ठंड के मौसम में शरीर की मांसपेशियां और टिश्यू सिकुड़ने लगते हैं। तापमान कम होने से ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है, जिससे कंधे की मांसपेशियों और जॉइंट्स में stiffness बढ़ जाती है। खासतौर पर वे लोग जिनकी पहले से चोट, आर्थराइटिस, फ्रोजन शोल्डर या कैल्शियम और विटामिन D की कमी होती है, उन्हें ठंड में दर्द ज्यादा महसूस होता है। लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठना जैसे मोबाइल चलाना, टीवी देखना या लैपटॉप पर झुक कर काम करने से कंधे की मांसपेशियां और ज्यादा टाइट हो जाती है। ठंड में लोग गर्माहट के लिए शरीर को कम हिलाते हैं, जिससे जॉइंट्स और अधिक कठोर हो जाते हैं। अचानक कंधे घुमाने पर तेज खिंचाव या दर्द महसूस होता है। कई बार ये हल्की सी मूवमेंट चीखें तक निकाल देती है।
सर्दी में ठंडी हवा सीधे कंधे या गर्दन पर लगने से भी मसल स्पैज़्म (Muscle Spasm) हो जाता है, जो तीखे दर्द का कारण बनता है। अगर शरीर में पोषण की कमी, तनाव या हल्की सूजन हो तो ठंड इसका असर और बढ़ा देती है। सर्दी में आप भी फ्रोजन शोल्डर से परेशान हैं, तो कुछ ऐसे व्यायाम कर सकते हैं जो इस समस्या से राहत दिलाने में आपकी मदद कर सकते हैं।
हालांकि ये परेशानी फिजियोथेरेपी और दर्द को दूर करने वाली दवाओं से साल डेढ़ साल में अपने आप ठीक हो जाती है। दर्द का इलाज करने के लिए फिजियोथेरेपी और दर्द को दूर करने वाली दवाएं भी जरूरी है। जल्दी इलाज के लिए आप हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा बताई गई कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं। ये एक्सरसाइज दर्द को जल्दी दूर करेंगी और स्टिफनेस को कंट्रोल करेंगी।
पेंडुलम स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें (Pendulum Stretch)
पेंडुलम स्ट्रेच फ्रोज़न शोल्डर के लिए सबसे शुरुआती और सुरक्षित स्ट्रेच माना जाता है क्योंकि यह बिना जोड़ पर जोर डाले कंधे को ढीला करता है। इसके लिए आप खड़े होकर थोड़ा आगे झुकें ताकि आपका प्रभावित हाथ नीचे की ओर ढीला लटक जाए। अब हाथ को बिल्कुल आराम की स्थिति में रखते हुए हल्के-हल्के छोटी गोलाकार मूवमेंट करें। शुरू में लगभग एक फुट के दायरे में 10 बार घड़ी की दिशा में और 10 बार उलटी दिशा में घुमाएं। इस प्रक्रिया से कंधे के आसपास की जकड़न धीरे-धीरे ढीली होती है और खिंचाव कम होता है। जैसे-जैसे आराम मिले आप गोलाई का दायरा थोड़ा बढ़ा सकते हैं। ये स्ट्रेच कंधे के कैप्सूल को मूवमेंट का संकेत देता है और सूजन तथा अकड़न होने पर भी दर्द बढ़ाए बिना लचीलापन लाता है। इसे रोजाना एक बार करना फायदेमंद रहता है।
क्रॉस-बॉडी स्ट्रेच (Cross Body Stretch)
इस स्ट्रेच का उद्देश्य कंधे के पीछे के हिस्से को खोलना और जकड़न को कम करना है। इसके लिए बैठकर या खड़े होकर अपने सही हाथ से प्रभावित हाथ को कोहनी के पास पकड़ें और धीरे-धीरे उसे अपनी छाती की ओर खींचें। यह स्ट्रेच कंधे के ऊपरी पीछे वाले हिस्से पर प्रभाव डालता है, जहां फ्रोज़न शोल्डर में सबसे अधिक कठोरता महसूस होती है। खिंचाव हल्का और आरामदायक होना चाहिए, दर्द देने वाला नहीं। इस पोजीशन को 15–20 सेकंड तक पकड़े रखें और फिर हाथ छोड़ दें। इसे दिन में 10–20 बार दोहराया जाता है। यह एक्सरसाइज कंधे के चारों ओर जम चुके ऊतकों को ढीला करती है, जिससे हाथ ऊपर उठाने, पीछे ले जाने और शरीर के पार ले जाने वाली मूवमेंट बेहतर होती है। नियमित अभ्यास करने से कंधे की रेंज-ऑफ-मोशन धीरे-धीरे बढ़ती है और दर्द कम होता है।
टॉवल स्ट्रेच (Towel Stretch)
टॉवल स्ट्रेच कंधे की बाहरी घुमाव (External Rotation) और लचीलापन सुधारने के लिए बेहद कारगर है। इसके लिए लगभग तीन फुट लंबा तौलिया लें और उसे अपने पीछे दोनों हाथों से पकड़ें। एक हाथ ऊपर और दूसरा नीचे रहेगा। अच्छे हाथ की मदद से तौलिया ऊपर खींचें ताकि प्रभावित हाथ पीछे की ओर थोड़ा ऊपर जाए और खिंचाव महसूस हो। यह स्ट्रेच उस कैप्सूल को खोलता है जो फ्रोज़न शोल्डर में सख्त होकर मूवमेंट रोक देता है। एक तरीका यह भी है कि तौलिया को अच्छे कंधे पर डालें और पीछे से प्रभावित हाथ से नीचे की ओर खींचें। इस तरह 10–20 बार करें। यह स्ट्रेच कंधे की लॉक्ड पोज़िशन को खोलता है और पीठ के पीछे हाथ ले जाने में सुधार करता है। रोजाना करने से रोटेशन मूवमेंट वापस आती है और दर्द भी कम होता है।
फिंगर वॉक/वॉल क्रॉल (Finger Walk/Wall Crawl )
फिंगर वॉक बहुत हल्के दबाव से कंधे को ऊपर उठाना सिखाता है, इसलिए फ्रोज़न शोल्डर में यह सुरक्षित और प्रभावी है। दीवार के सामने खड़े हों, लगभग तीन-चौथाई हाथ की दूरी पर। प्रभावित हाथ की उंगलियों को कमर की ऊंचाई पर दीवार पर रखें और उंगलियों को धीरे-धीरे ऊपर चलाना शुरू करें जैसे वे दीवार पर चढ़ रही हों। ध्यान रहे कि उंगलियां काम करें और कंधे या हाथ की मांसपेशियां जोर न लगाएं। जब आपकी कंधे की आरामदायक सीमा पूरी हो जाए, वहीं रुकें और फिर धीरे से हाथ नीचे लाएं। इसे रोज 10–15 बार दोहराएं। ये एक्सरसाइज कंधे को बिना झटके के ऊपर ले जाने में मदद करती है और जोड़ की गतिशीलता बढ़ाती है। लगातार अभ्यास करने से हाथ उठाना आसान होता है और जकड़न धीरे-धीरे कम होती है।
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