राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बन गए हैं। सूत्र बताते हैं कि इस अवश्यंभावी घटना के सच होने से वह काफी खुश हैं। अब वह ताजपोशी के लिए सही मुहूर्त दिखवा रहे हैं। लेकिन, उन्होंने पद संभालने से पहले ही बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। बता दें कि कांग्रस ने यह दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि पार्टी में लोकतंत्र है। इसीलिए राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने की घोषणा 11 दिसंबर की शाम से पहले नहीं की गई। बता दें कि 11 दिसंबर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख थी। यह मियाद खत्म होते ही पार्टी ने ऐलान कर दिया कि अब कांग्रेस का नेतृत्व युवा नेता राहुल गांधी करेंगे। राहुल ने जैसे ही टीवी पर यह ऐलान होते देखा, खुशी से झूम उठे। उस समय उनके साथ मौजूद एक सूत्र की मानें तो राहुल ने खुशी से उन्हें गोद में उठा लिया था।
जब भावनाओं का ज्वार ठंडा पड़ा तो किसी ने उनके कान में कहा कि अब उन्हें अध्यक्ष जैसी गंभीरता दिखानी होगी। यह सुनते ही उन्होंने फैसला सुनाया कि मणिशंकर अय्यर का निलंबन रद्द कर दिया जाए। मालूम हो कि अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच आदमी’ कहा था। इस पर राहुल ने कहा था कि अय्यर माफी मांगें। इसके कुछ ही देर बाद माफी मांगने के बावजूद अय्यर के निलंबन की खबर आई थी। 11 दिसंबर को जब राहुल ने उनका कांग्रेस से निलंबन रद्द किया तो उनके एक करीबी कारिंदे ने याद दिलाया- यह फैसला आपकी मां का है और आपने भी कहा था कि हम प्रधानमंत्री का सम्मान करते हैं। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि वह अपनी मां का भी सम्मान करेंगे और मार्गदर्शक मंडल बनवाएंगे। उन्होंने आदेश दिया कि मार्गदर्शक मंडल में सोनिया गांधी के अलावा मनमोहन सिंह व दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं को रख दें।
राहुल के इन दो फैसलों से कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। पुराने कांग्रेसियों को लग रहा है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने का ऐलान गलत समय में हुआ है। वे इस जुगत में लग गए हैं कि अब कम से कम उनकी ताजपोशी सही वक्त पर करवाई जाए। इसलिए वे ज्योतिषियों के पास जा रहे हैं। वे सही मुहूर्त के साथ अपना भविष्य भी पूछ रहे हैं।
(यह खबर आपको हंसने-हंसाने के लिए कोरी कल्पना के आधार पर लिखी गई है। इसे सीरियसली नहीं लें।)

