आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी थाली से हेल्दी फूड धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। रोजमर्रा के खाने में प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, फास्ट फूड और पैकेज्ड चीजों की भरमार हो गई है। इनमें मौजूद केमिकल्स, प्रिजर्वेटिव्स और ट्रांस फैट हमारी आंतों को अंदर से नुकसान पहुंचाते हैं। सिगरेट और शराब की आदत पाचन तंत्र को और कमजोर बना देती है। ज्यादा बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और मेयोनीज जैसे फूड्स आंतों की दीवारों पर चिपक जाते हैं। इससे खाना ठीक से पच नहीं पाता और गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया की संख्या कम होने लगती है। जब गुड बैक्टीरिया कमजोर पड़ते हैं तब गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
कुछ लोगों को सुबह खाली पेट पेट में गैस ज्यादा बनती है तो कुछ लोगों को शाम होते ही पेट में गैस बनने लगती है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री के अनुसार, शाम में गैस बनने के पीछे सबसे बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल और गलत आदतें हैं। लगातार बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और अनियमित भोजन पाचन तंत्र को सुस्त बना देता है। एक्सपर्ट ने बताया रात में कुछ गलत आदतों की वजह से भी पेट में गैस बनती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं पेट में गैस बनने का कारण और उसका इलाज।
शाम में पेट में गैस बनने की बड़ी वजहें
- दिनभर जरूरत से ज्यादा चाय और कॉफी पीना
- बहुत अधिक या बहुत जल्दी-जल्दी खाना खाना
- गलत तरीके से एक्सरसाइज या वॉक करना
- एक साथ बहुत सारा पानी गटक-गटक कर पीना
- डाइट में मटर, चना दाल, राजमा, ठंडे शरबत और ठंडे नींबू पानी का ज्यादा सेवन करने जैसी आदतें पाचन तंत्र में वात दोष को बढ़ाती हैं, जिससे पेट में गैस तेजी से बनने लगती है।
पेट की गैस से राहत पाने के आसान उपाय
दोपहर के खाने के बाद छाछ पिएं
छाछ पेट की गर्मी को शांत करती है और पाचन को बेहतर बनाती है। आयुर्वेद के अनुसार, छाछ न केवल पेट की गर्मी शांत करती है, बल्कि यह पाचन तंत्र के लिए सबसे शक्तिशाली औषधि है। छाछ की तासीर ठंडी होती है, लेकिन यह जठराग्नि यानी पाचन अग्नि को बुझाती नहीं बल्कि उसे संतुलित करती है। ये शरीर में बढ़े हुए ‘पित्त’ दोष को शांत करती है। अगर आपको पेट में जलन, खट्टी डकारें या एसिडिटी महसूस होती है, तो छाछ उसे तुरंत बेअसर कर देती है।
खाने के बाद सौंफ और मिश्री चबाएं
खाने के बाद सौंफ और मिश्री खाने से खाना जल्दी पचता है और गैस की समस्या कम होती है। खाने के बाद सौफ़ और मिश्री का सेवन केवल एक माउथ फ्रेशनर नहीं है, बल्कि ये आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार एक शक्तिशाली डाइजेस्टिव एड (Digestive Aid) है। आयुर्वेद में सौंफ को ‘मिश्रेय’ कहा जाता है और इसे त्रिदोष नाशक यानी वात, पित्त, कफ को संतुलित करने वाला माना गया है। Journal of Food Science की रिसर्च के अनुसार, सौंफ में एनेथोल, फेनचोन और एस्ट्रागोल जैसे तत्व होते हैं। ये तत्व पेट की मांसपेशियों को आराम देते हैं और ‘गैस्ट्रिक मोटिलिटी’ को बढ़ाते हैं, जिससे खाना आंतों में तेजी से आगे बढ़ता है।
बहुत ठंडा पानी पीने से बचें
घड़े का पानी शरीर के तापमान के करीब होता है, जो पाचन तंत्र को संतुलित रखता है। घड़े का पानी प्राकृतिक वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण ठंडा होता है। इसका तापमान आमतौर पर 20°C-25°C के आसपास रहता है, जो शरीर के लिए कूल तो है पर शॉक देने वाला नहीं। यह पाचन तंत्र की मांसपेशियों को संकुचित नहीं होने देता, जिससे खाना आसानी से पचता है।
रात में हल्दी वाला दूध लें
सोने से पहले गुनगुने दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पीने से गैस और सूजन में राहत मिलती है। Journal of Biological Chemistry और अन्य शोधों के अनुसार हल्दी का करक्यूमिन पित्ताशय (Gallbladder) को पित्त (Bile) बनाने के लिए उत्तेजित करता है। पित्त वसा (Fat) को तोड़ने में मदद करता है। जब रात का खाना ठीक से नहीं पचता, तो वह पेट में सड़ने लगता है जिससे गैस बनती है। हल्दी वाला दूध इस प्रक्रिया को तेज कर गैस बनने से रोकता है।
अर्जुन की छाल का सेवन करें
सुबह एक गिलास पानी में आधा चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर मिलाकर पीने से पेट की गैस में आराम मिलता है। Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित शोध के अनुसार अर्जुन की छाल में गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव (Gastroprotective) गुण होते हैं। इसमें मौजूद ‘टैनिन’ और ‘सैपोनिन’ पेट की आंतरिक परत (Mucosa) पर एक सुरक्षा कवच बनाते हैं। जब पेट की परत हेल्दी होती है, तो एसिड का संतुलन बना रहता है। ये अत्यधिक एसिड उत्पादन को रोकता है, जो गैस और सीने में जलन का मुख्य कारण होता है।
निष्कर्ष
गैस और एसिडिटी कोई बड़ी बीमारी नहीं है, लेकिन अगर समय रहते आदतें न बदली जाएं तो यह रोजमर्रा की जिंदगी को परेशान कर सकती है। सही डाइट, संतुलित लाइफस्टाइल और छोटे-छोटे आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर आप अपनी गट हेल्थ को मजबूत बना सकते हैं और गैस की समस्या से हमेशा के लिए राहत पा सकते हैं।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
