रोटी हमारी डाइट का अहम हिस्सा है जिसका हम भारतीय सबसे ज्यादा सेवन करते हैं। देश भर में ज्यादातर लोग गेहूं के आटे की रोटी खाते हैं जो डायबिटीज मरीजों के लिए ब्लड शुगर बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकती है। डायबिटीज मरीज दो रोटी खाते ही डरने लगते हैं कि इसे खाते ही ब्लड शुगर हाई होने लगेगा।  दरअसल, रिफाइंड या ज्यादा प्रोसेस्ड आटे से बनी रोटी, गलत फूड कॉम्बिनेशन और गलत समय पर रोटी खाने से ब्लड शुगर में तेजी से उछाल आ सकता है।

लेकिन आप जानते हैं कि डायबिटीज मरीजों के लिए रोटी का सेवन सुरक्षित हो सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए होल ग्रेन और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले आटे से बनी रोटियां बेहतर मानी जाती हैं। गेहूं के आटे में जौ, चना, सोयाबीन, बाजरा या ज्वार मिलाकर बनाई गई रोटी डायबिटीज फ्रेंडली रोटी बन जाती है। इस रोटी में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जिससे कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचता हैं और शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता।

दिल्ली की सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अर्चना बत्रा के मुताबिक डायबिटीज मरीजों को रिफाइंड आटे से बनी रोटी से बचना चाहिए। फाइबर और प्रोटीन से भरपूर मल्टीग्रेन या दालों से बनी रोटी ब्लड शुगर को धीरे बढ़ाती है और इंसुलिन स्पाइक का खतरा कम करती है। रोटी खाते समय उसके कॉम्बिनेशन का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। रोटी को हमेशा हरी सब्जियों, दाल, पनीर या दही जैसे प्रोटीन और फाइबर से भरपूर फूड्स के साथ लें। खाली पेट या आलू, चावल जैसे हाई कार्ब फूड्स के साथ रोटी खाने से बचें। इसके अलावा पोर्शन कंट्रोल और सही टाइमिंग भी जरूरी है। दिन के समय, खासकर लंच में सीमित मात्रा में रोटी खाना डायबिटीज मरीजों के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। सही चुनाव और सही आदतों के साथ रोटी डायबिटीज डाइट का हिस्सा बन सकती है। आइए जानते हैं कि डायबिटीज कंट्रोल करने वाली रोटियां कौन-कौन सी हैं।

डायबिटीज कंट्रोल करने वाली रोटियां

मल्टीग्रेन रोटी

गेहूं के साथ जौ, बाजरा, ज्वार या रागी मिलाकर बनी रोटी फाइबर से भरपूर होती है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम रखती है। इस रोटी का सेवन डायबिटीज मरीज रोज करें तो उनका ब्लड शुगर का स्तर खाने के बाद भी नॉर्मल रहेगा। Journal of Food Science and Technology के अनुसार, जब गेहूं में जौ, बाजरा या रागी मिलाया जाता है, तो इस मिश्रण का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम हो जाता है। कम GI वाला भोजन रक्त में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करता है, जिससे खाने के बाद अचानक ‘शुगर स्पाइक’ नहीं होता।

चना आटा रोटी

चना आटे में प्रोटीन और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे ब्लड शुगर धीरे बढ़ता है। American Journal of Clinical Nutrition के अनुसार, लो-जीआई वाले खाद्य पदार्थ रक्त प्रवाह में ग्लूकोज को बहुत धीरे-धीरे रिलीज करते हैं। इससे शरीर को इंसुलिन मैनेज करने का पर्याप्त समय मिल जाता है। चने के आटे में गेंहू के मुकाबले लगभग दोगुना प्रोटीन होता है। शोध बताते हैं कि प्रोटीन का सेवन कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है। यह Pancreas को सक्रिय करता है जिससे इंसुलिन का स्राव बेहतर होता है।

ज्वार की रोटी

ज्वार लो-GI फूड है और टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। ज्वार (Sorghum) को आधुनिक पोषण विज्ञान में ‘डायबिटिक-फ्रेंडली अनाज’ माना जाता है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए ज्वार न केवल एक विकल्प है, बल्कि यह सक्रिय रूप से ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। Journal of Nutrition and Metabolism में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ज्वार का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अन्य अनाजों जैसे चावल और गेहूं की तुलना में काफी कम होता है। लो-GI होने के कारण, ज्वार से बना भोजन पचने में अधिक समय लेता है। यह रक्त प्रवाह में ग्लूकोज के प्रवेश को धीमा कर देता है, जिससे भोजन के बाद शुगर में अचानक होने वाली बढ़ोतरी (Post-meal spikes) रुक जाती है।

बाजरे की रोटी

बाजरा इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है। Frontiers in Nutrition में प्रकाशित एक व्यापक मेटा-एनालिसिस जो 11 देशों के शोध पर आधारित था के अनुसार  नियमित रूप से बाजरा खाने वाले लोगों के ब्लड शुगर लेवल में 12% से 15% तक की कमी देखी गई। बाजरे में मौजूद मैग्नीशियम की उच्च मात्रा इंसुलिन रिसेप्टर्स की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। यह शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है, जिससे रक्त में तैरता ग्लूकोज ऊर्जा में बेहतर तरीके से बदल पाता है।

दाल मिलाकर बनी रोटी

गेहूं के आटे में मूंग, मसूर या सोयाबीन मिलाकर पिसवाने से रोटी प्रोटीन-रिच बनती है, जिससे शुगर स्पाइक का खतरा 30–40% तक कम हो सकता है।

  • रोटी खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
  • रोटी हमेशा सब्जी या प्रोटीन के बाद खाएं
  • रोटी के साथ आलू या चावल का कॉम्बिनेशन न बनाएं
  • रात में रोटी कम या न खाएं, दोपहर का समय बेहतर है
  • रोटी की मात्रा सीमित रखें। एक रोटी + ज्यादा सब्जी और प्रोटीन बेहतर है।

निष्कर्ष

डायबिटीज में रोटी पूरी तरह बंद करना ज़रूरी नहीं है। सही आटा, सही कॉम्बिनेशन और सही समय पर खाई गई रोटी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है। हालांकि, डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें।

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