खराब लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठने की आदत और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण युवाओं में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे बैक पेन, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, हर्नियेटेड डिस्क और खराब पोस्चर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। स्पाइन हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, गलत पोस्चर, अधिक समय तक स्क्रीन पर झुके रहने और असंतुलित खानपान की वजह से कमर और गर्दन में दर्द आम होता जा रहा है। मणिपाल हॉस्पिटल, गुरुग्राम में कंसल्टेंट स्पाइन सर्जरी, डॉ. आशीष ने रीढ़ की हड्डी की समस्या बढ़ने के कारण और इससे बचाव के उपाय बताए हैं।
डॉ. आशीष ने बताया कि आजकल के समय में पीठ का दर्द केवल वृद्धों की समस्या नहीं, बल्कि ये कम उम्र के लोगों को भी बहुत प्रभावित कर रही है। पीठ का दर्द इतना आम हो गया है कि यह पूरी दुनिया में होने वाली विकलांगता का मुख्य कारण बनता जा रहा है। ऐसे में इस समस्या को खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है।
युवाओं में रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ने के कारण
खराब लाइफस्टाइल, शरीर में पोषक तत्वों की कमी और गलत तरीके से वजन उठाने की वजह से यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। इसके अलावा घंटों तक झुककर बैठने या गलत पोस्चर में काम करने से स्पाइन पर दबाव बढ़ता है। लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल से गर्दन और पीठ में दर्द बढ़ जाता है।
एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटी की कमी
नियमित एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग न करने से रीढ़ की हड्डी कमजोर हो जाती है। मांसपेशियां कमजोर होने से स्पाइनल डिस्क पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
हर्निएटेड डिस्क
हर्निएटेड डिस्क को रप्चर्ड या स्लिप डिस्क भी कहा जाता है। यह तब होता है जब स्पाइनल डिस्क का मध्य का स्पंजी हिस्सा किसी बिंदु से बाहर के कठोर हिस्से पर दबाव डालता है, जिसके चलते नसें उत्तेजित हो जाती हैं और दर्द, सुन्नपन या हाथों और पैरों में कमजोरी हो सकती है।
असंतुलित खानपान और पोषण की कमी
जंक फूड और ज्यादा शुगर का सेवन इंफ्लेमेशन बढ़ाकर रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा सकता है। शरीर में कैल्शियम, विटामिन D और मैग्नीशियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
मोटापा और वजन बढ़ना
अधिक वजन होने से रीढ़ की हड्डी और लोअर बैक पर दबाव बढ़ता है, जिससे डिस्क प्रॉब्लम और स्लिप डिस्क का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखें कि वजन कंट्रोल में रहे।
मेंटल स्ट्रेस और नींद की कमी
ज्यादा स्ट्रेस लेने और ठीक से न सोने से मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं, जिससे कमर और गर्दन में दर्द बढ़ सकता है। स्ट्रेस हॉर्मोन यानी कॉर्टिसोल बढ़ने से रीढ़ की हड्डी पर नकारात्मक असर पड़ता है।
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