हम दिन-रात बिना रुके सांस लेते रहते हैं, लेकिन इस जरूरी प्रक्रिया की अहमियत हमें अक्सर तब समझ आती है, जब सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। फेफड़े हमारे शरीर की वह मशीन हैं, जो हर कोशिका तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं और जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालती हैं। लेकिन बढ़ता वायु प्रदूषण, धुआं, धूल और गलत जीवनशैली फेफड़ों को धीरे-धीरे कमजोर बना रही है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते कुछ आदतों में सुधार कर लिया जाए, तो फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

बढ़ता प्रदूषण और फेफड़ों पर असर

ग्रामीण इलाकों में लकड़ी और उपलों का धुआं, जबकि शहरी इलाकों में गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। सिगरेट का धुआं तो फेफड़ों का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। इसकी वजह से कई लोगों को थोड़ी सी मेहनत में भी सांस फूलने लगती है, लगातार सूखी खांसी रहती है और सर्दियों में समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान दें।

नियमित एक्सरसाइज से बढ़ेगी सांसों की ताकत

फेफड़ों को मजबूत बनाने का सबसे आसान तरीका है रोजाना शारीरिक गतिविधि। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या हल्की दौड़ जैसी एरोबिक एक्सरसाइज फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती हैं। जब हम एक्सरसाइज करते हैं, तो दिल तेजी से धड़कता है और शरीर ऑक्सीजन का बेहतर इस्तेमाल करना सीखता है। दिन में सिर्फ 30 मिनट की वॉक भी फेफड़ों के कामकाज को बेहतर बना सकती है। रिसर्च बताती है कि नियमित व्यायाम करने वालों में सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज का कमाल

सिर्फ एक्सरसाइज ही नहीं, सही तरीके से सांस लेना भी उतना ही जरूरी है। पेट से गहरी सांस लेना, जिसे डायाफ्रामिक ब्रीदिंग कहते हैं, फेफड़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। वहीं, होठों को सिकोड़कर धीरे-धीरे सांस छोड़ने की तकनीक अस्थमा और पुरानी सांस की बीमारी वालों के लिए राहत देती है। इन अभ्यासों से वायुमार्ग खुले रहते हैं, सांस लेने में आसानी होती है और शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है। रोज कुछ मिनट का अभ्यास भी बड़ा फर्क ला सकता है।

वजन कंट्रोल

ज्यादा वजन का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। पेट की चर्बी डायाफ्राम पर दबाव डालती है, जिससे फेफड़े ठीक से फैल नहीं पाते। इसका नतीजा होता है सांस लेने में दिक्कत। मोटापे से स्लीप एपनिया जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन न सिर्फ वजन कंट्रोल करता है, बल्कि फेफड़ों की कोशिकाओं की भी रक्षा करता है।

साफ हवा में सांस लेना है जरूरी

हम जिस हवा में सांस लेते हैं, वही हमारे फेफड़ों की सेहत तय करती है। प्रदूषित हवा, घरेलू धुआं और औद्योगिक धूल फेफड़ों को कमजोर बनाते हैं, खासकर बच्चों पर इसका असर ज्यादा होता है। इसलिए कोशिश करें कि सुबह-शाम साफ हवा में टहलें, घर में धुएं से बचें और वायु गुणवत्ता पर नजर रखें।

पानी और हाइड्रेशन की भूमिका

पानी पीना सिर्फ प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि फेफड़ों की सफाई के लिए भी जरूरी है। पर्याप्त पानी से वायुमार्गों में जमा बलगम पतला रहता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस को बाहर निकालना आसान होता है। हाइड्रेशन फेफड़ों की प्राकृतिक सफाई प्रणाली को बेहतर बनाता है। पानी के साथ-साथ हर्बल चाय, खीरा और तरबूज जैसे पानी से भरपूर फूड्स भी फायदेमंद हैं।

निष्कर्ष

फेफड़ों की सेहत कोई एक दिन का काम नहीं, बल्कि रोज की आदतों का नतीजा है। नियमित एक्सरसाइज, सही सांस लेने की तकनीक, संतुलित आहार, साफ हवा और पर्याप्त पानी… ये छोटे-छोटे कदम फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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