बच्चों की अच्छी सेहत के लिए संतुलित आहार के साथ-साथ पर्याप्त आराम की भी जरूरत होती है। उनके खान-पान और खासकर आराम पर उनके माता-पिता को विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसा इसलिए कि हाल ही में एक शोध में यह बात सामने आई है कि जो बच्चे रात में पर्याप्त नींद नहीं लेते उनमें टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है। शोध में 9 से 10 साल के अलग-अलग धर्मों के तकरीबन 4,525 बच्चों के ब्लड सैंपल तथा एक प्रश्नावली का परीक्षण किया गया था, जिसके बाद यह पाया गया कि जो बच्चे देर तक सोते हैं उनका वजन कम था तथा उनके फैट मास के स्तर में भी काफी कमी थी। सोने का कालखंड इंसुलिन और ब्लड ग्लूकोज को काफी प्रभावित करता है।
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने 10 साल तक की उम्र के बच्चों को कम से कम 10 घंटे तक सोने का सुझाव दिया है। शोध से जुड़े एक शोधकर्ता बताते हैं कि इस शोध से यह पता चलता है कि सोने का टाइम बढ़ाकर बॉडी फैट के लेवल को तथा टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को आसानी से कम किया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि बचपन में ज्यादा सोने की आदत युवावस्था की सेहत से सीधे तौर पर संबंधित होती है। यह आगे चलकर कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी फायदों का आधार बन सकती है।
शोधकर्ताओं ने आगे बताया कि अगर हर हफ्ते सोने के समय को औसतन आधा घंटा बढ़ाते हैं तो इससे बॉडी मास इंडेक्स में 0.1 किलोग्राम प्रति वर्गमीटर की कमी आती है। साथ ही साथ इंसुलिन प्रतिरोध में भी 0.5 प्रतिशत की कमी आती है। जिसकी वजह से टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ने का खतरा कम होता है। इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन है जो शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने का काम करता है। टाइप 2 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन की उत्पादन क्षमता काफी प्रभावित होती है जिससे उसकी मात्रा काफी कम हो जाती है।![]()

