आज के समय में नींद न आना (अनिद्रा) एक आम समस्या बन चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह हमारा बदलता लाइफस्टाइल है, जो धीरे-धीरे हमारी बॉडी की जैविक घड़ी (Biological Clock) के खिलाफ काम करने लगा है। कई रिसर्च और अध्ययनों से पता चलता है कि पिछले कुछ दशकों में वयस्कों की नींद की अवधि लगातार कम हुई है। आसान शब्दों में कहें तो आज की पीढ़ी अपने पहले की पीढ़ी की तुलना में कम और खराब नींद ले रही है। लम्बे समय तक नींद में खलल,कम नींद लेने से शरीर का एक बेहद जरूरी हार्मोन मेलाटोनिन (Melatonin) सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।

मेलाटोनिन क्या है?

  • भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) ने बताया मेलाटोनिन एक हॉर्मोन है जिसे नींद का हार्मोन कहा जाता है। अक्सर लोग मेलाटोनिन को केवल स्लीपिंग हार्मोन मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह शरीर का नाइट सिग्नल होता है। ये शरीर की हर कोशिका को संकेत देता है कि अब आराम, मरम्मत और रिकवरी का समय है। अगर मेलाटोनिन का स्तर देर से बढ़ता है या कम बनता है तो इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
  • देर से नींद आना
  • हल्की और बार-बार टूटने वाली नींद
  • सुबह उठने पर थकान महसूस होना
  • मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और खाने की क्रेविंग बढ़ना शामिल है। 

मेलाटोनिन सिर्फ नींद के लिए नहीं, बल्कि ये शरीर में एंटीऑक्सीडेंट डिफेंस, इम्युनिटी, सूजन कंट्रोल, माइटोकॉन्ड्रियल सुरक्षा और ब्रेन फंक्शन में भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए जब मेलाटोनिन गड़बड़ाता है, तो सिर्फ नींद ही नहीं बल्कि शरीर की रात की हीलिंग प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

क्यों जरूरी है अच्छी नींद?

अच्छी नींद दिमाग को रिलैक्स करती है। ये दिमाग का कचरा साफ करती है। शरीर की कोशिकाएं रिपेयर करती है। नर्वस सिस्टम रीसेट करती है और हार्मोन बैलेंस रहते हैं।

मेलाटोनिन बढ़ाने के प्राकृतिक और आसान उपाय

  • सोने से पहले कमरे की लाइट को बुझा दें। क्योंकि मेलाटोनिन अंधेरे में बनता है। लेकिन आज की सबसे बड़ी समस्या है रात में आर्टिफिशियल लाइट, खासकर मोबाइल और स्क्रीन की नीली रोशनी रहती है जो आपकी नींद को प्रभावित करती है।
  • सोने से 2 घंटे पहले तेज लाइट कम कर दें।
  • घर में वार्म और हल्की रोशनी का इस्तेमाल करें
  • सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप से दूरी बनाएं
  • बेडरूम को अंधेरा, ठंडा और शांत रखें।
  • अपने बॉडी क्लॉक (Circadian Rhythm) को ठीक करें। समय पर सोएं और समय पर जागें।
  • मेलाटोनिन को रूटीन पसंद है। रोज़ एक ही समय पर सोएं और जागें
  • डिसिप्लिन लाइफ जिएं। रूटीन बोरियत नहीं, बल्कि नर्वस सिस्टम की सुरक्षा है
  • कुछ देर सुबह की धूप लें। यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन रात में मेलाटोनिन पाने के लिए सुबह की धूप जरूरी है।
  • उठने के 60 मिनट के भीतर 10–20 मिनट बाहर धूप में जाएं
  • आप सूरज से आंखें नहीं मिलाएं बस कुछ देर हल्की गुनगुनी धूप में रहें।
  • खानपान पर दें ध्यान
  • कुछ खाद्य पदार्थ मेलाटोनिन के उत्पादन में मदद करते हैं जैसे कीवी, बादाम, अखरोट,ओट्स, दूध, ट्रिप्टोफैन युक्त
  • आहार जैसे कद्दू के बीज, तिल, सोया, टोफू खाएं।  साथ ही सोने से 2–3 घंटे पहले डिनर करें।  रात में भारी, तला-भुना और बहुत मसालेदार भोजन न करें। 
  • दोपहर 12 बजे के बाद कैफीन का सेवन करने से बचें
  • योग और एक्सरसाइज करने की आदत बनाएं।
  • सुबह और शाम 30–40 मिनट पैदल चलें
  • लंबे समय तक लगातार न बैठें
  • रोज़ 30 मिनट योगासन करें। योग इसलिए फायदेमंद है क्योंकि मेलाटोनिन तब बेहतर बनता है, जब नर्वस सिस्टम पैरासिम्पेथेटिक मोड (Rest & Digest) में जाता है। भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम,शवासन करें।

एक्सपर्ट की राय

एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आप इन आदतों को कम से कम 14 दिन तक लगातार अपनाते हैं, तो नींद में साफ सुधार नजर आने लगेगा। अगर आपकी नींद महीनों या सालों से खराब है, तो यह एक रात में ठीक नहीं होगी, लेकिन शरीर सही संकेत मिलने पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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