आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर के बिना काम की कल्पना करना मुश्किल हो गया है। ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या मनोरंजन, हर जगह स्क्रीन हमारी आंखों के सामने रहती है। लेकिन इसी आदत का असर सबसे पहले हमारी आंखों पर पड़ता है। आंखों में सूखापन यानी ड्राई आई की समस्या को लोग अक्सर मामूली समझ लेते हैं, जबकि यह कई बार गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा राय के अनुसार आंखों की ड्राइनेस को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।
आंखों की ड्राइनेस क्या है और क्यों होती है?
आंखों की ड्राइनेस तब होती है जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या जो आंसू बनते हैं, वे जल्दी सूख जाते हैं। आंसू आंखों को नमी देने, धूल-मिट्टी से बचाने और साफ रखने का काम करते हैं। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो आंखों में जलन, चुभन, लालिमा, थकान और भारीपन महसूस होने लगता है। लगातार स्क्रीन देखने से पलकें कम झपकती हैं, जिससे ड्राइनेस की समस्या और बढ़ जाती है।
डायबिटीज भी बन सकती है ड्राई आई की वजह
डायबिटीज के मरीजों में आंखों की ड्राइनेस होना आम बात है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। ब्लड शुगर लंबे समय तक कंट्रोल में न रहने पर आंखों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। ये नसें आंसू बनने की प्रक्रिया को कंट्रोल करती हैं। नर्व डैमेज के कारण आंसू कम बनने लगते हैं और आंखों में सूखापन बढ़ जाता है। इसके साथ ही पलकों की ग्रंथियों में सूजन भी आ सकती है।
थायराइड डिसऑर्डर और आंखों की नमी
थायराइड से जुड़ी बीमारियां भी आंखों की ड्राइनेस का बड़ा कारण बन सकती हैं। थायराइड हार्मोन का असंतुलन आंखों में आंसू बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इसके कारण आंखों में सूखापन, जलन और कभी-कभी आंखों में खिंचाव महसूस होता है। थायराइड के मरीजों को आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए, ताकि समय रहते समस्या पकड़ी जा सके।
एलर्जी से भी बढ़ती है आंखों की ड्राइनेस
डस्ट, धुआं, पराग कण या किसी खास चीज से एलर्जी होने पर आंखों में खुजली और जलन होने लगती है। एलर्जी के दौरान कई बार आंखों से पानी कम निकलता है, जिससे ड्राइनेस की समस्या हो जाती है। इसके अलावा एलर्जी की कुछ दवाएं भी आंखों को सूखा बना देती हैं। ऐसे में एलर्जी से बचाव और डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी होती है।
विटामिन A की कमी
विटामिन A आंखों के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व है। इसकी कमी से आंखों में सूखापन, रात में कम दिखाई देना और गंभीर मामलों में जेरोफ्थैल्मिया जैसी बीमारी हो सकती है। यह समस्या धीरे-धीरे कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकती है। सही खानपान और पोषक तत्वों की पूर्ति से इस खतरे को कम किया जा सकता है।
अगर आंखें ड्राई हों तो क्या करें?
अगर आंखों में लगातार सूखापन महसूस हो रहा है, तो इसे हल्के में न लें। डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें। आंखों की सूजन कम करने के लिए दी गई दवाएं समय पर लें। अगर आंखों में आंसू कम बनते हैं, तो टियर स्टिमुलेटर उपयोगी हो सकते हैं। साथ ही, लगातार स्क्रीन देखने से बचें और आंखों को बीच-बीच में आराम दें। आंखों की सेहत के लिए जरूरी है कि स्क्रीन टाइम कम किया जाए। हर 20 मिनट में आंखों को कुछ सेकंड का ब्रेक दें और दूर देखें। पर्याप्त पानी पिएं और हरी सब्जियां, फल, दूध व गाजर जैसे पोषक तत्वों को आहार में शामिल करें। धूल और धुएं से आंखों को बचाकर रखें।
निष्कर्ष
आंखों की ड्राइनेस भले ही आम समस्या लगे, लेकिन इसके पीछे गंभीर कारण छिपे हो सकते हैं। खासतौर पर स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने वाले लोग इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना और सही जीवनशैली अपनाना आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
