आजकल थायराइड की समस्या बहुत आम होती जा रही है। हमारे गले के पास तितली के आकार की एक छोटी-सी ग्रंथि होती है, जिसे थायराइड ग्लैंड कहते हैं। यही ग्लैंड शरीर में थायराइड हार्मोन बनाती है। यह हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, वजन, दिल की धड़कन, पाचन, नींद, मूड और हार्मोनल बैलेंस को कंट्रोल करता है। जब थायराइड हार्मोन का स्तर सामान्य से कम या ज्यादा हो जाता है, तो शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। बता दें कि थायराइड दो तरह का होता है, पहला हाइपोथायराइड और दूसरा हाइपरथायराइड। दोनों के लक्षण और असर अलग-अलग होते हैं, इसलिए समय रहते इसे समझना और मैनेज करना बहुत जरूरी है।

हाइपो और हाइपर थायराइड में क्या फर्क है?

जब शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी हो जाती है, तो इसे हाइपोथायराइड कहा जाता है। इसमें वजन तेजी से बढ़ने लगता है, कब्ज की समस्या रहती है, थकान महसूस होती है, बाल झड़ने लगते हैं और महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। वहीं जब थायराइड हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगता है, तो उसे हाइपरथायराइड कहते हैं। इसमें वजन कम होने लगता है, दिल की धड़कन तेज रहती है, ज्यादा पसीना आता है, घबराहट और चिड़चिड़ापन महसूस होता है और गर्मी ज्यादा लगती है। दोनों ही स्थितियों में शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है, इसलिए इलाज के साथ-साथ सही लाइफस्टाइल और खान-पान बेहद जरूरी हो जाता है।

थायराइड को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर की सलाह और दवाइयां तो जरूरी हैं ही, लेकिन अगर रोजमर्रा की आदतों में थोड़ा बदलाव कर लिया जाए, तो थायराइड को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर दीक्षा भावसार के अनुसार कुछ आसान और प्राकृतिक उपाय थायराइड बैलेंस करने में मदद कर सकते हैं।

थायराइड को मैनेज करने के 5 आसान और असरदार टिप्स

रोज सुबह धूप लें

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर दीक्षा भावसार के अनुसार, सुबह की हल्की धूप में रोज 5 से 10 मिनट जरूर बैठें। इसे सन थेरेपी या सूर्य चिकित्सा कहा जाता है। इससे शरीर की अग्नि मजबूत होती है और कफ दोष कम होता है। ये दोनों ही थायराइड बैलेंस के लिए जरूरी हैं। साथ ही धूप लेने से कोर्टिसोल हार्मोन संतुलित रहता है, मूड बेहतर होता है और मेटाबॉलिज्म भी सुधरता है।

आयोडीन रिच फूड्स को डाइट में शामिल करें

थायराइड हार्मोन के निर्माण के लिए आयोडीन बहुत जरूरी होता है। आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ T3 और T4 हार्मोन के प्रोडक्शन को सपोर्ट करते हैं। डाइट में नारियल पानी, मोरिंगा की फली, सेंधा नमक, चुकंदर और काले तिल शामिल किए जा सकते हैं। ये न सिर्फ थायराइड को सपोर्ट करते हैं, बल्कि शरीर में टॉक्सिन्स भी नहीं बढ़ने देते।

नाक में गाय के घी की बूंदें डालें

आयुर्वेद में नस्य क्रिया को बहुत प्रभावी माना गया है। रोज सुबह या रात को सोने से पहले नाक के दोनों नथुनों में गाय के घी की 2-2 बूंद डालें। इससे दिमाग और थायराइड के बीच का कनेक्शन बेहतर होता है। यह उपाय स्ट्रेस, एंग्जायटी को कम करता है और नींद की गुणवत्ता सुधारता है। खासकर हाइपोथायराइड में यह उपाय वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है।

ब्राजील नट्स और कद्दू के बीज खाएं

ब्राजील नट्स और कद्दू के बीज थायराइड के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इनमें जिंक और हेल्दी फैट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो थायराइड हार्मोन को बैलेंस करने में मदद करते हैं। रोज सीमित मात्रा में इनका सेवन शरीर को ताकत देता है और हार्मोनल बैलेंस सुधारता है।

रोज वॉक करें और जल्दी डिनर करें

थायराइड के मरीजों के लिए फिजिकल एक्टिविटी बहुत जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक जरूर करें। इसके अलावा कोशिश करें कि रात का खाना 7 बजे से पहले खा लें। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और ब्लड शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है, जो थायराइड के मरीजों के लिए फायदेमंद है।

नियमित देखभाल है जरूरी

थायराइड कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे नजरअंदाज किया जाए। सही समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल में रखा जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय में बड़ा असर दिखाते हैं।

निष्कर्ष

अगर आप भी थायराइड की समस्या से जूझ रहे हैं, तो एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें और अपने खान-पान व दिनचर्या पर ध्यान दें।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।