Thyroid Precautions: अगर आप थोड़ा सा काम करने के बाद ही अत्यधिक थकान महसूस करने लगते हैं तो आप थायरॉयड बीमारी के शिकार हो सकते हैं। पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में थायरॉयड की बीमारी आम है। एक अध्ययन के मुताबिक इस बीमारी के 100 मरीजों में 80 महिलाएं होती हैं। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धारे सामने आते हैं। ऐसे में नियमित रूप से जांच कराना आवश्यक हो जाता है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों को थायरॉयड से अधिक खतरा रहता है। मधुमेह रोगियों में अगर दवाइयां ब्लड शुगर लेवल को कम कर पाने में असमर्थ है तो डॉक्टर्स उन्हें थायरॉयड से जुड़े जांच करवाने की सलाह देते हैं।

डायबिटीज और थायरॉयड: डायबिटीज के मरीजों में इंसुलिन की मात्रा बेहद अनियमित होती है। वहीं, शरीर में इंसुलिन के स्तर में अधिकता या कमी आने से थायरॉयड हार्मोन के उत्पादन व क्रिया-कलापों पर असर पड़ता है जिससे मरीजों में थायरॉयड होने का खतरा बढ़ता है। वहीं, थायरॉयड के मरीजों में मेटाबॉलिज्म घटता-बढ़ता रहता है जिस वजह से मरीजों का ब्लड शुगर लेवल भी प्रभावित होता है। इसके अलावा, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि थायरॉयड होने के कारण डायबिटीज की दवाओं का असर भी कम हो जाता है। इस रिपोर्ट के अनुसार अनियंत्रित डायबिटीज के 25 फीसदी मरीज थायरॉयड के भी शिकार हैं।

क्यों है घातक: जब कोई भी व्यक्ति डायबिटीज और थायरॉयड दोनों ही बीमारियों का शिकार हो जाता है तो स्वास्थ्य संबंधित जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं।  मधुमेह रोगी जब हाइपर थायरॉयडिज्म का शिकार होता है तो उसे आंख व किडनी से जुड़ी बीमारी होने का खतरा भी ज्यादा बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीज में थाइराइड की समस्या बढने के कारण टाइप-2 मधुमेह होने की आशंका भी बढ जाती है, इससे मरीज की हालत गंभीर भी हो सकती है। इसके अलावा, इन मरीजों में ग्लूकोज का स्तर भी अधिक हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये बीमारी शरीर में ग्लूकोज को कंट्रोल करने के लिए जरूरी ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) को कमजोर कर देती है। इस वजह से मधुमेह रोगियों के अंदर ग्लूकोज लेवल हाई हो जाता है।

ये हैं बचाव के तरीके: अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को हर 2 साल पर थायरॉयड से जुड़े टेस्ट कराते रहना चाहिए। इस बीमारी से दूर रहने के लिए जरूरी है कि आप शुगर और कैफीन से दूरी बना लें। इसके अलावा, संतुलित भोजन करना भी आवश्यक है जिससे आपके शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिल सकें। मरीज अपनी दवाइयों और डाइट का खास ख्याल रखें। साथ ही साथ, थायरॉयड बीमारी से दूर रहने के लिए वजन को नियंत्रित करना भी अहम है।