पानी सिर्फ प्यास ही नहीं बुझाता बल्कि शरीर को पोषण भी देता है। साफ-सुथरा और जरूरी मिनरल्स से भरपूर पानी बॉडी में मौजूद टॉक्सिन्स और अशुद्धियों को बाहर निकालने का काम करता है, जिससे किडनी, लिवर और पाचन तंत्र स्वस्थ रहते हैं। पर्याप्त मात्रा में सही पानी पीने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, शरीर का तापमान संतुलित रहता है और थकान महसूस नहीं होती। मिनरल्स युक्त पानी में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों के सही संकुचन और नसों के बेहतर कार्य के लिए जरूरी होते हैं। 

इसके अलावा, साफ पानी पीने से पेट के इंफेक्शन, डायरिया और फूड पॉइजनिंग का खतरा कम होता है, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है। जब शरीर बार-बार इंफेक्शन से बचा रहता है, तो कई गंभीर बीमारियों का जोखिम भी अपने आप कम हो जाता है। शुद्ध पानी पीने के लिए लोग RO वाटर को सबसे सुरक्षित मानते हैं। हम भी मानते हैं कि RO का पानी साफ और सुरक्षित होता है लेकिन तब जब उसका TDS लेवल ठीक हो।

अगर आपके घर के RO का TDS लेवल गलत है, तो आप पानी नहीं बल्कि ‘डेड वॉटर’ (Dead Water) पी रहे हैं। अक्सर हमें लगता है कि  RO का TDS  जितना कम होगा पानी उतना साफ होगा, लेकिन विज्ञान इसके बिल्कुल उलट बात करता है। इस लेख में हम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की उस रिसर्च का विश्लेषण करेंगे जो बताती है कि किस TDS तक का पानी सेहत के लिए सुरक्षित और जरूरी है।

RO में कितना TDS लेवल है सुरक्षित

ज्यादातर लोग RO लगवाते समय TDS को 50 या 100 पर सेट करवा देते हैं ताकि पानी मीठा लगे, लेकिन WHO के मुताबिक  TDS का 50 से 100 तक का स्तर सुरक्षित नहीं है। RO वाटर आपके लिए ‘अमृत’ हो सकता है, बशर्ते आप  TDS तक का सही गणित जानते हों। बहुत ज्यादा शुद्ध यानी बिना मिनरल वाला पानी लंबे समय तक पीना शरीर के लिए फायदेमंद नहीं माना जाता। WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार, पानी के स्वाद और उसमें मौजूद खनिजों के आधार पर TDS का वर्गीकरण किया गया है जैसे

300 mg/litre से कम: एक्सीलेंट (बेहतरीन)
300 – 600 mg/litre: गुड (अच्छा)
600 – 900 mg/litre: फेयर (औसत)
900 – 1200 mg/litre: पुअर (खराब)
1200 mg/litre से अधिक: अनएक्सेप्टेबल (अस्वीकार्य)

WHO की ‘Health risks from drinking demineralised water’ रिसर्च चेतावनी देती है कि बहुत कम TDS वाला पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जब TDS 50-100 से कम हो जाता है, तो पानी ‘एसिडिक’ हो जाता है। ऐसा पानी पीने से शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जिससे दिल की बीमारी और हड्डियों की कमजोरी का खतरा बढ़ जाता है।

RO का पानी और TDS का गणित

RO (Reverse Osmosis) वाटर में अशुद्धियों के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स भी हट जाते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपके घर के पानी का नेचुरल TDS 500 से कम है, तो RO की जरूरत नहीं है। RO का इस्तेमाल तभी करें जब पानी में भारी धातुएं जैसे आर्सेनिक, लेड हों और फिल्टर करने के बाद भी TDS 250-300 के आसपास बना रहे।

कितने TDS का पानी नहीं पीना चाहिए?

WHO के मुताबिक 300 mg/L से कम TDS वाला पानी नुकसानदायक है या बिल्कुल नहीं पीना चाहिए ऐसा नहीं है। WHO के मुताबिक बहुत कम TDS वाला पानी पोषण के लिहाज से कम प्रभावी हो सकता है, खासकर अगर भोजन से मिनरल्स की पूर्ति ठीक से न हो रही हो। 150 से 300 mg/L TDS वाला पानी स्वाद और मिनरल संतुलन के लिहाज से बेहतर होता है। लोग पानी के स्वाद के लिए पानी का टीडीएस लेवल 100 से कम रखते हैं जो पोषण के लिहाज से ठीक नहीं है।

निष्कर्ष

पानी केवल प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर को अंदर से साफ, ऊर्जावान और संतुलित रखने का आधार है। इसलिए रोज़ ऐसा पानी पिएं जो साफ, सुरक्षित और संतुलित मिनरल्स से भरपूर हो, ताकि शरीर को सही पोषण मिल सके और स्वास्थ्य लंबे समय तक बना रहे।

पैरों में तेजी से बढ़ती कमजोरी और झुनझुनी विटामिन बी 12 की कमी नहीं बल्कि GBS के हो सकते हैं लक्षण, जानिए क्या है ये खतरनाक सिंड्रोम। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।