देश का सबसे साफ-सुथरा और व्यवस्थित शहर माने जाने वाले मध्यप्रदेश का इंदौर इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता से जूझ रहा है। दूषित पानी के सेवन से जुड़ी आशंकाओं के बीच Guillain Barré Syndrome (GBS) के मामलों की रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। विशेषज्ञों के मुताबिक  GBS एक दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो अक्सर किसी संक्रमण के बाद इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी के कारण होती है और समय पर इलाज न मिलने पर खतरनाक साबित हो सकती है।

GBS कौन सी बीमारी है?

GBS एक ऑटो इम्यून दुर्लभ डिजीज है। ये एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से नसों पर हमला करने लगता है। इसका सीधा असर मांसपेशियों की ताकत पर पड़ता है और मरीज में तेजी से कमजोरी बढ़ सकती है। GBS एक ऑटो इम्यून डिजीज है जो पेट के रास्ते और सांस के रास्ते से हो सकता है। जब भी हमारी बॉडी में किसी भी बैक्टीरिया का अटैक होता है तो हमारी इम्यूनिटी उन बैक्टीरिया को मारने के लिए अटैक करती है। दूषित पानी और दूषित हवा से ये बैक्टीरिया हमारी बॉडी में पहुंचते हैं। गंदे पानी से आने वाला बैक्टीरिया हमारी इम्यूनिटी को ट्रिगर करता है, क्योंकि हमारी इम्यूनिटी अनकंट्रोल्ड है इसलिए वो हमें गुलियन बैरी सिंड्रोम कर देती है।

GBS के लक्षण कितने दिनों में दिखते हैं?

दूषित पानी प्रदूषित हवा के शरीर में पहुंचने के दो से तीन हफ्तों के अंदर हमारी बॉडी में Guillain Barré Syndrome हो सकता है। इस बीमारी की शुरुआत इंफेक्शन से होती है, फिर बॉडी इस इंफेक्शन के खिलाफ इम्यूनिटी माउंट करेगी। इम्यूनिटी के बाद नर्व्स पर अटैक होगा। इस सब में दो से तीन हफ्ते लगते हैं, यानी इस बीमारी के लक्षण दो से तीन हफ्ते में दिखेंगे।

GBS के शुरुआती रेड सिग्नल

  • फोर्टिस अस्पताल, फरीदाबाद में  न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विनीत बंगा ने बताया इस बीमारी के लक्षण पैरों से दिखना शुरु होते हैं। ये लक्षण पैरों से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ते हैं। सबसे पहले पैरों में कमजोरी होती है।  
  • पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन होना
  • पैरों से शुरू होकर ये लक्षण ऊपर की ओर बढ़ते हैं।
  • चलने और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होना
  • हाथों और चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी होना
  • गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है।
  • खास बात ये है कि GBS की कमजोरी पैरों से ऊपर की ओर बढ़ती है, जो इसे सामान्य मसल पेन से अलग बनाती है।

GBS के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया कौन से हैं?

GBS के लिए Campylobacter jejuni बैक्टीरिया जिम्मेदार है। ये बैक्टीरिया ही बीमारी को ट्रिगर करता है। अक्सर देखा गया है कि गंदा पानी पीने पर हमारी इम्यूनिटी उन बैक्टीरिया को कंट्रोल कर लेती है। कुछ मामलों में बैक्टीरिया का पता चल जाता है जैसे उल्टी दस्त की दवाई ले लेते हैं तो वो कंट्रोल हो जाता है।

क्या कमजोर इम्यूनिटी है GBS के लिए जिम्मेदार?

डॉक्टर ने बताया GBS के लिए कमजोर इम्यूनिटी नहीं बल्कि अनकंट्रोल इम्यूनिटी जिम्मेदार है। इस बीमारी में इम्यूनिटी का खुद पर कंट्रोल खत्म हो जाता है। कमजोर इम्यूनिटी वालों को इंफेक्शन की वजह से उल्टी दस्त हो सकता है लेकिन जीपीएस नहीं हो सकता है। ब्रेन से नर्व्स के रास्ते मसल्स को सिग्नल आते हैं ऐसे में एंटी बॉडी नर्व्स को डैमेज करती है जिसकी वजह से सिग्नल आ ही नहीं पाते। जब सिग्नल नहीं आते तो बॉडी में काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। ये सिग्नल लॉस बॉडी में मौजूद किसी भी नर्व्स में हो सकते हैं और उस हिस्से में कमोजोरी कर सकते हैं।

हाथ पैरों में होने वाली झुनझुनी बी 12 की कमी है या फिर  GBS के लक्षण

बॉडी में विटामिन बी 12 की कमी होने पर हाथ-पैरों में झुनझुनी हो सकती है, लेकिन ये झुनझुनी एक दम नहीं होती और बहुत ज्यादा और तेजी से नहीं होती। बी 12 की कमी से बॉडी में उतनी तेजी से वीकनेस नहीं होती जितनी तेजी से GBS की वजह से होती है। GBS में हाथ पैरों में कमजोरी और झुनझुनी बहुत तेजी से होती है। इस बीमारी में हाथ-पैरों में कमजोरी तेजी से होती है।

GBS के लक्षण

मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार ये बीमारी अक्सर दूषित पानी से फैलने वाले इंफेक्शन,दस्त, फूड पॉइजनिंग, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के 1 से 3 हफ्ते बाद सामने आती है। इंफेक्शन के बाद इम्यून सिस्टम ओवरएक्टिव होकर नसों को नुकसान पहुंचा देता है। शरीर में कमजोरी होना, बैठकर खड़े ना हो पाना,चीजों को पकड़ नहीं पाना, पैरों से चप्पल का निकल जाता GBS के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं।

GBS के कौन से लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?

जब कमजोरी इस कदर बढ़ जाए कि बैठा और उठा नहीं जाएं तो आप तुरंत अस्पताल जाएं। ये बीमारी तेजी से फैलती है, अगर शुरुआत में इसका पता लग जाए तो आसानी से इसे रिकवर किया जा सकता है। ये एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो एक लाख में एक से दो लोगों को होती है। ये बीमारी स्प्रिंग सीजन में तेजी से बढ़ती है जिसके लिए दूषित हवा और दूषित पानी दोनों जिम्मेदार है।  समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा हो सकती है

GBS से बचाव कैसे करें

उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं
खुले या संदिग्ध स्रोत का पानी न लें
लंबे समय तक दस्त, कमजोरी या झुनझुनी को नजरअंदाज न करें
लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि GBS को उम्र या सामान्य मसल पेन समझकर टालना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर पहचान और इलाज से मरीज सामान्य जीवन में लौट सकता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।