मौसम बदलने के साथ दिल्ली और आसपास के शहरों में पिछले दिनों डेंगू के कई मामले आए हैं। बारिश के मौसम और उसके बाद मौसम बदलने पर अक्टूबर और नवंबर में मच्छरों का प्रजनन बढ़ने से हर वर्ष डेंगू के मामले सामने आते हैं। इसे चिकित्सक सामान्य बुखार नहीं मानते। इस लिहाज से इस समय सतर्कता बरतने की जरूरत है। डेंगू के लक्षणों को सामान्य मान कर घर पर स्वयं उपचार करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में खून की जांच कराने के साथ तुरंत चिकित्सक की निगरानी में इलाज कराना चाहिए।  

संक्रमण का दायरा

बारिश के दिनों में तो मच्छर बढ़ते ही है, वहीं मौसम बदलने पर अक्टूबर-नवंबर में सुबह और रात में मच्छर पनपने लगते हैं। इन्हीं दिनों संक्रमण भी बढ़ जाता है। नतीजा बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक मलेरिया और डेंगू के शिकार होने लगते हैं।

कैसे फैलता है डेंगू बुखार?

दरअसल, इन दिनों टूटे बर्तनों, टायरों और गमलों में जमा पानी भी मच्छरों को पनपने का अवसर दे देता है। हालांकि एडीज मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में ही प्रजनन करते हैं। ये डेंगू की वजह बन जाते हैं। ध्यान रखने की बात है कि डेंगू बुखार एक दूसरे से नहीं फैलता। मगर डेंगू पीड़ित का रक्त पीकर संक्रमित मच्छर जब दूसरे स्वस्थ लोगों को काटता है, तो वह डेंगू फैला देता है।

क्या है डेंगू के लक्षण?

मेदांता हॉस्पिटल इंदौर के मेडिसिन कंसलटेंट डॉ ज्योति वाधवानी के मुताबिक, तेज बुखार डेंगू का सबसे बड़ा लक्षण है। यह बुखार कई बार 104 डिग्री तक पहुंच जाता है, जिसके कराण इसको हड्डी तोड़ बुखार कहा जाता है।। यह रोगी के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। इस दौरान जोड़ो-हड्डियों और मांसपेशियों में बहुत दर्द होता है। डेंगू होने पर मरीजों को सिर में और आंखों के पीछे दर्द होता है। वह बेहद थका हुआ कमजोर महसूस करता है।

मरीज के शरीर में लाल चकत्ते भी पड़ जाते हैं। मरीज को उल्टी होना, मसूढ़ों और नाक से खून आना भी लक्षण है। भोजन में स्वाद नहीं आता। रक्त जांच में मरीज का प्लेटलेट्स गिरना भी गंभीर लक्षण हैं।

डेंगू से कैसे करें बचाव?

अपने आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कहीं किसी बर्तन में पानी जमा होता हो, तो उसे तुरंत साफ कर दें। सुबह और शाम पूरी बाजू की कमीज और पैंट पहनें। मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। खिड़कियों और दरवाजे पर पर्दे लगाएं। मच्छरों को मारने वाली दवा का छिड़काव करें। घरों में खिड़कियों और दरवाजे पर जाली लगवाएं। वहीं जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है, उन्हें अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। आजकल डेंगू के उपचार की कारगर दवाइयां आ गई हैं।

डेंगू होने पर क्या खाएं?

रोगियों को आहार इस तरह दिया जाना चाहिए कि वह आसानी से पच जाए। उसे खिचड़ी, दलिया और सूजी से बना कोई भी सुपाच्य भोजन दिया जा सकता है। पत्तेदार और पोषक तत्त्वों से भरपूर सब्जियों से बना सूप दिया जाना चाहिए। फलों में पपीता, अनार, संतरा और स्ट्रॉबेरी तथा खासतौर से कीवी दे सकते हैं। तरल पदार्थों में नारियल पानी और ताजा फलों का रस दिया जा सकता है।

कॉफी-चाय का न करें सेवन

मरीज को कॉफी-चाय नहीं देना चाहिए। इसकी जगह नींबू-पुदीने वाली चाय दी जा सकती है। डिब्बाबंद पेय और खाद्य पदार्थ भी नहीं दिया जाना चाहिए। तली हुई चीजें और वसायुक्त आहार से परहेज रखना ही बेहतर। मरीज की प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए पपीते के पत्ते का रस दिया जा सकता है। गाजर, चुकंदर और मौसमी जैसे फल कारगर होते हैं।

मरीज का कैसे रखें ख्याल?

अगर मरीज का घर में उपचार चल रहा हो, तो उसे पर्याप्त आराम करना चाहिए। तरल पदार्थ अधिक दिया जाए।  किसी भी तरह की सूजन रोधी दवाएं उसे नहीं दी जानी चाहिए। मरीज का कमरा साफ-सुथरा और शांत होना चाहिए। अगर देखभाल और उपचार समुचित तरीके से हो, तो ज्यादातर मरीज एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं।