आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ईमेल देखना, कपड़े तह करना या किसी को फोन करना जैसे छोटे काम भी पहाड़ जैसे लगने लगे हैं। अक्सर इसे आलस समझ लिया जाता है, लेकिन असल में यह मेंटल थकान का संकेत हो सकता है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा रश्मि के अनुसार, महामारी के बाद लोगों में लंबे समय का तनाव, चिंता और नींद की कमी बढ़ी है, जिसका सीधा असर दिमागी ऊर्जा पर पड़ा है। ऐसे में आइए जानते हैं साइकोलॉजिस्ट के बताए आसान और असरदार तरीके, जिनसे मिनटों में मेंटल थकान दूर होगी और दिमाग भी फ्रेश रहेगा।
मेंटल थकान क्या होती है और कैसे पहचानें?
मेंटल थकान तब होती है जब दिमाग को लगातार काम करने के बाद सही आराम नहीं मिलता। इसका असर सोचने, फैसले लेने और ध्यान लगाने की क्षमता पर पड़ता है। इसके आम लक्षणों में काम टालना, चिड़चिड़ापन, सोच में धुंध, ध्यान की कमी और अचानक सब कुछ छोड़ देने जैसा महसूस होना शामिल है। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नींद की कमी बनती है सबसे बड़ी वजह
मेंटल थकान से उबरने के लिए सबसे जरूरी है अच्छी और पूरी नींद। रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद दिमाग को रिचार्ज करने का काम करती है। सोने से पहले एक तय रूटीन बनाना मददगार होता है। जैसे रात को लाइट धीमी करना, मोबाइल और टीवी से दूरी बनाना और हल्की हर्बल चाय लेना। नींद पूरी न होने पर दिमाग का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो फोकस और प्लानिंग के लिए जिम्मेदार होता है, इसलिए छोटे काम भी मुश्किल लगने लगते हैं।
काम के बीच ब्रेक लेना क्यों है जरूरी?
लगातार घंटों काम करते रहना दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसके लिए 90/20 रूल अपनाया जा सकता है। यानी 90 मिनट ध्यान से काम करें और फिर 20 मिनट का ब्रेक लें। इस ब्रेक में हल्की वॉक, गहरी सांस या शांत संगीत सुनना दिमाग को आराम देता है। इससे तनाव हार्मोन कंट्रोल में रहते हैं और काम करने की प्रेरणा बनी रहती है।
इन बातों का रखें ध्यान
मेंटल थकान कई बार शरीर में ऊर्जा की कमी की वजह से भी होती है। ब्लड शुगर गिरने पर दिमाग सुस्त पड़ने लगता है। इसलिए हर 3 से 4 घंटे में हल्का और संतुलित स्नैक लेना जरूरी है। दही, नट्स, होल ग्रेन और फल दिमाग को जरूरी पोषण देते हैं। इसके साथ ही दिनभर में पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। ओमेगा-3 से भरपूर चीजें जैसे अखरोट और फैटी फिश दिमाग की थकान कम करने में मदद करती हैं। लंबे समय तक बैठे रहना मानसिक थकान को और बढ़ा देता है। रोज सिर्फ 10 मिनट तेज चाल से चलना भी बड़ा असर दिखा सकता है। इससे शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो मूड बेहतर करते हैं और तनाव कम करते हैं। योग और स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां भी दिमाग को शांत रखने में मदद करती हैं।
डिजिटल डिटॉक्स क्यों है जरूरी?
मोबाइल और सोशल मीडिया पर लगातार आने वाले नोटिफिकेशन दिमाग को कभी आराम नहीं करने देते। इसलिए जरूरी है कि गैर जरूरी नोटिफिकेशन बंद किए जाएं। काम के समय ध्यान भटकाने वाले ऐप्स से दूरी बनाएं। रात को सोने से पहले तीन ऐसी चीजें लिखें, जिनके लिए आप आभारी हैं। यह आदत नकारात्मक सोच को कम करती है और मन को सुकून देती है।
कब लें विशेषज्ञ की सलाह?
अगर जीवनशैली में बदलाव के बाद भी मानसिक थकान कम न हो, तो विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है। कई बार डिप्रेशन, विटामिन B12 या आयरन की कमी भी इसकी वजह हो सकती है। ऐसे में सही जांच और काउंसलिंग मददगार साबित होती है। माइंडफुलनेस और थेरेपी जैसी तकनीकें भी दिमाग को मजबूत बनाने में सहायक होती हैं।
निष्कर्ष
मेंटल थकान कोई कमजोरी नहीं है। यह शरीर और दिमाग का संकेत है कि उसे आराम और देखभाल की जरूरत है। एक साथ सब कुछ बदलने की बजाय एक छोटे कदम से शुरुआत करें। नियमित नींद, सही खानपान और थोड़ी हलचल से धीरे-धीरे मानसिक ताकत लौटती है। सही आदतों के साथ आप फिर से छोटे-छोटे काम भी आसानी और सुकून से कर पाएंगे।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
