कान बंद होना एक आम समस्या है, खासतौर पर सर्दी-जुकाम, मौसम बदलने या एलर्जी के दौरान होती है। इसे मेडिकल भाषा में ईयर कंजेशन (Ear Congestion) कहा जाता है। जिस तरह सर्दी-जुकाम होने से नाक बंद हो जाती है उसी तरह मौसमी बीमारी का असर कानों पर भी पड़ता है। सर्दी जुकान की वजह से कान बंद हो जाता है। अक्सर देखा गया है कि सर्दी-जुकाम ठीक होने के बाद लोग शिकायत करते हैं कि उनके कान बंद या भरे हुए महसूस हो रहे हैं। इसके पीछे कारण होता है यूस्टेशियन ट्यूब का ब्लॉक होना।
ये ट्यूब आपके मिडिल ईयर को नाक के पीछे वाले हिस्से से जोड़ती है। जब ये ट्यूब सूजन या कंजेशन की वजह से बंद हो जाती है, तो कान में दबाव, भारीपन और हल्का दर्द महसूस होता है। कई बार सुनाई भी कम पड़ने लगता है या आवाज़ें मफल्ड लगती हैं। जैसे-जैसे सर्दी की सूजन कम होती है, ये ब्लॉकेज भी सामान्यत अपने आप ठीक हो जाती है।
कान बंद है कैसे समझें?
जब कान के अंदर हवा का दबाव बराबर नहीं रहता या कान के अंदर की नली (Eustachian Tube) सूजन के कारण बंद हो जाती है, तो कान बंद या भरा हुआ महसूस होता है। इस दौरान कान भारी-भारी लगता है, आवाज़ें साफ नहीं सुनाई देतीं, कान में खिंचाव या दबाव महसूस होता है, कभी-कभी हल्का दर्द या चक्कर भी आ सकता है।
कान बंद होने के मुख्य कारण
सर्दी-जुकाम (Cold & Flu)
नाक बंद होना या साइनस की समस्या
एलर्जी (Allergy)
ऊंचाई पर जाना (Altitude Change)
कान में वैक्स जमा होना (Earwax Blockage)
कान का संक्रमण (Ear Infection)
धूप या तेज़ ठंड के संपर्क में रहने से कान बंद हो सकता है।
कान बंद होने पर क्या करें?
mayoclinic की खबर के मुताबिक अगर आप कान बंद होने के लक्षण महसूस कर रहे हैं तो आप कुछ आसान तरीके अपनाकर यूस्टेशियन ट्यूब को खोल सकते हैं। आप कान को खोलने के लिए बार-बार कुछ निगलें। जम्हाई लें या शुगर-फ्री च्युइंग गम चबाएं, इससे ट्यूब खुलने लगती है। एक गहरी सांस लेकर नाक को बंद करें और मुंह को बंद रखते हुए धीरे से फूंक मारने की कोशिश करें। अगर पॉप जैसी आवाज़ आए तो समझिए कि ट्यूब खुल गई है।
नेज़ल डिकंजेस्टेन्ट स्प्रे का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसे कुछ दिन से ज़्यादा न लें। एलर्जी वाले लोगों के लिए टॉपिकल नेज़ल स्टेरॉयड भी मददगार हो सकते हैं। बहुत गंभीर मामले में डॉक्टर वेंटिलेशन ट्यूब डालकर कान में जमा तरल बाहर निकालते हैं।
कब करें डॉक्टर से संपर्क?
अगर कान में बंदपन, दर्द, चक्कर या सुनाई देने में कमी दो हफ्ते से ज़्यादा बनी रहे या बहुत तेज़ परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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