Diabetes Type 1 in Children: देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, अब तक 29 लाख से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। अब तक हुए अध्ययनों में इस वायरस को ऑटो इम्युन बताया जा रहा है यानी जिसकी इम्युनिटी कमजोर है, उन्हें इस वायरस से अधिक खतरा है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों को भी कोरोना वायरस को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अब तक जितने भी लोग इस वायरस से संक्रमित हैं उनमें से ज्यादातर लोगों की पहले से मेडिकल हिस्ट्री है और वो डायबिटीज या हाई बीपी के पेशेंट हैं। एक नए रिसर्च में शोधकर्ता ये अंदाजा लगा रहे हैं कि कोरोना काल में बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज का खतरा बढ़ गया है –
ये बात आई सामने: लंदन के इंपीरियल कॉलेज में हुए इस शोध में रिसर्चर्स इस नतीजे पर आए कि महामारी के दौरान जिन बच्चों में मधुमेह रोग की पुष्टि हुई है, वो आम दिनों में बच्चों में डायबिटीज के मामलों से दोगुना अधिक है। लंदन के 5 अस्पतालों पर किये गए इस शोध में कुछ बच्चे ऐसे भी थे जो कोरोना पॉजिटिव रह चुके हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसा मुमकिन है कि कोरोना वायरस के स्पाइक इंसुलिन प्रोटीन का निर्माण करने वाले सेल्स पर अटैक कर उन्हें डैमेज कर सकते हैं।
क्या है टाइप 1 डायबिटीज: बच्चों में टाइप 1 मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें उनका शरीर में इंसुलिन प्रोड्यूस कर पाने में असमर्थ हो जाता है। इस तरह के डायबिटीज में पैन्क्रियाज ठीक तरीके से कार्य करना बंद कर देती है। इस कारण पैन्क्रियाज में मौजूद बीटा सेल्स डैमेज हो जाते हैं। ये सेल्स ही शरीर में इंसुलिन प्रोड्यूस करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इनके नष्ट होने के कारण इंसुलिन नहीं बनता जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों को रोजाना इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है।
क्या हैं लक्षण और बचाव के उपाय: बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि अभिभावक इस बीमारी के लक्षणों की ओर ध्यान दें। टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित मरीजों को बार-बार प्यास या भूख लगना, थकान, वजन में गिरावट, धुंधलापन जैसी शिकायतें हो सकती हैं। वहीं, डायबिटीज के मरीजों को अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाने को अपने डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए। जंक फूड, पैकेज्ड फूड के सेवन से भी बचना चाहिए। मीठे फल, चावल, आलू, पास्ता और व्हाइट ब्रेड से भी परहेज करें।

