डायबिटीज और हृदय रोग सहित विभिन्न गैर संक्रामक रोगों को कम करने में विशेषज्ञ एक उपाय को काफी मददगार बताते हैं। यह उपाय है खाने-पीने की नुकसानदेह चीजों के पैकेट पर सामने की ओर स्पष्ट और सरल चेतावनी की व्यवस्था अनिवार्य कर दिया जाना। तर्क है कि ऐसा करने से फैट, शुगर और सोडियम की अत्यधिक मात्रा वाली चीजों के सेवन को काफी कम किया जा सकता है। एंडेक्रॉनोलॉजिस्ट डॉ. अनूप मिश्रा ने इस लिहाज से चिली में अपनाए जा रहे चेतावनी के उदाहरण को काफी प्रभावी बताया। न्यूट्रिशनिस्ट और फोर्टिस सी-डॉक की डायबिटीज एजुकेटर सुगंधा केहर ने भी इसे पूरे परिवार के पोषण के लिए बहुत जरूरी बताया।
गैर सरकारी संगठन ‘इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेंस, पॉलिसीज एंड पॉलिटिक्स’ (आईजीपीपी) की ओर से आयोजित परिचर्चा में डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा कि जहां चिली जैसे विकासशील देश ने सेहत के लिए नुकसान पहुंचाने वाली खाने-पीने की चीजों के पैकेट के ऊपर की ओर चेतावनी की व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू कर अपने यहां गैर संक्रामक रोगों का खतरा काफी कम कर लिया है, वहीं भारत में खाद्य सुरक्षा व संरक्षा प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) 2013 से अब तक इस पर चर्चा कर रहा है लेकिन कोई ठोस व्यवस्था तैयार नहीं कर पाया है।
उन्होंने बताया कि चिली ने नुकसानदेह पैकेटबंद खाने-पीने की चीजों पर सामने की ओर (फ्रंट ऑफ पैक) चेतावनी की व्यवस्था अनिवार्य की, बच्चों को ध्यान में रख कर होने वाली मार्केटिंग गतिविधियों पर रोक लगाई, साथ ही स्कूलों में इनकी बिक्री पर रोक लगाई। सबसे अहम बात कि अब यहां शुगर, सोडियम, सैचुरेटेड फैट या कैलरी तय मात्रा से अधिक हो तो खाद्य पदार्थों के पैकेट पर ऊपर की ओर अष्टभुज आकार के काले घेरे में साफ शब्दों में लिखा जाता है कि इसमें यह नुकसानेदह तत्व अधिक है। इसका नतीजा बहुत उत्साहजनक है। इससे चीनी की अधिकता वाले पेय पदार्थों के उपयोग में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का भी मानना है कि फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी डायबिटीज सहित विभिन्न प्रमुख गैर संक्रामक रोगों को कम करने में काफी मददगार है। भारत में लगभग 7.7 करोड़ लोगों को डायबिटीज है। इंटरनेशनल डायबिटीज फाउंडेशन (आईडीएफ) के मुताबिक वर्ष 2045 तक यह संख्या बढ़ कर 13.4 करोड़ हो सकती है।
हमारे देश में गैर संक्रामक रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लगभग 64.9 प्रतिशत मौतों की वजह यही बन रहे हैं। साथ ही अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में से 40 प्रतिशत का कारण यही हो रहे हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा, “मोटापा और उसके बाद होने वाली डायबिटीज का सबसे बड़ा कोई खतरा है तो वह शुगर ही है। इसी तरह नमक की अधिकता से उच्च रक्तचाप (हायपरटेंशन) और उससे होने वाले हृदय रोग का खतरा अधिक है।”
डायबिटीज एजुकेटर सगंधा केहर ने कहा, “बहुत से खाद्य निर्माता लेबल पर सही सूचना नहीं दे रहे हैं। इनके साथ सख्ती से पेश आने की जरूरत है। पैकेट पर सही सूचना लोगों को सही फैसले लेने में मदद करेगी। इसमें खास तौर पर माताएं अपने बच्चों के लिए सही उत्पाद चुन पाएंगी और गैर संक्रामक रोगों का खतरा घट सकेगा। चिली ने तो अपने खाद्य उत्पादकों को सेहतमंद सामग्री के उपयोग के लिए भी बाध्य किया है।”
“हमें गैर संक्रामक रोगों के खतरे को गंभीरता से लेना होगा। फैट, साल्ट और शुगर की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों के बारे में लोगों में जागरुकता तो जरूरी है ही लेकिन उससे अधिक जरूरी है कि तुरंत फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी शुरू की जाए और वह ऐसी हो कि आसानी से समझ में आए।”
डॉ. मिश्रा ने लोगों को और खास कर युवा पीढ़ी को सलाह देते हुए कहा कि वे स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने पर ध्यान दें। क्या खा रहे हैं, उसके बारे में सचेत रहें, अपना वजन नियंत्रित रखें और 25 की उम्र के बाद एक बार डायबिटीज की जांच जरूर करवाएं।
