कुमार विश्‍वास को मांगने के बावजूद आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्‍यसभा का टिकट नहीं दिया है। इस पर अपनी नाराजगी जाहिर करने में उन्‍होंने एक मिनट की भी देर नहीं की। उन्‍होंने तंज कसते हुए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। विश्‍वास पर फिलहाल पार्टी ने राजस्‍थान की जिम्‍मेदारी दी हुई है। लेकिन, इन परिस्‍थितियों में वह इस जिम्‍मेदारी का वहन कितने मनोयोग के साथ करेंगे, कहना मुश्‍किल है। विश्‍वास के पुराने बयानों और ताजा गुस्‍सा का ख्‍याल कर उन्‍हें अमित शाह ने तुरंत फोन किया।

सूत्र बताते हैं कि शाह ने उन्‍हें बताया कि कैजरीवाल कैसे शुरू से उनका इस्‍तेमाल और अपमान करते आ रहे हैं। पहले अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उतार कर, फिर बीजेपी की जीत सुनिश्‍चत होने वाले राजस्‍थान का प्रभारी बना कर और अब बाहरी लोगों को राज्‍यसभा टिकट देकर। बताते हैं कि शाह ने विश्‍वास को लगे हाथ भाजपा की ओर से राज्‍यसभा भेजने का ऑफर भी दे डाला। शाह-विश्‍वास वार्ता की गुप्‍त खबर देने वाले सूत्र ने बताया कि भाजपा अध्‍यक्ष ने आप नेता के सामने एक डील की पेशकश की। इसमें दो विकल्‍प दिए गए। पहला तो विश्‍वास भाजपा की सदस्‍यता ग्रहण कर राजस्‍थान में आप के खिलाफ काम करें। और, दूसरा वह पर्दे के पीछे से राजस्‍थान चुनाव में आप को एक भी सीट नहीं जीतने देने के लिए मेहनत करें और चुनाव नतीजे आते ही राज्‍यसभा चुनाव का टिकट ले लें।

सूत्र का कहना है कि विश्‍वास ने दूसरा विकल्‍प चुनने का मन बना लिया है। उन्‍होंने दो-चार दिन का वक्‍त मांगा है। इस बीच वह अपने समर्थकों से बात करेंगे, ताकि बाद में अगर भाजपा में शामिल होने का भी मन बना तो वह अपने फैसले को लोकतांत्रिक बता सकें और तर्क दे सकें कि उनके समर्थकों की यही इच्‍छा थी।

अमित शाह ने क्‍यों फोन करने में नहीं लगाई देर? कुमार विश्‍वास का भाजपा से राजनीतिक जुड़ाव भले ही न हो, पर पार्टी में उनके मित्रों की कमी पहले से ही नहीं है। उन्‍होंने जब अपने जन्‍मदिन पर शानदार जलसा किया था, तब भी भाजपा के कई दिग्‍गजों को बुलाया था और इनमें से ज्‍यादातर विश्‍वास को मना नहीं कर पाए थे। कई बड़े भाजपाई विश्‍वास की दावत उड़ाते दिखे थे। शाह को विश्‍वास को अपने पक्ष में करने की प्रबल संभावना दिखी। फिर विश्‍वास जिस तरह से अपना स्‍टैंड बदलते रहे हैं, उससे भी अमित शाह को लगा कि वह पार्टी भी आसानी से बदल सकते हैं। बता देें कि कुमार विश्‍वास हमेशा कहते रहे थे कि वह किसी पद के लोभ में आप से नहीं जुड़े हैं, पर एक दिन अचानक उन्‍होंने राज्‍यसभा सीट की मांग कर दी। अब शाह को विश्‍वास के अंतिम फैसले का इंतजार है और उन्‍हें विश्‍वास है कि कुमार निराश नहीं करेंगे। अगर ऐसा हुआ तो अमित शाह के नाम आप के किसी बड़े चेहरे को भाजपा के पाले में करने का श्रेय भी हो जाएगा। अब तक  आम आदमी पार्टी ही है जिसके किसी बड़े चेहरे को वह भाजपा में लाने में कामयाब नहीं हो सके हैं। इस कामयाबी के साथ ही भाजपा के चाणक्‍य की उनकी छवि और मजबूत हो सकती है।

(यह खबर आपको हंसने-हंसाने के लिए कोरी कल्‍पना के आधार पर लिखी गई है। इसे सीरियसली नहीं लें।)