फैटी लिवर को साइलेंट बीमारी कहा जाता है, क्योंकि इसकी शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। जब तक लिवर में 5 से 10 प्रतिशत से अधिक फैट जमा नहीं हो जाता, तब तक व्यक्ति को आमतौर पर किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती। फैटी लिवर के लक्षण देर से दिखने की एक बड़ी वजह यह है कि लिवर में दर्द महसूस करने वाली नसें (pain nerves) नहीं होतीं। दर्द तब महसूस होता है, जब लिवर का आकार बढ़कर उसकी बाहरी परत यानी लिवर कैप्सूल (Capsule) पर दबाव डालने लगता है।

Journal of Gastroenterology में प्रकाशित शोध के मुताबिक, फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण सिर्फ खराब डाइट नहीं, बल्कि इंसुलिन रेजिस्टेंस है। जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो खून में मौजूद अतिरिक्त शुगर सीधे लिवर तक पहुंचती है और वहां फैट के रूप में जमा होने लगती है। यही प्रक्रिया आगे चलकर फैटी लिवर की शुरुआत करती है।

हालिया रिसर्च यह भी बताती है कि सफेद चीनी (White Sugar) और हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप लिवर के लिए उतने ही नुकसानदायक हो सकते हैं, जितनी शराब। दरअसल, लिवर फ्रुक्टोज को उसी तरह प्रोसेस करता है जैसे अल्कोहल को, जिससे लिवर में सूजन यानी इंफ्लेमेशन बढ़ता है और फैटी लिवर की स्थिति और बिगड़ सकती है।

वहीं, मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपने कुल शरीर के वजन का 7 से 10 प्रतिशत तक वजन कम कर लेता है, तो फैटी लिवर से जुड़ी लिवर की सूजन और फाइब्रोसिस को काफी हद तक रिवर्स किया जा सकता है। इसका मतलब है कि समय रहते लाइफस्टाइल में सुधार, वजन कंट्रोल और शुगर मैनेजमेंट से फैटी लिवर को बिगड़ने से रोका जा सकता है और लिवर की सेहत को दोबारा बेहतर बनाया जा सकता है। फैटी लिवर होने पर बॉडी कुछ संकेत देती है अगर उन्हें समझ लिया जाए तो आसानी से इस परेशानी को कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि लिवर में फैट जमा होने पर बॉडी में कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं।

हल्का पेट फूलना

हल्का पेट फूलना फैटी लिवर के लक्षण हैं, जिन्हें लोग अक्सर अपसेट स्टमक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस स्थिति में थोड़ी-सी मात्रा खाने के बाद भारीपन महसूस होना या माइल्ड मतली होने की परेशानी होती है। लोग इन लक्षणों को गैस, अपच या एसिडिटी समझ कर टाल देते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण बार-बार और लंबे समय तक बने रहें, तो यह किसी गंभीर समस्या जैसे फैटी लिवर डिजीज की ओर इशारा कर सकते हैं। फैटी लिवर की शुरुआती स्टेज में, तेज दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। इसके संकेत इतने हल्के होते हैं कि लोग सालों तक इसे सिर्फ “सेंसिटिव पेट” समझते रहते हैं।

थोड़ी-सी मात्रा खाने पर भी पेट भरा-भरा लगना

अगर हल्का भोजन करने के बाद भी पेट भारी और असहज लगे, तो इसे सिर्फ स्लो डाइजेशन या गैस मानना गलत हो सकता है। फैटी लिवर में लिवर पर फैट जमा होने से उसका आकार थोड़ा बढ़ जाता है। लिवर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में होता है और जब वह सूजता है, तो आसपास के अंगों पर दबाव डालता है। इससे खाने के बाद भारीपन या जकड़न महसूस हो सकती है।

पेट में दाहिनी तरफ हल्की असहजता

फैटी लिवर में आमतौर पर तेज दर्द नहीं होता। उसकी जगह पसलियों के नीचे, दाहिनी तरफ हल्की, लगातार असहजता या भारीपन महसूस होता है। यह गैस या मसल स्ट्रेन जैसा लग सकता है और तला-भुना खाने या लंबे समय तक बैठने के बाद बढ़ सकता है। क्योंकि दर्द तेज नहीं होता, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।

बिना ज्यादा खाने के लगातार पेट फूलना

अगर सीमित और हल्का खाना खाने के बावजूद रोजाना पेट फूला हुआ महसूस हो, तो यह संकेत हो सकता है। फैटी लिवर में लिवर की सूजन शरीर में फैट और शुगर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है और पेट भरा-भरा लगने लगता है। जब ब्लोटिंग कभी-कभार नहीं बल्कि रूटीन बन जाए, तो एंटासिड से आगे सोचने की जरूरत है।

बिना उल्टी के हल्की लेकिन लगातार मतली

सुबह-सुबह या भारी खाने के बाद हल्की मतली को अक्सर एसिडिटी से जोड़ दिया जाता है। फैटी लिवर में यह मतली धीमी लेकिन लगातार हो सकती है और आमतौर पर उल्टी नहीं होती। लिवर शरीर से टॉक्सिन निकालने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने में अहम भूमिका निभाता है। जब फैट इसकी कार्यक्षमता में बाधा डालता है, तो शरीर मतली के रूप में संकेत दे सकता है।

पाचन की परेशानी के साथ गहरी थकान

सिर्फ पेट खराब होना आम बात है, लेकिन अगर इसके साथ लगातार थकान भी महसूस हो, तो कारण पेट से आगे हो सकता है। फैटी लिवर में शरीर लिवर के तनाव से निपटने में ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है, जिससे व्यक्ति को बिना वजह थकान महसूस होती है। यह थकान आराम करने से भी पूरी तरह दूर नहीं होती।

इन लक्षणों को पहचानना क्यों मुश्किल होता है?

फैटी लिवर शुरुआत में कोई तेज या डराने वाला लक्षण नहीं देता। इसके संकेत आम पाचन समस्याओं जैसे होते हैं, जो ज्यादातर वयस्कों को कभी न कभी होती हैं। व्यस्त जीवनशैली, खुद से दवाइयां लेना और जांच टालते रहना इसकी पहचान में देरी कर देता है। जबकि एक साधारण ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड से इसका पता लगाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर:

यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी तरह की लगातार पाचन समस्या या थकान होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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