली लगने से घायल मरीज़ों से भरे हुए थे। ये विरोध प्रदर्शन शुरू में बढ़ती महंगाई के कारण शुरू हुए थे, लेकिन अब माना जा रहा है कि ईरान के सभी प्रांतों के 100 से ज़्यादा शहरों और कस्बों में फैल गए हैं। प्रदर्शनकारी खुले तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग कर रहे थे।
