पानी हमारी जिंदगी के लिए बहुत जरूरी है। पानी का सेवन बॉडी को हाइड्रेट करता है और बॉडी को हेल्दी रखता है। हमारी बॉडी के लगभग सभी अंगों को अपना काम सुचारू रूप से करने के लिए पानी की जरुरत होती है। हमारी बॉडी का लगभग 60% हिस्सा पानी से बना है। रोज पर्याप्त पानी का सेवन करने से बॉडी में जमा टॉक्सिन पेशाब के जरिए बॉडी से बाहर निकलते हैं और एनर्जी बूस्ट होती है। आयुर्वेद के मुताबिक पानी पीना ही मायने नहीं रखता बल्कि पानी का सही सेवन करना भी मायने रखता है। आयुर्वेद में पानी को शीतल, पोषक और शांत करने वाला कहा गया है। पानी त्रिदोषक है यानी ये वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करता है।
आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों ही पानी को जीवन मानते हैं। रोज पानी का सेवन बॉडी को हाइड्रेट करता है, मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। जब पानी शरीर में ठीक से अवशोषित होता है तो ये पाचन में सुधार करता है। पर्याप्त पानी का सेवन करने से बॉडी ठंडी रहती है और स्किन में निखार आता है। पानी का सेवन करने से बॉडी से टॉक्सिन निकलते हैं और सहनशक्ति बढ़ती है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर दीपक भनोट के मुताबिक, पानी पीना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी पानी पीने का सही तरीका भी है। पानी पीने का सही तरीका अपनाकर आप वात, कफ और पित्त दोषों को संतुलित रख सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि पानी पीने का सही नियम क्या है?
पानी पीने का सही समय है जरूरी
अक्सर हम चलते फिरते कभी भी पानी की बोतल उठा लेते हैं और गटर गटर पानी को पी लेते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि पानी का सही समय पर सही तरीके से सेवन सेहत के लिए उपयोगी है। पानी का सेवन सुबह खाली पेट करना बेहद फायदेमंद है। सुबह खाली पेट पानी पीने से बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, कब्ज का इलाज होता है। सुबह खाली पेट पानी पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और मोटापा भी कंट्रोल रहता है। आयुर्वेद के मुताबिक शरीर के दोषों की स्थिति के अनुसार पानी पीने का समय बदलता रहता है। कफ दोष में भोजन से पहले पानी का सेवन करें। वात दोष में भोजन के एक घंटे बाद पानी का सेवन करें। पित्त दोष में दिन भर बॉडी की जरूरत के मुताबिक पानी पिएं। सही समय पर पानी पीने से पाचन, वजन संतुलन और ऊर्जा में सुधार होता है।
खड़े नहीं बल्कि बैठकर पिएं पानी
आयुर्वेद के अनुसार पानी हमेशा बैठकर पीना चाहिए। बैठकर पानी पीने से शरीर और तंत्रिका तंत्र शांत रहता है, जिससे जल का अवशोषण बेहतर होता है। खड़े होकर पानी पीने से द्रव संतुलन बिगड़ सकता है और जोड़ों या पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। बैठकर धीरे-धीरे पानी पीने से किडनी, पाचन तंत्र और दिल की हेल्थ में सुधार होता है।
पानी की घूंट घूंट पिएं
अक्सर हम लोग पानी की बोतल लेते हैं और गटर गटर एक साथ पी जाते हैं जो गलत है। पानी को एक साथ गटकने के बजाय छोटे-छोटे घूंट में पानी पीना सेहत के लिए उपयोगी है। आयुर्वेद के अनुसार इससे पाचन अग्नि संतुलित रहती है और पानी शरीर में समान रूप से फैलता है। खाने के समय खासतौर पर पित्त प्रकृति वालों को छोटे घूंट लेने चाहिए, जिससे पेट में एसिडिटी नहीं हो। धीरे-धीरे पानी पीने से बॉडी हाइड्रेट रहती है, पाचन में सुधार होता है और बॉडी पर अचानक दबाव नहीं पड़ता।
Journal of Physiology में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक जब आप एक साथ बहुत सारा पानी पीते हैं, तो शरीर इसे Surplus के रूप में देखता है। तेजी से पानी पीने पर किडनी उसे तेजी से फिल्टर करके पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है, जिससे कोशिकाओं को हाइड्रेट होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। वहीं, घूंट-घूंट पानी पीने से शरीर के ऊतक (Tissues) पानी को बेहतर तरीके से अवशोषित करते हैं।
पानी के तापमान का भी रखें ध्यान
आयुर्वेद में सामान्य या गुनगुने पानी को सबसे बेस्ट माना जाता है। उबला हुआ और हल्का ठंडा किया गया पानी पाचन के लिए बहुत जरूरी है। बहुत ठंडा पानी पाचन अग्नि को बुझा देता है जिससे पेट में गैस, सूजन और अपच की परेशानी हो सकती है। कफ प्रकृति वालों के लिए गर्म पानी खासतौर पर फायदेमंद होता है। ये पानी भूख को कंट्रोल करता है और चर्बी कम करने में मददगार होता है।
प्यास लगे तभी पानी पिएं
आयुर्वेद के मुताबिक पानी का सेवन प्यास लगने पर ही करें। बेवजह पानी पीने से पाचन कमजोर हो जाता है और बॉडी में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं। हर इंसान की पानी की जरूरत अलग होती है, इसलिए 8–10 गिलास पीने का नियम सभी पर लागू नहीं होता। जब प्यास लगे तभी पानी पीना शरीर की वास्तविक आवश्यकता को दर्शाता है और संतुलन बनाए रखता है।
पानी को सही तरह से करें स्टोर
आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में पानी पीने की सलाह दी गई है। तांबा पानी को शुद्ध करता है और उसमें प्राकृतिक जीवाणुनाशक गुण जोड़ता है। वैज्ञानिक शोध भी तांबे के पानी की रोगाणुनाशक क्षमता को मान्यता देते हैं। प्लास्टिक बोतलों के बजाय तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है और शरीर को शुद्ध, सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
निष्कर्ष
पानी जिंदगी का आधार है और शरीर के सभी अंगों के सुचारु कार्य के लिए अनिवार्य है। पानी की कमी या अधिकता दोनों ही सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि केवल पानी पीना ही नहीं, बल्कि उसे सही समय, सही मात्रा, सही तापमान और सही विधि से पीना आवश्यक है। जब हम इन सिद्धांतों को अपनाते हैं, तब साधारण सा पानी भी औषधि बन जाता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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