डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसे लाइफस्टाइल और खान-पान में सही बदलाव करके काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए डाइट में कार्बोहाइड्रेट का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि कार्ब्स का सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज मरीजों को अक्सर ज्यादा भूख लगती है और वे पेट भरकर खाना खाते हैं। हमारे खाने का अहम हिस्सा है रोटी और चावल, दोनों ही अनाज कार्ब्स का बेहतरीन स्रोत हैं। कार्ब्स मतलब चीनी जिसे मीठा जहर कहा जाता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कार्बोहाइड्रेट (Carbs) को कंट्रोल करना है। ऐसे में अगर रोजाना ज्यादा मात्रा में गेहूं की रोटी खाई जाए, तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। गेहूं के आटे में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन के बाद ग्लूकोज में बदल जाती है। अगर डायबिटीज मरीज दिन भर के खाने में 8 से 10 रोटी खाते हैं तो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जो मरीज को ताउम्र दवाओं पर निर्भर बना सकता है।

डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. संजीव अग्रवाल के अनुसार अगर आप 100 ग्राम गेहूं के आटे की चपाती खाते हैं, तो ये शरीर में जाकर लगभग 60 ग्राम ग्लूकोज पैदा करती है। गेहूं की रोटी में 60% कार्बोहाइड्रेट स्टार्च के रूप में होता है। गेहूं का GI अधिक होता है, जिससे खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर का स्तर तेजी से स्पाइक करता है। लगातार गेहूं की अधिक मात्रा यानी 10 से 12 रोटी का सेवन करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज मरीजों को ब्लड शुगर को नॉर्मल रखने के लिए डाइट में 5 लो कार्ब्स आटे का सेवन करना चाहिए। इन लो ग्लाइसेमिक आटे में कार्ब्स भी लो होता है जिसका सेवन करने से ब्लड में शुगर का स्तर कंट्रोल रहता है। आइए जानते हैं कि कौन से आटे की रोटी खाने से ब्लड में शुगर का स्तर कंट्रोल रहता है।

बाजरे के आटे की रोटी खाएं

बाजरा फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स गेहूं की तुलना में कम माना जाता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। बाजरे में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम होता है। कई रिसर्च में ये साबित हो चुका है कि मैग्नीशियम शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) को बढ़ाता है। इसका फाइबर पाचन तंत्र में एक जेल जैसी परत बनाता है, जो कार्बोहाइड्रेट के टूटने की गति को धीमा कर देती है, जिससे खाना खाने के बाद अचानक शुगर स्पाइक नहीं होता।

ज्वार के आटे की रोटी

ज्वार एक ग्लूटेन-फ्री अनाज है, जो पाचन को बेहतर बनाता है। डायबिटीज मरीजों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है। Journal of Agricultural and Food Chemistry में प्रकाशित शोध के अनुसार, ज्वार में मौजूद टैनिन शरीर में स्टार्च के अवशोषण को बाधित करते हैं। चूंकि ये ग्लूटेन-फ्री है, ये पाचन मार्ग में सूजन को कम करता है, जो टाइप-2 डायबिटीज को मैनेज करने में मददगार है।

चने के आटे की रोटी

चना प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है। चने के आटे की रोटी खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने की संभावना कम होती है और भूख भी देर से लगती है। गेहूं की तुलना में चने के आटे का ग्लाइसेमिक लोड (GL) बहुत कम होता है। यह पेट में ‘पेप्टाइड YY’ हार्मोन को उत्तेजित करता है, जो मस्तिष्क को तृप्ति का संकेत देता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ब्लड शुगर नॉर्मल रहता है।

रागी के आटे की रोटी

रागी को लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला अनाज माना जाता है। इसमें कैल्शियम, आयरन और फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है। रिसर्च के अनुसार रागी के आटे का सेवन करने से अल्फा-ग्लूकोसिडेस (Alpha-glucosidase) नामक एंजाइम की गतिविधि कम हो जाती है, जो कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है। साथ ही, इसका कैल्शियम डायबिटीज के कारण होने वाली हड्डियों की कमजोरी को रोकता है।

सोया आटे की रोटी

सोया आटा प्रोटीन से भरपूर होता है और वजन व ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद कर सकता है। इसे सीमित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। मेडिकल रिसर्च बताती हैं कि सोया प्रोटीन इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद करता है। चूंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट बहुत कम और प्रोटीन बहुत ज्यादा होता है, यह लीवर में ग्लूकोज के उत्पादन को कम करता है, जिससे फास्टिंग शुगर लेवल को सुधारने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

डायबिटीज में पूरी तरह रोटी छोड़ना जरूरी नहीं है, बल्कि रोटी के प्रकार और मात्रा पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर-प्रोटीन से भरपूर अनाज को डाइट में शामिल करके ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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