इंसान जो कुछ भी खाता है उसे पचाने के बाद उसमें से पोषक तत्वों को पूरे शरीर में पहुंचाने का काम लिवर करता है। यह अंग शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। फैटी लिवर के कोई खास लक्षण नहीं होते हैं। लेकिन जब 30-40 फीसदी फैट लिवर में जमा हो जाए तो भूख न लगना, जी-घबराना, वजन घटना, ब्लड प्रेशर हाई होना जैसी परेशानी शुरू हो जाती है। ऐसे में आपको इन समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए और कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए, वरना स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। आइए जानते हैं फैटी लिवर के अन्य लक्षण और कैसे करें इसका बचाव-

फैटी लिवर के लक्षण:
– पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होने लगना
– आंख और त्वचा पर पीलापन आने लगना
– हथेली लाल होने लगना
– थकावट और कमजोरी महसूस होने लगना
– पेट से जुड़ी समस्या होने लगना

फैटी लिवर के कारण:
डायबिटीज<br /> – ब्लड में फैट की मात्रा अधिक हो जाना
– हाई ब्लड प्रेशर
– हाई कोलेस्ट्रॉल<br /> – विशेष दवाईयों के प्रभाव के कारण

फैटी लिवर का बचाव:
– घरेलू उपचारों की मदद से फैटी लिवर की समस्या को ठीक किया जा सकता है। इसका उपचार करने के लिए सिरके, नींबू, हल्दी, पपीते इत्यादि का सेवन किया जा सकता है।
– ग्रीन-टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फैटी लिवर के लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन्स लिवर से फैट को कम करता है।
– विटामिन- ई और सी वाले फूड्स लिवर को स्वस्थ रखते हैं। प्रोबायोटिक्स (हेल्दी बैक्टीरिया) जो दही में मौजूद होते हैं, को दवा के रूप में लें। यह फैटी लिवर को कंट्रोल करता है।
– आयुर्वेदिक उपचार भी फैटी लिवर की समस्या को कम करता है। गिलोय, एलोवेरा, चिरायता, भृंगराज, करेले का जूस, आंवले का पाउडर नियमित रूप से लेने पर पेट से संबंधी कोई समस्या नहीं होती है।
– किसी भी अन्य बीमारियों की भांति फैटी लिवर में भी योगा करना लाभदायक विकल्प साबित हो सकता है। योगा लिवर की कार्यक्षमता को सुधारने में सहायक होते हैं और लिवर में मौजूद फैट को भी कम करने में मदद करते हैं।